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हिमाचल प्रदेश में मई 2026 में हुए पंचायती राज चुनाव के बाद जिला परिषद शिमला के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव अब तक नहीं हुआ है। इस मामले को लेकर नवनिर्वाचित जिला परिषद सदस्यों ने हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। ममता समेत 13 नवनिर्वाचित सदस्यों ने प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन के खिलाफ याचिका दायर की है। याचिका में आरोप लगाया है कि अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव जानबूझकर लटकाया जा रहा है। सदस्यों ने हाईकोर्ट से डीसी शिमला को जल्द बैठक बुलाकर अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव करवाने के निर्देश देने की मांग की है। याचिका के अनुसार, 6 जून 2026 को जिला परिषद के सभी 25 निर्वाचित सदस्यों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई गई थी। इसके बाद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव होना था, लेकिन प्रशासन ने चुनाव नहीं करवाया। इसी तरह रिजल्ट 31 मई को आ चुके है। दो बार बैठकें बुलाई जा चुकी,पूर्व सदस्यों का कार्यकाल पूरा हो चुका इसके बाद 27 जून और 3 अगस्त को बैठकें बुलाई गईं, लेकिन याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इन बैठकों में चुनाव का एजेंडा स्पष्ट नहीं था। उनका आरोप है कि कुछ बैठकों में उपायुक्त भी मौजूद नहीं रहे। इससे चुनाव की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि जिला परिषद का पिछला कार्यकाल जनवरी 2026 में समाप्त हो गया था। इसके बाद नया चुनाव होने और सदस्यों के शपथ लेने के बावजूद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव नहीं हुआ है। इससे जिला परिषद पूरी तरह काम नहीं कर पा रही है और ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़े विकास कार्यों तथा योजनाओं पर भी असर पड़ रहा है। समय-सीमा में अध्यक्ष व उपाध्यक्ष का चुनाव कराने की मांग अब सदस्यों ने हाईकोर्ट से मांग की है कि प्रशासन को एक निश्चित समय-सीमा में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव करवाने के निर्देश दिए जाएं। मामले में हाईकोर्ट के रुख पर अब सभी की नजरें हैं। बता दें कि जिला परिषद के चुनाव में देरी को लेकर राज्य में सियासत भी खूब गरमाई हुई है। बीते शनिवार को नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कांग्रेस सरकार पर चुनाव टालने को लेकर गंभीर आरोप लगाए। इसके जवाब में सीएम सुक्खू ने आज नेता प्रतिपक्ष पर ही पलटवार किया।
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हाईकोर्ट पहुंचा शिमला जिला परिषद चुनाव में देरी का मामला:13 सदस्य ने चुनौती दी; डीसी को जल्द बैठक बुलाने के निर्देश की मांग
