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मैहर डीएफओ बोले- वनभूमि कब्जे की इजाजत नहीं:आदिवासियों को अपराध करने के लिए उकसाने वालों पर होगी कार्रवाई




मैहर जिले के बदेरा थाना क्षेत्र के ग्राम बहेली में आरक्षित वनभूमि पर बिरसा मुंडा और डॉ. भीमराव अंबेडकर की मूर्तियां स्थापित करने और कब्जे को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही बातों के बाद वन विभाग ने अपना पक्ष साफ किया है। शनिवार शाम डीएफओ (DFO) विद्याभूषण मिश्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पूरे मामले की जानकारी दी। डीएफओ ने कहा कि वन विभाग का मकसद किसी गरीब या असहाय आदिवासी को परेशान करना नहीं है, लेकिन मूर्तियों की आड़ में वनभूमि पर अवैध कब्जा करना कानूनन अपराध है और ऐसा करने वालों पर कार्रवाई होगी। एक महीने पहले भी हुआ था कब्जे का प्रयास उन्होंने बताया कि करीब एक महीने पहले 2 जुलाई को मौदहा बीट के कक्ष क्रमांक 580 में भगवान बिरसा मुंडा की मूर्ति स्थापित कर वनभूमि पर कब्जे की सूचना मिली थी। इस पर वन अमले ने मौके पर पहुंचकर मूर्ति जब्त की थी और दो लोगों को दफ्तर लाया गया था। बाद में ग्रामीणों के कहने पर इस शर्त पर उन्हें छोड़ा गया था कि वे दोबारा अतिक्रमण नहीं करेंगे, जिसके बाद मूर्ति भी सम्मानपूर्वक लौटा दी गई थी। 5 अगस्त को फिर स्थापित की गईं मूर्तियां, हटाया गया कब्जा शर्तों के बावजूद 5 अगस्त को फिर से कब्जे की सूचना मिली। इस बार बिरसा मुंडा के साथ डॉ. भीमराव अंबेडकर की मूर्ति भी स्थापित कर दी गई थी। वन विभाग के अनुसार, लगभग 60 से 70 झोपड़ियां और ढांचा बनाकर दो एकड़ से ज्यादा वनभूमि पर कब्जा कर लिया गया था। समझाइश के बाद भी जमीन खाली न होने पर पुलिस बल की मदद ली गई। 5 अगस्त को पुलिस और वन विभाग की संयुक्त टीम ने दोनों मूर्तियों को सम्मानपूर्वक मैहर भिजवाया और पक्के चबूतरों व झोपड़ियों को हटाकर वनभूमि को कब्जामुक्त कराया। ‘आदिवासियों को सताना मकसद नहीं’ डीएफओ विद्याभूषण मिश्रा ने साफ किया कि आदिवासियों के जमीन से जुड़े मुद्दे जनप्रतिनिधियों और जिला प्रशासन की जानकारी में हैं, लेकिन आरक्षित वनभूमि पर अवैध कब्जे की इजाजत बिल्कुल नहीं दी जा सकती। उकसाने वालों की जांच जारी डीएफओ ने बताया कि शुरुआती जांच में कुछ लोगों या संगठनों द्वारा आदिवासियों को आगे करके कब्जा कराने की जानकारी सामने आ रही है। वन विभाग इस बात की जांच कर रहा है कि इसके पीछे कौन लोग शामिल हैं, जिसके बाद उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।



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