11 अगस्त को पंजाब के पटियाला में बैंक मैनेजर अंकित सभरवाल, पत्नी शेफाली और एक प्रॉपर्टी डीलर के साथ किराए का घर देखने पहुंचे। गेट खुलते ही अंदर से निकला पालतू पिटबुल कुत्ता सीधे शेफाली पर झपटा। उनके शरीर के कई हिस्सों को चबा लिया। अंकित बचाने आए, तो
.
आखिर कुत्ते ने शेफाली को ही अपना शिकार क्यों चुना, हमले के समय कैसे काम करती है खतरनाक कुत्तों की साइकोलॉजी, आज के एक्सप्लेनर में इस वायरल वीडियो का पूरा एनालिसिस.…

इसकी 3 बड़ी वजहें हैं…
1. गेट के सबसे करीब या सबसे आगे होना
- सामने खड़े अनजान लोगों में कुत्ता किस पर अटैक करेगा, ये कई फैक्टर्स से तय होता है। सबसे पहला है- टारगेट की पोजिशन।
- अमेरिकन कॉलेज ऑफ वेटरनरी बिहेवियरिस्ट्स’, ACVB की डॉ. जूलिया अलब्राइट और बिहेवियरल मेडिसिन स्पेशलिस्ट के. प्लाउम की एनालिसिस के मुताबिक, जो व्यक्ति गेट या दरवाजे के सबसे नजदीक या सबसे आगे होता है, कुत्ता सबसे पहले उसी को अपनी टेरिटरी में इंट्रूडर, यानी घुसपैठिया मानता है।
- पटियाला के वायरल वीडियो में जैसे ही प्रॉपर्टी डीलर ने गेट खोला, कुत्ते को सबसे पहले सामने शेफाली दिखीं। इसलिए पहला अटैक उन पर ही हुआ।
2. डरने वाला मूवमेंट और बॉडी लैंग्वेज
- कुत्ते इंसानी भावनाओं को बहुत जल्दी महसूस कर लेते हैं। अक्सर हमारे शरीर के हावभाव से हमारे डर को भांप लेते हैं। अगर आपका मूवमेंट हिचकिचाता हुआ या घबराता हुआ सा है। आप उससे आई-कॉन्टैक्ट से बच रहे हैं, तो वो आपको खुद के लिए खतरा मान सकता है।
- अमेरिका के ‘द इंस्टीट्यूट फॉर एनवायरमेंटल रिसर्च एंड एजुकेशन’ (IERE) छपे आर्टिकल ‘कुत्ते मुझे ही काटना क्यों पसंद करते हैं’ के मुताबिक, स्लो, कॉन्फिडेंट मूवमेंट को कुत्ते अलग तरह से पढ़ते हैं, जबकि फास्ट या अचानक मूवमेंट को वो डर या घबराहट का संकेत मानते हैं और ज्यादा तेजी से रिएक्ट करते हैं।
- वीडियो में शेफाली कुत्ते को देखते ही अलर्ट होती हुई और घबराती दिख रही हैं। उन्होंने कुत्ते के गेट से पूरी तरह बाहर आने के पहले ही अपने कदम पीछे खींचने शुरू कर दिए थे। हालांकि कुत्ते कई बार सीधे आई-कॉन्टैक्ट को भी अपने लिए चुनौती या खतरे की तरह लेते हैं।
3. तेज और पतली आवाज पर कुत्ते रिएक्ट करते हैं
- कुत्ता आपके सामने आए और आप ऊंची पिच यानी पतली और तेज आवाज में चिल्लाएं या फिर आपकी आवाज घबराई हुई हो, तो कुत्तों को वल्नरेबिलिटी, यानी कमजोरी का सिग्नल मिलता है।
- कुत्ते को लगता है कि सबकुछ ठीक नहीं है और स्थिति उसके नियंत्रण में नहीं है। इसलिए वह खुद डिफेंसिव रिस्पॉन्स में आ जाता है और हमला करने लगता है।इसके अलावा तेज सुगंध, लोशन, यहां तक कि दूसरे जानवरों या इंसानों की गंध भी कुछ कुत्तों में रिएक्शन पैदा कर सकती है। इससे वह आक्रामक व्यवहार कर सकता है।
- डॉग ट्रेनर चेतना मलिक एक और वजह बताती हैं। वे कहती हैं, ‘अक्सर कुत्तों को घर में महिलाओं की रोक-टोक और डांट सबसे ज्यादा झेलनी पड़ती है।
- ऐसा तब ज्यादा होता है, जब घर में कोई गेस्ट आए। कुत्तों को लगता है कि अब मालिक का व्यवहार बदल जाएगा। ये किस पर ज्यादा अटैक कर रहे हैं, वो स्पष्ट करता है कि किसने इन्हें ज्यादा त्रस्त किया है। पटियाला वाले केस में हो सकता है यही हुआ हो।’

