जमुई में सोमवार को वाम दलों से संबद्ध किसान सभा, सीटू, बिहार खेतिहर मजदूर यूनियन, डीवाईएफआई, एसएफआई और जनवादी महिला समिति की जिला कमेटियों ने देशव्यापी ‘जेल भरो’ आंदोलन किया।
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भाजपा और आरएसएस सरकार की नीतियों के विरोध में यह प्रदर्शन कचहरी चौक पर किया गया, जहां सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने सड़क जाम कर नारेबाजी की। आंदोलन का नेतृत्व सीपीएम के जिला सचिव नागेश्वर प्रसाद ने किया।
प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार से चार लेबर कोड रद्द करने, बीड़ी ग्राम योजना वापस लेने और मनरेगा को उसके पूर्व स्वरूप में बहाल करने की मांग की।
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बिजली निजीकरण पर रोक,स्मार्ट मीटर वापस लें
उन्होंने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को जनविरोधी बताते हुए उसे रद्द करने, बिजली के निजीकरण पर रोक लगाने और स्मार्ट मीटर वापस लेने की भी मांग उठाई।
आंदोलन में शामिल संगठनों ने आशा, ममता, वैक्सीन कूरियर और आंगनबाड़ी सहित सभी योजना कर्मियों को सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने तथा उनकी न्यूनतम मजदूरी बढ़ाकर 26 हजार रुपये प्रतिमाह करने की मांग की।
निजी वाहनों पर प्रस्तावित टोल टैक्स योजना बंद
इसके अतिरिक्त, परिवहन कानून से जुड़े विरोधी प्रावधानों को वापस लेने, निजी वाहनों पर प्रस्तावित टोल टैक्स योजना बंद करने और पेट्रोलियम तथा गैस की कीमतें कम करने की मांग भी रखी गई। खाद की कालाबाजारी पर रोक लगाने की भी अपील की गई।

कर्ज माफी और फसल बीमा का लाभ मिले
किसानों से जुड़ी मांगों में कर्ज माफी, ब्याज दर कम करने, फसल बीमा का लाभ सुनिश्चित करने और किसान क्रेडिट कार्ड के कर्ज को माफ करने की मांग प्रमुख रही। प्रदर्शनकारियों ने रासायनिक और आउटसोर्सिंग व्यवस्था समाप्त कर स्वीकृत पदों पर नियमित बहाली की भी मांग की।
ग्रामीणों पर होल्डिंग टैक्स और पानी टैक्स लगाने का विरोध करते हुए, प्रदर्शनकारियों ने गृहविहीन लोगों को आवास उपलब्ध कराने और जबरन भूमि अधिग्रहण रोकने की मांग की। स्थानीय मुद्दों में सिकंदरा और झाझा को अनुमंडल तथा लछुआड़ को प्रखंड बनाने की मांग भी शामिल थी।

सभी भूमिहीनों को पांच डिसमिल जमीन का पर्चा देने, दाखिल-खारिज और परिमार्जन के नाम पर कथित अवैध वसूली बंद करने की मांग भी उठाई गई।
प्रदर्शनकारियों ने गरीबों के घर और फुटपाथ दुकानदारों को उजाड़ने की कार्रवाई रोकने के साथ-साथ जिले में उद्योग स्थापित कर बेरोजगारों को रोजगार देने की भी मांग की।
