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कांग्रेस ने प्रदेश सरकार पर 9 अगस्त को मनाये जाने वाले विश्व आदिवासी दिवस के अघोषित बहिष्कार एवं उपेक्षा का आरोप लगाया है। कांग्रेस ने कहा कि भारत की राष्ट्रपति और प्रदेश के मुख्यमंत्री, स्वयं आदिवासी समाज से आते हैं उनके द्वारा कोई भी बधाई संदेश तक जारी नहीं किया गया। अंबिकापुर के राजीव भवन में पत्रकारों को संबोधित करते हुए पूर्व मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह ने कहा कि संघ परिवार और भाजपा हमें आदिवासी के रूप में स्वीकार ही नहीं करती, वो तो हमें वनवासी कहती है, जबकि आजादी के बाद कांग्रेस की कल्याणकारी नीतियों के परिणामस्वरूप आज आदिवासी समाज के लोग शिक्षित हो देश के विकास में अन्य समुदाय के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रहे हैं। पूर्व मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री सहित बड़ी संख्या में आदिवासी मंत्री और विधायक इस सरकार में मौजूद हैं, लेकिन ये सभी आदिवासी दिवस पर अपने समुदाय की उपेक्षा पर चुप है, वे किसके दबाव में हैं, उन्हें यह स्पष्ट करना चाहिए। आदिवासी समुदाय के महान विरासत को भाजपा चौक चौराहे पर मूर्तियों में कैद कर आदिवासियों के वोटबैंक के लिए टोकनिज्म की राजनीति करती है। पूर्व मंत्री डा. साय ने कहा कि एक ओर भाजपा हमे वनवासी कहती है वहीं पूरे प्रदेश में हमारे वन के साथ ही कृषि भूमि को अपने खास उद्योगपति को परोस हमें संसाधन विहीन कर रही है। आदिवासी क्षेत्रों से ही भाजपा को बहुमत कांग्रेस जिलाध्यक्ष बालकृष्ण पाठक ने कहा कि भाजपा को यह नहीं भूलना चाहिए कि आदिवासी बहुल सरगुजा संभाग की 14 सीटों सहित बस्तर, कोरबा जैसे जिलों से प्राप्त आदिवासी समुदाय के समर्थन से उन्होंने यह सरकार बनाई है। उन्होंने भाजपा द्वारा आदिवासियों को वनवासी कहने की निंदा की है। आदिवासी कांग्रेस के जिलाध्यक्ष अनिल पैकरा ने कहा कि एक आदिवासी मुख्यमंत्री के होते हुए भी आदिवासी दिवस की उपेक्षा संघ परिवार के दबाव का परिणाम है। देश प्रदेश में भाजपा की सरकार आदिवासियों के आरक्षण के हित को भी समाप्त करने की दिशा में कार्य कर रही है। पत्रकारों से चर्चा के दौरान अन्य कांग्रेस पदाधिकारी भी मौजूद थे।
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कांग्रेस का आरोप-आदिवासी दिवस की भाजपा सरकार ने की अनदेखी:आदिवासियों को वनवासी कहना भी षडयंत्र, बधाई संदेश तक नहीं दिया
