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N. Raghuraman’s Column – To Shine in the Hospitality Industry, Bring ‘Style’ to Your Work


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1 घंटे पहले

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एन. रघुरामन
मैनेजमेंट गुरु - Dainik Bhaskar

एन. रघुरामन मैनेजमेंट गुरु

इन दिनों मैं देखता हूं कि कॉलेज से पास-आउट युवा सूट और टाई के आकर्षण में आकर हॉस्पिटैलिटी इंडस्ट्री में आने की कोशिश करते हैं। लेकिन धीरे-धीरे उन्हें समझ आता है कि यहां ऐसा कोई काम नहीं है, जिसे वे किसी दूसरे से करने के लिए कह सकें, लेकिन खुद न करना चाहें। अचानक-से वे खुद को टेबल से पानी और वाइन के गिलास उठाते और उसे साफ करते हुए पाते हैं। उस समय उनकी आंखें टेबल के बजाय इधर-उधर देखती ज्यादा नजर आती हैं।

ऐसा इसलिए, क्योंकि वे नहीं चाहते कि कोई परिचित या परिजन उन्हें यह काम करते हुए देखे। इसमें हैरानी नहीं कि युवाओं में हॉस्पिटैलिटी को कामचलाऊ पेशा माना जाता है, लेकिन यह उनको कई ऐसी महत्वपूर्ण स्किल्स देता है, जो दूसरी इंडस्ट्री शायद ही देती है।

आप पूछ सकते हैं कि आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाए बिना हॉस्पिटैलिटी इंडस्ट्री में कैसे टिके रहें। मेरा सीधा-सा जवाब है- ‘स्टाइल कोशंट’ जोड़िए। जापानी मिल्क-बन का उदाहरण लीजिए, जो मीठे, मुलायम और फोटोजेनिक होते हैं। ये जापान ही नहीं, पूरे यूरोप और अमेरिका में भी बेहद सफल हैं। ये बन ऊपर से सुनहरे भूरे और अंदर से बादल की तरह मुलायम होते हैं।

ऊपरी तौर पर देखें तो ये मुंबई में किसी चौपाटी के स्टॉल पर पावभाजी के साथ परोसे जाने वाले पाव जैसे दिखेंगे। लेकिन किसी शेफ की फोटोजेनिक नजरों से वही बन उसके बर्गर को कल्ट-बर्गर बना सकते हैं और उसकी कीमत 300% बढ़ा सकते हैं।

मुझे हाई-एंड केक बनाने के आर्ट के बारे में तब पता चला, जब एक मशहूर बेकर ने अभिनेत्री काजोल के लिए बनाए जाने वाले केक पर लिखा जाने वाला हनी ईरानी का मैसेज गलती से मेरे दोस्त को भेज दिया। काजोल ने 5 अगस्त को अपना जन्मदिन मनाया और हनी ईरानी भारतीय सिनेमा की वेटरन एक्ट्रेस और पुरस्कार विजेता स्क्रीनराइटर हैं।

उन्होंने यश चोपड़ा की मशहूर फिल्म ‘लम्हे’ (1991) के लिए अपनी डेब्यू स्क्रिप्ट लिखी थी और बेस्ट स्टोरी का फिल्मफेयर जीता था। मैंने अपने दोस्त से वही केक मुझे भेजने के लिए कहा और यकीन मानिए वह हर तरीके से बिल्कुल अलग था। जो रेस्तरां खाने को लग्जरी अनुभव में बदल पाते हैं, वे दुनिया में सबसे ज्यादा कमाते हैं। अमेरिका का उदाहरण लें।

वहां अगर आप किसी हाई-एंड रेस्तरां में टेबल बुक करने की कोशिश कर रहे हैं तो आपको शाम 5 बजे का, या फिर रात 10:30 बजे का ही स्लॉट मिलेगा। 1.5 ट्रिलियन डॉलर की यह इंडस्ट्री पूरे हफ्ते ओवर-क्राउडेड रहती है। और यहां मैं सिर्फ उन लोगों की बात कर रहा हूं, जो बाहर जाकर खाने पर खूब खर्च करते हैं। इन लोगों की इस परेशानी ने नए ऐप्स, मेंबरशिप क्लब्स और बिचौलियों को जन्म दिया है, जो खाने पर अत्यधिक खर्च करने वालों और उनके पसंदीदा रेस्तरां तक पहुंच बनाने के लिए मुकाबला कर रहे हैं।

हॉस्पिटैलिटी में स्टाइल महज यह नहीं कि आप क्या पहनते हैं या खाने को कैसे सजाते हैं। यह आपकी भाषा, बॉडी लैंग्वेज और व्यवहार में भी समान रूप से नजर आता है। कोई युवा प्रोफेशनल अगर कैजुअल ‘ओके’ कहने के बजाय कहता है कि ‘बिल्कुल सर, मैं इसका ध्यान रखूंगा,’ तो वह अलग इम्प्रेशन छोड़ता है। टेबल के पास खड़े होने, ट्रे उठाने, कुर्सी खींचने, बिना बीच में टोके बात सुनने, बिना घूरे नजरें मिलाने और गेस्ट की ओर पीठ किए बगैर वहां से हटने के आपके तौर-तरीके साधारण सर्विस को भी शानदार बना सकते हैं।

आप गिलास भी उठा रहे हैं तो उम्मीद की जाती है कि यह आप उसी गरिमा से करेंगे, जैसे आप फाइव-स्टार भोजन परोसते हैं। सिर्फ सॉफ्टली बोलना ही नहीं, बल्कि काम में अपोलोजेटिक दिखे बिना आत्मसम्मान के साथ चलना भी हॉस्पिटैलिटी प्रोफेशनल की पहचान है। गेस्ट को लगना चाहिए कि आप महज खाना नहीं परोस रहे, बल्कि एक अनुभव दे रहे हैं। यही असली स्टाइल कोशंट है।

फंडा यह है कि हॉस्पिटैलिटी कोई लो-स्टेटस जॉब नहीं, जिसे आप ‘बेहतर’ नौकरी मिलने तक कामचलाऊ तौर पर करें। यह ऐसी इंडस्ट्री है, जहां साधारण-से काम को भी असाधारण बारीकी से किया जाए तो वह मूल्यवान बन जाता है।

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