पठानकोट में फिर गहराया तबाही का खौफ:रावी, उज्ज और जलालिया दरिया उफान पर, अगस्त 2025 की भयानक त्रासदी की यादें हुईं ताजा




जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी क्षेत्रों में जारी मूसलाधार बारिश के चलते पठानकोट जिले में एक बार फिर बाढ़ जैसी गंभीर स्थिति पैदा हो गई है। जिले से होकर गुजरने वाले उज्ज दरिया और जलालिया नाले अपने पूरे उफान पर हैं, जिनका पानी मुख्य सड़कों और खेतों से होता हुआ रिहायशी इलाकों में दाखिल होने लगा है। आगे जाकर यह पानी रावी नदी (मकौड़ा पत्तन) में मिल रहा है, जिससे तटीय और निचले इलाकों में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है। नदियों के इस रौद्र रूप और तबाही के मंजर को देखकर स्थानीय निवासियों के जेहन में अगस्त 2025 की भयानक त्रासदी की यादें फिर से ताजा हो गई हैं। जब रातों-रात गांवों में 4 से 6 फीट पानी चढ़ गया और लोगों के सामने उनके खून पसीने से तैयार किए मकान बाढ़ के पानी में बह गए या क्षतिग्रस्त हो गए। मौजूदा हालात ये हैं कि जलालिया और उज्ज दरिया के पानी ने कई गांवों को अभी से चपेट में ले लिया है। लोगों का कहना है कि अगर पिछले साल की तरह हालात बने तो सैंकड़ों परिवार बेघर हो जाएंगे। बामियाल और दनवाल पूरी तरह बाढ़ की चपेट में सीमावर्ती बामियाल ब्लॉक के गांवों में पानी भरने से हालात बेहद चिंताजनक हो गए हैं। स्थानीय ग्रामीणों ने अपनी आपबीती साझा करते हुए प्रशासन और स्थानीय विधायक से तुरंत मदद की गुहार लगाई है। घरों में घुसा पानी, फसलें जलमग्न: गांव के निवासी राहुल सिंह और कुलदीप सिंह ने बताया कि उज्ज और जलालिया दरिया के उफान पर आने से बामियाल, दनवाल, कुल्लियां, मूंठी, मेहरा चक और समराला सहित आसपास के आधा दर्जन से अधिक गांव पानी से घिर चुके हैं। हर साल का स्थायी दर्द: ग्रामीणों का कहना है कि हर साल खेतों में कई-कई फीट पानी भर जाता है और घरों के अंदर घुटनों तक पानी घुस आता है, जिससे धान और अन्य फसलें पूरी तरह तबाह हो जाती हैं। अचानक पानी छोड़ने से तबाही: लोगों का आरोप है कि पीछे से पानी को नियंत्रित तरीके से थोड़ा-थोड़ा छोड़ने की बजाय अचानक भारी मात्रा में छोड़ दिया जाता है, जिससे गांवों में बाढ़ की स्थिति बनती है। ग्रामीणों ने मांग की है कि प्रशासन व जनप्रतिनिधि मौके पर आकर स्थिति का जायजा लें और इस स्थायी समस्या का ठोस समाधान करें। हाईवे बाधित और भूस्खलन का कहर यातायात ठप: जलालिया नाले का पानी बामियाल की मुख्य सड़क पर कई फीट ऊपर बह रहा है, जिससे सीमावर्ती गांवों का संपर्क कटने की कगार पर है। मंडी-पठानकोट हाईवे बंद: उरला ताल गहर के पास भीषण लैंडस्लाइड होने और सड़कों पर मलबा जमा होने से यातायात पूरी तरह ठप पड़ा है। भरमौर-पठानकोट हाईवे ठप: पहाड़ों से लगातार गिरते पत्थरों और मलबे के कारण इस मार्ग पर भी गाड़ियों की आवाजाही जोखिम भरी हो गई है। 48 घंटों का यलो अलर्ट 48 घंटों का ‘यलो अलर्ट’: मौसम विभाग ने पठानकोट, गुरदासपुर और होशियारपुर में अगले 48 घंटों के लिए तेज गरज-चमक के साथ भारी बारिश का ‘यलो अलर्ट’ जारी किया है। फ्लैश फ्लड का खतरा: पहाड़ी क्षेत्रों में वर्षा के कारण चक्की खड्ड और रावी नदी में अचानक फ्लैश फ्लड आने का जोखिम बना हुआ है। कठुआ में स्कूल बंद: पठानकोट से सटे जम्मू के कठुआ जिले के पहाड़ी इलाकों (बनी, बिलावर) में भारी वर्षा के चलते स्कूल बंद कर दिए गए हैं। वहां का पूरा बरसाती पानी नीचे बामियाल और पठानकोट के नालों में आ रहा है। रणजीत सागर बांध और शाहपुर कंडी का जलस्तर अगस्त 2025: जब तबाही ने तोड़े थे सारे रिकॉर्ड स्थानीय लोग इस समय इसलिए भी ज्यादा सहमे हुए हैं क्योंकि पिछले साल अगस्त 2025 में जिले ने विनाशकारी बाढ़ झेली थी। माधोपुर बैराज के गेट टूटे: 27 अगस्त 2025 को रावी नदी में आए भीषण उफान के कारण माधोपुर बैराज के तीन फ्लड गेट क्षतिग्रस्त हो गए थे, जिससे पठानकोट और गुरदासपुर के निचले इलाकों में पानी फैल गया था। 40 से अधिक गांव हुए थे जलमग्न: कैलाशपुर सहित सीमावर्ती क्षेत्रों के 40 से अधिक गांवों में पानी घुस गया था। हजारों एकड़ फसल बर्बाद हो गई थी और नेशनल हाईवे कई दिनों तक बंद रहा था। रेस्क्यू ऑपरेशन: स्थिति इतनी नाजुक हो गई थी कि राहत व बचाव के लिए सेना और एनडीआरएफ की टीमों को तैनात करना पड़ा था। रावी नदी के मौजूदा हालात: प्रशासन सतर्क, लोगों से की अपील सिंचाई विभाग और जिला प्रशासन द्वारा माधोपुर हेडवर्क्स और रावी के तटबंधों (धुस्सी बांधों) पर चौबीसों घंटे निगरानी रखी जा रही है। मौसम विभाग द्वारा अगले 48 घंटों के लिए ‘यलो अलर्ट’ जारी होने के कारण रावी और चक्की खड्ड के आसपास के निवासियों को नदी के पास न जाने की सख्त हिदायत दी गई है। किसी भी आपात स्थिति में तुरंत फ्लड कंट्रोल रूम से संपर्क करें।



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