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Yamunanagar Cyber Crime Police CUG Number Added To Obscene Video WhatsApp Group


यमुनानगर में साइबर ठगी के आरोपियों तक पहुंचने के लिए पुलिस जिन मोबाइल नंबरों की निगरानी कर रही थी, उन्हीं नंबरों से जुड़े लोगों ने पुलिस के सरकारी मोबाइल नंबर को ही निशाना बना लिया। आरोप है कि यमुनानगर थाना साइबर क्राइम के CUG फोन नंबर को आरोपियों ने

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इसके बाद इन ग्रुपों में अश्लील और आपत्तिजनक फोटो-वीडियो भेजे गए। मामले में साइबर सेल के उपनिरीक्षक विशाल सैनी की शिकायत पर पुलिस ने पृथ्वीराज, हरीकेश और जितेंद्र यादव के खिलाफ केस दर्ज किया है।

किसी अन्य केस में जांच कर रही थी पुलिस

पुलिस के मुताबिक, साइबर क्राइम थाना एक अन्य मामले की जांच कर रहा था। जांच के दौरान कुछ संदिग्ध मोबाइल नंबर सामने आए थे। इन नंबरों की गतिविधियों को ट्रैक करते हुए पुलिस आरोपियों तक पहुंचने और उनसे संपर्क करने का प्रयास कर रही थी। इसी दौरान आरोप है कि आरोपियों ने पुलिस के सरकारी CUG नंबर को कई ग्रुपों में जोड़ दिया।

इन ग्रुपों में बाद में आपत्तिजनक फोटो और वीडियो शेयर किए जाने लगे। पुलिस ने जब पूरे मामले की पड़ताल शुरू की तो सामने आया कि ये WhatsApp ग्रुप साइबर अपराध से जुड़े नेटवर्क का हिस्सा हो सकते हैं। संदेह है कि इन ग्रुपों के जरिए वीडियो कॉल करके लोगों को अपने जाल में फंसाया जाता है।

साइबर क्राइम थाना, यमुनानगर।

साइबर क्राइम थाना, यमुनानगर।

पहले वीडियो कॉल, फिर ब्लैकमेलिंग का खेल

जांच में पुलिस को आशंका है कि गिरोह के सदस्य लोगों को वीडियो कॉल के माध्यम से संपर्क करते हैं। बातचीत के दौरान उनकी फोटो या वीडियो हासिल करने के बाद उसमें एडिटिंग कर अश्लील सामग्री तैयार की जाती है।

इसके बाद उसे सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों पर वायरल करने की धमकी देकर पीड़ितों से पैसे वसूलने का प्रयास किया जाता है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि जिन WhatsApp ग्रुपों में सरकारी नंबर जोड़ा गया, उनका इस्तेमाल इसी तरह की साइबर ठगी के लिए किया जा रहा था या नहीं।

चार राज्यों में मिले संदिग्ध नंबरों के लोकेशन

पुलिस की जांच में सामने आए मोबाइल नंबरों की लोकेशन एक ही जगह की नहीं मिली। कुछ नंबरों की लोकेशन दिल्ली, पश्चिम बंगाल, हिमाचल प्रदेश और उत्तर प्रदेश के अलग-अलग शहरों में सामने आई है। इससे पुलिस को संदेह है कि इस नेटवर्क से जुड़े लोग अलग-अलग राज्यों में बैठकर गतिविधियां संचालित कर रहे हैं।

थाना साइबर क्राइम के एसएचओ रविंद्र कुमार ने बताया कि पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। फिलहाल संदिग्ध मोबाइल नंबरों और WhatsApp ग्रुप की गतिविधियों की जानकारी जुटाई जा रही है। जांच के दौरान यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि इस नेटवर्क में कितने लोग जुड़े हैं और इसकी गतिविधियां कितने क्षेत्र तक फैली हुई हैं।



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