यहां दो टर्म में फर्क समझिए- ‘टेरिटोरियल बाइट’ और ‘रीडायरेक्टेड अग्रेशन’
कुत्ते ने शेफाली पर हमला किया, तो ये ‘टेरिटोरियल बाइट’ थी, यानी उसने अपनी टेरिटरी में आने वाले खतरे पर हमला किया।
जब अंकित ने शेफाली को बचाने की कोशिश की, तो कुत्ते ने उन पर भी हमला कर दिया। इसे वेटरनरी साइंस में ‘रीडायरेक्टेड अग्रेशन’ यानी ‘पुनर्निर्देशित आक्रामकता’ कहा जाता है।
अमेरिकी एनिमल वेलफेयर संस्था ASPCA, यानी ‘अमेरिकन सोसाइटी फॉर प्रिवेंशन ऑफ क्रुएल्टी टू एनिमल्स’ के मुताबिक, ‘रीडायरेक्टेड अग्रेशन तब होता है, जब कुत्ता किसी एक टारगेट पर पहले से एग्रेसिव हो और उसी वक्त कोई दूसरा व्यक्ति बीच में दखल दे।
इसीलिए कुत्तों के बीच चल रहे झगड़े में बीच-बचाव करने वाले भी कुत्तों का शिकार बन जाते हैं। मिसाल के लिए – इसी महीने ग्रेटर नोएडा में एक पालतू पिटबुल एक अन्य पालतू कुत्ते को काट रहा था। एक महिला ने कुत्ते को छुड़ाने की कोशिश की। तभी पिटबुल ने उन्हें काट लिया।
एक और टर्म है ‘प्रोटेक्टिव बाइट’, यानी अगर कोई कुत्ता अपने मालिक या किसी एक व्यक्ति के साथ खेल रहा है या खेल-खेल में एग्रेसिव हो गया है और कोई दूसरा व्यक्ति बीच में दखल दे, तो वह अपने मालिक को बचाने के लिए उस पर हमला कर सकता है।

अंकित कुत्ते का असली टारगेट नहीं थे। ‘CBT डॉग बिहेवियर’ के क्लिनिकल एनिमल बिहेवियरिस्ट जिम गिलीज के मुताबिक, रीडायरेक्टेड अग्रेशन में कुत्ता सोच-समझकर नया टारगेट नहीं चुनता, बल्कि ये उसके पहले से मौजूद हाई एग्रेशन के फेज के बीच अचानक आने वाला एक तेज रिफ्लेक्स एक्शन होता है। उत्तेजना की इस स्थिति में भी मूल टारगेट अगर मौजूद है, तो कुत्ता वापस उस पर ही शिफ्ट हो जाता है।
पिटबुल शेफाली की बांह को क्यों जकड़े रहा?
- एक्सपर्ट्स के मुताबिक, आक्रामक कुत्तों में ‘बाइट-होल्ड बिहेवियर’ और शुरुआती टारगेट पर ‘लॉक ऑन’ करने, यानी अपने शिकार को आखिर तक न छोड़ने की प्रवृत्ति होती है।
- दरअसल, पिटबुल जैसी नस्लों को शिकार के लिए तैयार किया गया था। इनमें ‘प्रे ड्राइव’, यानी ‘शिकार करने की सहज आदत होती है। ये जिद्दी होते हैं और लगातार मुश्किल हालात में भी हमला जारी रखते हैं। एक बार शिकार को पकड़ने के बाद ये आसानी से नहीं छोड़ते।
- इसी प्रे ड्राइव के चलते पिटबुल शेफाली की बाजू को पकड़कर उसे झकझोरता रहा। जबकि ‘फियर बाइट’, यानी जब डर की वजह से कुत्ता हमला करता है, तो झट से काटकर पीछे हट जाता है।
हालांकि पिटबुल को लेकर एक गलत धारणा है कि ये शिकार के शरीर पर जबड़े लॉक कर लेता है। यूनिवर्सिटी ऑफ जॉर्जिया के डॉ. आई. लेहर ब्रिस्बिन के मुताबिक, पिटबुल के जबड़े में शिकार लॉक करने का कोई खास मैकेनिज्म नहीं है। पिटबुल जैसी नस्लों में जबड़े में चबाने वाली मजबूत मांसपेशियां होती हैं, इसलिए ये गंभीर रूप से घायल कर सकते हैं।

