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हर घर तिरंगा अभियान जीविका दीदियों को मिला नया रोजगार:1600 जीविका दीदी दिन-रात बना रही तिरंगा, 80 हजार तिरंगा बनाने का मिला ऑर्डर




वंदे मातरम् गीत के 150 वर्ष पूरा होने पर हर घर तिरंगा अभियान, जीविका दीदियों के लिए रोजगार का अवसर लेकर आया है। तिरंगा झंडा की मांग को देखते हुए जीविका दीदियों को तिरंगा बनाने का आर्डर मिल रहा है। सिर्फ जिले की सरकारी संस्थाओं के द्वारा 80 हजार तिरंगा बनाने का आर्डर जीविका दीदियों को दिया गया है। ऑर्डर मिलने के बाद जीविका समूह की महिलाएं दिन-रात काम कर रही हैं। समय सीमा के अंदर उन्हें तिरंगा लोगों को मिल सके इसके लिए जिले के 20 प्रखंडों को 4-4 हजार तिरंगा झांडा बनाने को कहा गया है। सिलाई केंद्र में 25 जीविका दीदी राउंड द कलॉक काम कर रही है जिले के उजियारपुर प्रखंड के बेलारी गांव स्थित शशि जीविका महिला संकुल संघ के दीदियों की सिलाई केंद्र में 25 जीविका दीदी राउंड दी कलॉक काम कर रही है। जबकि इससे अधिक महिलाएं अपने-अपने घरों में भी सिलाई मशीन पर झंडे बनने के काम में लगी है। संकुल प्रभारी नीतू कुमारी ने बताया कि जिला की ओर से इन्हें पहले चरण में 4000 झंडा बनाने का आर्डर मिला था। ऑर्डर पूरा करने के बाद अब इन्हें दूसरे लौट में 10 हजार झंडा और बनाने का आर्डर प्राप्त हुआ है संकुल की महिलाएं लगातार झंडा बनाने में लगी हुई है। एक महिलाएं रोज 200 झंडा बना ले रहे हैं। उन्हें कच्चा माल उपलब्ध कराया जाता है। कच्चा माल मिलने में परेशानी होने पर जीविका के प्रखंड से लेकर जिला स्तरीय पदाधिकारी मदद करते हैं। उन्होंने कहा कि कोरोना कल से ही यह संकुल अपना प्रदर्शन दिखा रहा है। कोरोना के समय में बड़े पैमाने पर यहां से मास्क बनाने का काम किया गया था। संकुल की महिलाएं अन्य प्रकार की सिलाई कढ़ाई भी करती है, जैसे कि सलवार सूट, नाइटी आदि का भी निर्माण कर इसे विभिन्न माध्यमों से बाजार में भेजतीं है। संकुल की महिलाएं प्रत्येक महीना 10 से 15 हजार रुपए तक की आमदनी कर रही है। झंडा का ऑर्डर मिलने से महिलाएं काफी खुश हैं क्योंकि उन्हें लगातार काम मिल रहा है। उन्होंने कहा कि इस केंद्र पर जीविका दीदी को ट्रेनिंग भी दी जाती है। ‘कोरोना काल में मास्क बनाने का काम किया था’ संकुल की सदस्य बबीता कुमारी बताती है कि पहले काफी परेशानी थी। करोना काल में वह जीविका से जुड़ी सिलाई की ट्रेनिंग लेने के बाद वह इस केंद्र से 10-15 हजार रुपए महीना तक कमा रही है। कोरोना काल में मास्क बनाने का काम किया था। उसके बाद से आंगनबाड़ी केंद्र के बच्चों के लिए ड्रेस के साथ ही रसोई का कपड़ा,नाइटी आदि भी बना कर इस केंद्र से जुड़ी महिलाएं घर चला रही है। उन्होंने कहा कि इस बार तिरंगा झंडा बनाने का ऑर्डर मिला है। केंद्र पर जितनी महिला मशीन पर सिलाई कर रही है उससे अधिक अपने-अपने घरों पर सिलाई मशीन रखकर महिलाएं झंडा निर्माण में जुटी है। वह चौबीस घंटे में ऑडर बना कर यहां जमा करती है। उजियारपुर प्रखंड जीविका के बीपीएम डॉ धनंजय कुमार ने बताया कि इस प्रखंड को पहले चरण में 4 हजार झंडा बनाने को कहा गया था। 4 हजार झंडे का निर्माण करा कर जिला को भेज दिया गया है। दूसरे चरण में 10 हजार झंडा और बनाने का काम मिला है। जिस पर जीविका दीदी लगी हुई है। जीविका के डीपीएम ने क्या कहा? जीविका के डीपीएम विक्रांत शंकर सिंह ने कहा कि हर घर तिरंगा अभियान को देखते हुए तिरंगा की मांग सरकारी व गैरसरकारी संस्थानों के द्वारा की जा रही है। डिमांड को देखते हुए इस कार्य में जीविका दीदी को लगाया गया। पहले चरण में सभी प्रखंडों को 4-4 हजार का आर्डर दिया गया था। कुछ प्रखंडों ने ऑडर की पूर्ति कर दी है। उन्हें नया आर्डर भी दिया गया है। इस कार्य में पूरे जिले में 1600 के करीब जीविका दीदी लगातार सेंटर के साथ ही घरों में काम कर रही है।



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