![]()
चिंतपूर्णी से विधायक सुदर्शन सिंह बबलू और उनके सह-आरोपी राकेश सोनी को वर्ष 2022 के बहुचर्चित इंटरनेट मीडिया (सोशल मीडिया) विवाद और एससी/एसटी (SC/ST) एक्ट से जुड़े एक मामले में बड़ी राहत मिली है। सेशन जज नरेश ठाकुर की माननीय अदालत ने दोनों ही नेताओं को सभी आरोपों से पूरी तरह मुक्त करते हुए बरी कर दिया है। यह पूरा मामला शिकायतकर्ता अमनप्रीत कौर की शिकायत पर पुलिस थाना में एफआईआर (FIR) संख्या 90/22 के तहत दर्ज किया गया था। शिकायतकर्ता महिला ने आरोप लगाया था कि विधायक सुदर्शन बबलू और राकेश सोनी ने उनकी अश्लील तस्वीरें एडिट कर सोशल मीडिया पर वायरल की थीं। राजनीतिक गलियारों में इस पूरे प्रकरण को शुरुआत से ही राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता और आपसी रंजिश के नजरिए से देखा जा रहा था। 19 गवाहों के बावजूद दोष सिद्ध करने में नाकाम रहा अभियोजन पक्ष अदालत ने मामले की लंबी सुनवाई और पेश किए गए साक्ष्यों का गहनता से अवलोकन किया। अभियोजन पक्ष (Prosecution) की ओर से इन संगीन आरोपों को साबित करने के लिए अदालत के समक्ष 19 गवाह पेश किए गए थे। हालांकि, कड़ी कानूनी कसौटी पर प्रस्तुत साक्ष्य और गवाहों के बयान आरोपों को सिद्ध करने में पूरी तरह नाकाम रहे। अदालत ने अंततः पाया कि महिला द्वारा लगाए गए सभी आरोप बेबुनियाद थे। बचाव पक्ष के वकीलों ने पेश की मजबूत दलीलें अदालत में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ एडवोकेट विकास कश्यप और एडवोकेट रोहित जोशी ने प्रभावी ढंग से पैरवी की। दोनों पक्षों की दलीलों, गवाहों के बयानों और तकनीकी तथ्यों की विस्तृत समीक्षा करने के बाद, माननीय अदालत ने दोनों आरोपियों को बेकसूर मानते हुए बरी करने का ऐतिहासिक निर्णय सुनाया। सत्य परेशान हो सकता है, पराजित नहीं: विधायक सुदर्शन बबलू अदालत के इस फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए एडवोकेट विकास कश्यप ने इसे लोकतंत्र और देश की न्याय व्यवस्था की एक बड़ी जीत बताया। फैसले के बाद राहत महसूस कर रहे विधायक सुदर्शन बबलू ने कहा, “सत्य परेशान हो सकता है, लेकिन पराजित नहीं।” उन्होंने विरोधियों पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि यह उन्हें राजनीतिक रूप से बदनाम करने और उनके करियर को नुकसान पहुँचाने की एक सोची-समझी साजिश थी, लेकिन अंततः न्यायपालिका पर उनके अटूट विश्वास की जीत हुई है।
Source link
चिंतपूर्णी विधायक सुदर्शन बबलू और सहआरोपित बरी:इंटरनेट मीडिया विवाद व एससी/एसटी एक्ट मामले में कोर्ट का फैसला
