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गोल्डन गर्ल नवनीत का कुरुक्षेत्र पहुंचने पर ग्रैंड वेलकम:रानी रामपाल पहुंचीं बधाई देने, कौर बोलीं-चीन के हर अटैक का पहले से बनाया प्लान




एशियन गेम्स में चीन को हराकर भारतीय महिला हॉकी टीम को गोल्ड दिलाने वाली नवनीत कौर आज अपने घर पहुंचीं। यहां ढोल-नगाड़ों के बीच नवनीत का ग्रैंड वेलकम हुआ। लोगों ने उन्हें फूल-मालाएं पहनाईं और एशियन गेम्स चैंपियन बनने पर बधाई दी। भारतीय महिला हॉकी टीम की पूर्व कप्तान रानी रामपाल भी नवनीत से मिलने पहुंचीं। नवनीत के स्वागत के दौरान पूरा माहौल हॉकी और गोल्ड की खुशी में रंगा नजर आया। बचपन से जिस मैदान पर नवनीत ने हॉकी की शुरुआत की, उसी शाहाबाद में उनके लिए लोगों का यह स्वागत खास रहा। नवनीत ने भी कहा कि जब लोग स्वागत के लिए आते हैं और इतना सम्मान मिलता है तो बहुत अच्छा लगता है। यह उनके लिए गर्व का पल है। नवनीत ने आते ही अपने पिता बूटा सिंह को अपना गोल्ड मेडल पहनाया। चीन के खिलाफ फाइनल में पहले से तैयार था प्लान नवनीत ने बताया कि चीन के खिलाफ फाइनल से पहले टीम ने उसकी पूरी स्टडी की थी। कोचों के साथ वीडियो मीटिंग हुई। चीन की खिलाड़ी किस जगह से अटैक करती हैं और किस एरिया से गोल का खतरा ज्यादा है, इसका एनालिसिस किया गया। टीम ने पहले ही तय कर लिया था कि उन एरिया को बंद रखना है। पेनल्टी कॉर्नर के दौरान भी इसी तैयारी का फायदा मिला। खोने के लिए कुछ नहीं, हमें सिर्फ गोल्ड चाहिए नवनीत ने कहा कि टीम का माइंडसेट बिल्कुल साफ था- फाइनल में खोने के लिए कुछ नहीं है, हमें सिर्फ गोल्ड चाहिए। अगर भारत पहले गोल करता है तो उसे आखिरी सेकेंड तक बचाना है। अगर मौका मिलता है तो दूसरा गोल करने की कोशिश भी करनी है। अपना डिफेंस नहीं छोड़ना है। चीन ने गोलकीपर हटाकर अटैक किया फाइनल में भारत की बढ़त के बाद चीन ने लगातार अटैक किया। एक समय चीन ने गोलकीपर को भी हटाकर एक अतिरिक्त खिलाड़ी के साथ हमला किया। यह दूसरी टीम की रणनीति होती है। वह सामने वाली टीम को डिफेंस छोड़कर अटैक करने के लिए स्पेस देने का लालच देती है। लेकिन भारतीय टीम ने जल्दबाजी नहीं की। खिलाड़ियों ने समझा कि हमारे पास गोल है और सबसे पहले उसे बचाना है। मौका मिलने पर गोल के लिए जाना है, लेकिन सिर्फ दूसरे गोल के चक्कर में डिफेंस को कमजोर नहीं करना है। इसी का फायदा पूरा हमने उठाया। सीनियर खिलाड़ी होने के नाते जिम्मेदारी थी नवनीत ने कहा कि सीनियर खिलाड़ी होने के नाते उनकी जिम्मेदारी ज्यादा थी। मैदान पर वह बाकी खिलाड़ियों को भी लगातार बताती थीं कि कब आगे जाना है और कब पीछे आकर डिफेंस करना है। कई साल का अनुभव और गेम रीडिंग फाइनल में काम आई। सबसे अच्छी बात यह रही कि टीम की दूसरी खिलाड़ी भी उनकी बात को फॉलो कर रही थीं। पेरिस नहीं जा पाई थी टीम, अब ओलंपिक टिकट पक्का नवनीत ने कहा कि पिछली बार भारतीय टीम पेरिस ओलिंपिक के लिए क्वालीफाई नहीं कर पाई थी। इस बार एशियन गेम्स से ही ओलिंपिक टिकट पक्का करना लक्ष्य था। टीम ने गोल्ड जीतने के साथ यह लक्ष्य भी हासिल कर लिया। अब नवनीत की नजर लॉस एंजिल्स ओलिंपिक पर है। उन्होंने कहा कि टीम के पास तैयारी के लिए करीब 2 साल हैं। इस दौरान नए खिलाड़ियों को मौका मिलेगा, ज्यादा मैच खेलने को मिलेंगे और टीम अपनी तैयारी और मजबूत करेगी। उनका लक्ष्य सिर्फ ओलिंपिक खेलना नहीं है। वह वहां भी भारत के लिए मेडल जीतना चाहती हैं। पुराने कोचों से मिलना भी रहा खास स्वागत के दौरान नवनीत अपने पुराने कोचों और उन लोगों से भी मिलीं, जिन्होंने बचपन में उन्हें हॉकी सिखाई। उनके शुरुआती कोच सरदार बुदेश सिंह भी वहां पहुंचे। नवनीत ने कहा कि अब उनसे कम मिलना हो पाता है, लेकिन आज सभी स्वागत के लिए पहुंचे तो उन्हें बहुत खुशी हुई। उनके लिए यह पल इसलिए भी खास था क्योंकि जिस खेल के मैदान और कोचों ने उन्हें तैयार किया, वहीं से निकलकर वह एशियन गेम्स की चैंपियन बनीं और अब ओलंपिक का टिकट लेकर शाहाबाद लौटी हैं। लड़की ने सारा गेम कंट्रोल में रखा, क्रेडिट गोज टू नवनीत- बलदेव सिंह नवनीत के कोच बलदेव सिंह ने कहा कि मैं कहूंगा कि ये जो जीत है, वो नवनीत की वजह से हुई है। क्योंकि वो फॉरवर्ड लाइन में अकेली थी, उसने डिपेंडेबल गेम खेली। उसकी वजह से ही सारा ये खासकर फाइनल मैच। वो पीछे भी आई और आगे भी। सारा गेम लड़की ने कंट्रोल कर रखा था। क्रेडिट गोज टू नवनीत। मुझे बहुत खुशी हुई है। इतने सालों के बाद हम इंडियन में जो हमारा सालों का था, आखिर वो फुलफिल हुआ। इस जीत के बाद उन्हें लगातार मैसेज भी आ रहे हैं। बढ़त बचाकर रखना मुश्किल था- रानी रामपाल भारतीय हॉकी टीम की पूर्व कप्तान रानी रामपाल ने कहा एशियन गेम्स हॉकी के लिए बेहद मुश्किल टूर्नामेंट होता है, क्योंकि गोल्ड जीतने पर ओलिंपिक के लिए सीधे क्वालिफिकेशन मिलता है। फाइनल मैच में 1-0 की बढ़त को करीब 50 मिनट तक बचाए रखना आसान नहीं था। आखिरी 3 मिनट में टीम ने शानदार स्ट्रैटेजी अपनाई और गेंद अपने कब्जे में रखी। रानी ने पेनल्टी कॉर्नर बचाने और नवनीत कौर के दो गोल लाइन सेव को मैच का टर्निंग प्वाइंट बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे मोमेंट्स ही टीम को गोल्ड मेडल तक पहुंचाते हैं।



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