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जमुई में कभी गांव या मोहल्ले में सांप निकलने की खबर मिलते ही लोगों में अफरा-तफरी मच जाती थी। डर और अज्ञानता के कारण अधिकांश लोग सांप को देखते ही मार देते थे। लेकिन अब डिजिटल युग ने यह तस्वीर काफी हद तक बदल दी है। मोबाइल फोन, व्हाट्सएप और सोशल मीडिया के जरिए सूचना मिलते ही स्नेक कैचर कुछ ही समय में मौके पर पहुंच जाते हैं। वे न सिर्फ सांप का सुरक्षित रेस्क्यू करते हैं, बल्कि लोगों को भी जागरूक करते हैं कि हर सांप खतरनाक नहीं होता और उन्हें मारने के बजाय सुरक्षित स्थान पर छोड़ना चाहिए। जमुई जिले के मलयपुर निवासी बंटी सिंह इस बदलाव की एक मिसाल बन चुके हैं। पिछले कुछ वर्षों में उन्होंने 1000 से अधिक जहरीले और कम जहरीले सांपों का सफल रेस्क्यू किया है। जिले के किसी भी हिस्से से जैसे ही उन्हें फोन कॉल, व्हाट्सएप मैसेज या सोशल मीडिया के जरिए सूचना मिलती है, वह अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंच जाते हैं। पूरी सावधानी और वैज्ञानिक तरीके से सांप को पकड़कर लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं। रेस्क्यू के बाद जंगल में छोड़ते हैं सांप बंटी सिंह बताते हैं कि उनका उद्देश्य केवल लोगों को सांप से बचाना नहीं, बल्कि सांपों के जीवन की रक्षा करना भी है। रेस्क्यू के बाद वह अपने एक सहयोगी के साथ सांपों को जमुई-लक्ष्मीपुर मार्ग स्थित गंगटा जंगल में छोड़ते हैं, ताकि वे अपने प्राकृतिक आवास में सुरक्षित रह सकें। उनका कहना है कि अधिकांश मामलों में लोग डर के कारण सांप को मार देते हैं, जबकि ऐसा करना न तो जरूरी है और न ही पर्यावरण के लिए सही। यदि प्रशिक्षित स्नेक कैचर को सूचना दी जाए तो बिना किसी नुकसान के सांप का सुरक्षित रेस्क्यू किया जा सकता है। सोशल मीडिया बना जागरूकता का बड़ा माध्यम डिजिटल प्लेटफॉर्म ने स्नेक कैचरों के काम को नई पहचान दी है। पहले उनका दायरा सीमित इलाकों तक ही रहता था, लेकिन अब सोशल मीडिया ने उन्हें हजारों लोगों तक पहुंचा दिया है। बंटी सिंह अपने फेसबुक और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सांपों की पहचान, जहरीले और गैर-ज़हरीले सांपों में अंतर, सांप के काटने पर प्राथमिक उपचार और बचाव के सही तरीकों से जुड़े वीडियो और जानकारी साझा करते हैं। इन प्रयासों का असर यह हुआ है कि जिले में लोगों के बीच जागरूकता बढ़ी है। अब कई लोग सांप दिखने पर उसे मारने के बजाय तुरंत स्नेक कैचर को सूचना देते हैं। इससे एक ओर लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित हो रही है तो दूसरी ओर वन्यजीव संरक्षण को भी बढ़ावा मिल रहा है। पर्यावरण संतुलन में निभाते हैं अहम भूमिका महिला कॉलेज जमुई के पर्यावरणविद प्रोफेसर अजय कुमार बताते हैं कि सांप पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। वे खेतों में चूहों और अन्य हानिकारक जीवों की संख्या नियंत्रित करते हैं, जिससे किसानों की फसल सुरक्षित रहती है। यदि सांपों की संख्या लगातार कम होती गई तो इसका सीधा असर प्राकृतिक संतुलन और कृषि व्यवस्था पर पड़ सकता है। उनके अनुसार, सांपों का संरक्षण उतना ही आवश्यक है जितनी मानव सुरक्षा। इसलिए लोगों को जागरूक होना चाहिए और बिना वजह सांपों को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए। बिना प्रशिक्षण के रेस्क्यू करना हो सकता है जानलेवा विशेषज्ञों का कहना है कि स्नेक कैचर का कार्य बेहद जोखिम भरा होता है। कई जहरीले सांप बेहद आक्रामक होते हैं और छोटी-सी चूक भी जानलेवा साबित हो सकती है। ऐसे में किसी भी आम व्यक्ति को स्वयं सांप पकड़ने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम सुरक्षा उपकरणों और उचित तकनीक का इस्तेमाल कर इस काम को अंजाम देती है। यदि कहीं सांप दिखाई दे तो लोगों को सुरक्षित दूरी बनाकर तुरंत प्रशिक्षित स्नेक कैचर या संबंधित विभाग को सूचना देनी चाहिए। डिजिटल दौर में बंटी सिंह जैसे स्नेक कैचर यह साबित कर रहे हैं कि तकनीक का उपयोग केवल सुविधा के लिए ही नहीं, बल्कि वन्यजीव संरक्षण और मानव सुरक्षा के लिए भी प्रभावी ढंग से किया जा सकता है। मोबाइल की एक कॉल पर पहुंचकर वे जहां लोगों की जान बचा रहे हैं, वहीं सांपों को भी नया जीवन दे रहे हैं। उनके प्रयास पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता को बचाने की दिशा में एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर उभर रहे हैं।
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मोबाइल की एक कॉल पर पहुंच जाते हैं स्नेक कैचर:जमुई के बंटी सिंह ने बचाई 1000 से ज्यादा सांपों की जान, लोगों में भी बढ़ाई जागरूकता