इसके पीछे कुत्ते की साइकोलॉजी और शरीर की साइंस है, इसे दो स्टेप में समझिए…
स्टेप-1: हमले के दौरान सुन्न हो जाता है कुत्ते का शरीर
- वेटरनरी डॉक्टर रॉन कार्स्टन के मुताबिक, जब कुत्ता स्ट्रेस या खतरे की स्थिति में होता है, तो उसका सिम्पैथेटिक नर्वस सिस्टम एक्टिव हो जाता है।
- इससे कुत्ते की हार्ट रेट, मसल्स और दिमाग तक ब्लड फ्लो और शरीर की एनर्जी बढ़ जाती है। उसकी दर्द महसूस करने की क्षमता कुछ देर के लिए बेहद कम हो जाती है।
- शरीर एक तरह से दर्द के लिए सुन्न हो जाता है। इसीलिए फाइट मोड में चोट या मार के बावजूद वो हमला जारी रखता है।
स्टेप-2: एक लिमिट के बाद दर्द महसूस होता है
- जब लगातार डंडों की चोट, तेज आवाज और आसपास जुट रही भीड़ जैसे कई फैक्टर्स एक साथ हावी होने लगते हैं, तो कुत्ते के दिमाग को यह संकेत मिलता है कि अब खतरा उसके नियंत्रण से बाहर हो चुका है।
- इसी पॉइंट पर उसका ‘फाइट’ रिस्पॉन्स ‘फ्लाइट’ मोड में बदल जाता है और कुत्ता पीछे हटकर भाग खड़ा होता है।
- फाइटिंग ब्रीड्स को दर्द के बावजूद हमला जारी रखने के लिए तैयार किया गया है, इसलिए इनमें फाइट मोड और फ्लाइट मोड के बीच का टाइम सामान्य कुत्तों से ज्यादा होता है।
क्या सभी कुत्तों की नॉर्मल साइकोलॉजी यही होती है?
हर ब्रीड का कुत्ता एक टेरिटोरियल एनिमल है, यानी वह जिस जगह या घर में रहता है, उसे अपना इलाका मानने लगता है। डॉ. जूलिया अलब्राइट और के. प्लाउम के मुताबिक, ‘सभी कुत्तों के आक्रामक होने की सबसे बड़ी वजहें उनका डर या तनाव है। जब कोई अनजान उनके इलाके में आता है, तो ये डर के चलते आक्रामक हो जाते हैं।’
इस आक्रामकता, यानी एग्रेसिवनेस में कुत्ता आपको घूर सकता है, अपना शरीर अकड़ सकता है या फिर हमला भी कर सकता है।
इस एग्रेशन का बेसिक साइकोलॉजिकल पैटर्न लगभग सभी कुत्तों में एक जैसा ही है। फर्क सिर्फ इतना है कि पिटबुल जैसी नस्लों में बॉडी स्ट्रेंथ और बाइट-होल्ड की टेंडेंसी ज्यादा होती है।
एक्सपर्ट्स मानते हैं कि किसी कुत्ते के बिहेवियर की सिर्फ 9% चीजें उसकी नस्ल के जीन की वजह से होती हैं। बाकी 91% व्यवहार उसकी परवरिश, ट्रेनिंग, सोशलाइजेशन और मालिक के बर्ताव से तय होता है।
डॉग ट्रेनर चेतना मलिक दावा करती हैं कि सबसे ज्यादा बुरा बर्ताव सहने की ताकत पिटबुल में होती है। अगर आंकड़ा जुटाया जाए, तो सबसे कम हमला करने वाला कुत्ता पिटबुल है। अमेरिका में इसे ‘नैनी डॉग’ कहते हैं, क्योंकि ये बच्चों को संभालने में सबसे अच्छा कुत्ता माना जाता है।
डॉग ट्रेनर अदनान खान कहते हैं, ‘नस्ल नहीं, बल्कि अनुशासन और एक्सरसाइज की कमी से डॉग बाइट के मामले होते हैं। पिटबुल जैसी हाई-एनर्जी नस्लों को अगर रोजाना पर्याप्त एक्सरसाइज न मिले, तो उनका एनर्जी और फ्रस्ट्रेशन एग्रेशन के तौर पर बाहर आ सकता है।
——–
ये खबर भी पढ़ें…
पटियाला में पिटबुल डॉग के हमले का VIDEO:मकान देखने आए दंपती पर झपटा; महिला की बाजू, जांघ, कूल्हा चबाया; पति की पीठ नोची

पटियाला में एक मकान देखने पहुंचे दंपती पर घर में पल रहे कुत्ते ने हमला कर दिया। कुत्ता पिटबुल नस्ल का था, जिसने सीधे महिला का पैर पकड़ा। जब महिला के पति ने उसे बचाने की कोशिश की तो कुत्ते ने व्यक्ति की पीठ चबा ली। पूरी खबर पढ़ें…
