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चंडीगढ़ के डडूमाजरा डंपिंग ग्राउंड और शहर के अलग-अलग हिस्सों में पड़े कचरे को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ नगर निगम को सितंबर के अंत तक का समय दिया है। हाईकोर्ट ने नगर निगम को साफ निर्देश दिए कि शहर में जहां भी कचरा पड़ा है, उसे हटाया जाए। इसके साथ ही प्रस्तावित इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल) प्लांट को लेकर भी काम पूरा होने की समयसीमा बताने को कहा है। मामले की सुनवाई गुरुवार को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की खंडपीठ ने की। 28 सितंबर को होगी अगली सुनवाई कोर्ट ने कहा कि जनहित याचिका अभी खत्म नहीं की जा रही है। जस्टिस रोहित कपूर ने कहा कि मामला गंभीर है और नगर निगम के वकील को संबंधित अधिकारियों के साथ मिलकर इसका समाधान निकालने के लिए काम करना चाहिए। इस मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर 2026 को होगी। तब तक नगर निगम को कचरा हटाने और कचरे के स्थायी निपटारे की व्यवस्था को लेकर अपनी स्थिति अदालत के सामने रखनी होगी। डडूमाजरा में कचरा कम शहर में जगह-जगह पड़ा कोर्ट ने माना कि डडूमाजरा डंपिंग ग्राउंड में पहले के मुकाबले दिखाई देने वाला कचरा कम हुआ है। हालांकि, शहर के अलग-अलग हिस्सों में अभी भी कचरा पड़ा होने की बात सामने आई। नगर निगम की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव मोहंता ने कोर्ट को बताया कि डंपिंग ग्राउंड से काफी मात्रा में कचरा हटाया जा चुका है। वहां पेड़ भी लगाए गए हैं। निगम ने 45 एकड़ में फैले डंपिंग ग्राउंड के करीब 33 प्रतिशत हिस्से में पौधारोपण करने की योजना बनाई है। प्रस्तावित आईओसीएल प्लांट पर भी काम आगे बढ़ रहा है, जबकि कुछ अन्य प्लांट पहले से चल रहे हैं। कचरा कम होना स्थायी समाधान नहीं मामले में खुद पैरवी कर रहे अधिवक्ता अमित शर्मा ने भी माना कि डडूमाजरा में कचरे की मात्रा कम हुई है और वहां पेड़ लगाए गए हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि इससे यह साबित नहीं होता कि चंडीगढ़ में कचरे के निपटारे की स्थायी व्यवस्था बन गई है। अमित शर्मा ने आईओसीएल प्लांट की व्यवहारिकता को लेकर सामने आई रिपोर्टों का भी हवाला दिया। उन्होंने कोर्ट को बताया कि पहले भी नगर निगम ने एक कचरा प्रसंस्करण प्लांट लगाने की बात कही थी। इसी आधार पर जनहित याचिका खत्म करने की मांग की गई थी। लेकिन करीब एक साल तक लगातार पूछताछ के बाद निगम ने बताया कि वह परियोजना ही बंद कर दी गई है। इसके बाद कोर्ट ने निगम पर जुर्माना भी लगाया था। दूसरी जगह ले जाना समाधान नहीं अमित शर्मा ने कहा कि चंडीगढ़ के कई हिस्सों में अभी भी कचरा खुले में पड़ा है। उन्होंने बताया कि ऐसी जगहों की तस्वीरें संबंधित अधिकारियों को पहले ही भेजी जा चुकी हैं। उन्होंने पंजाब में कचरे से भरे ट्रकों के पकड़े जाने और इस मामले में एफआईआर दर्ज होने का भी जिक्र किया। इसके बाद चंडीगढ़ में भी एक अन्य कचरे से भरा ट्रक पकड़े जाने की बात कोर्ट के सामने रखी। उन्होंने कहा कि इससे चिंता पैदा होती है कि कचरे का सही तरीके से प्रसंस्करण और निपटारा करने के बजाय उसे एक जगह से दूसरी जगह भेजा जा रहा है। यानी समस्या का समाधान करने के बजाय कचरे को दूसरी जगह ले जाकर समस्या को आगे बढ़ाया जा रहा है। कोर्ट कमिश्नर की तस्वीरें भी दिखाई गईं अमित शर्मा ने कोर्ट द्वारा नियुक्त कमिश्नर की रिपोर्ट के साथ लगी डडूमाजरा की तस्वीरें भी खंडपीठ के सामने रखीं। कमिश्नर ने हाईकोर्ट के पहले के आदेश के बाद डंपिंग ग्राउंड का मौके पर निरीक्षण किया था। तस्वीरों में रिहायशी इलाके के आसपास भी कचरा पड़ा दिखाई दे रहा था। अमित शर्मा ने कहा कि बाद में इन्हीं जगहों से कचरा हटाया गया और वहां पेड़ लगाए गए। उनके मुताबिक, कमिश्नर की तस्वीरें उस समय की स्थिति का स्वतंत्र रिकॉर्ड हैं, जब मौके पर निरीक्षण किया गया था। हाईकोर्ट ने निगम को शहर में पड़े कचरे को हटाने का निर्देश दिया। शुरुआत में निगम ने इसके लिए करीब एक महीने का समय मांगा था। बाद में निगम ने सितंबर के अंत तक का समय मांगा। निगम की ओर से इसके पीछे बरसात के मौसम को कारण बताया गया। निगम ने कहा कि मानसून में कचरा हटाने और उसका प्रसंस्करण करने में दिक्कतें आ रही हैं। हाईकोर्ट ने निगम को सितंबर के अंत तक का समय दे दिया। मई में कोर्ट ने कमिश्नर नियुक्त किया डडूमाजरा कचरे के मामले में हाईकोर्ट पहले भी नगर निगम के दावों पर सवाल उठा चुका है। मई में डंपिंग ग्राउंड से कितना कचरा हटाया गया, इसको लेकर अलग-अलग दावे सामने आए थे। इसके बाद कोर्ट ने एक कमिश्नर नियुक्त कर डडूमाजरा का मौके पर निरीक्षण करवाया था। कमिश्नर को अलग-अलग कोणों से तस्वीरें लेकर निगम के दावों की वास्तविकता जांचने को कहा गया था। अब मामला केवल डडूमाजरा में कितना कचरा बचा है, इस तक सीमित नहीं रहा है। कोर्ट अब यह भी देख रहा है कि चंडीगढ़ में कचरे के प्रसंस्करण और निपटारे की स्थायी और प्रभावी व्यवस्था है या नहीं।
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चंडीगढ़ में सितंबर तक साफ करना होगा कचरा:हाईकोर्ट ने नगर निगम को दिया समय; IOCL प्लांट की समयसीमा भी बतानी होगी
