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हिमाचल मुख्यमंत्री की पत्नी व पूर्व मंत्री में जुबानी जंग:कमलेश बोलीं- काम नहीं संभलता तो बताएं; बिक्रम का पलटवार- मेरे पास रखें ट्यूशन




हिमाचल प्रदेश की सियासत में इन दिनों दो ‘ठाकुर’ नेताओं के बीच छिड़ा वाकयुद्ध चर्चा का केंद्र बना हुआ है। देहरा से नवनिर्वाचित कांग्रेस विधायक और मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की धर्मपत्नी कमलेश ठाकुर और भाजपा के कद्दावर नेता व पूर्व कैबिनेट मंत्री बिक्रम सिंह ठाकुर के बीच जुबानी जंग बेहद तेज हो गई है। जसवां-परागपुर के विकास कार्यों को लेकर शुरू हुई यह बहस अब राजनीतिक अनुभव, व्यक्तिगत कद और ‘ट्यूशन’ लेने-देने की नसीहतों तक पहुंच गई है। दोनों ओर से हो रहे तीखे प्रहारों ने कांगड़ा घाटी के राजनीतिक तापमान को बढ़ा दिया है। कमलेश ठाकुर की चुनौती: ‘काम नहीं संभलता तो मुझे बताएं’ विवाद की शुरुआत कांग्रेस विधायक कमलेश ठाकुर के उस बयान से हुई, जिसमें उन्होंने भाजपा विधायक बिक्रम सिंह ठाकुर की कार्यप्रणाली पर सीधे सवाल खड़े किए। कमलेश ठाकुर ने तंज कसते हुए कहा कि यदि बिक्रम ठाकुर से उनके विधानसभा क्षेत्र जसवां-परागपुर का काम नहीं संभल रहा है, तो वे उन्हें बताएं; वह खुद वहां की जनता के काम करवा देंगी। अतीत का हिसाब मांगा, खुद को बताया फोकस उन्होंने याद दिलाया कि पिछली भाजपा सरकार में बिक्रम ठाकुर कैबिनेट मंत्री थे और देहरा उनका हेडक्वार्टर था। कमलेश ने चुनौती दी कि वे उस दौर का देहरा में करवाया गया कोई एक बड़ा काम गिनवा दें। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह सिर्फ अपनी विधानसभा देहरा के विकास पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं और उनके पास “इधर-उधर झांकने का फालतू टाइम नहीं है।” बिक्रम ठाकुर का करारा पलटवार: ‘अभी राजनीति में नई हैं, कद के हिसाब से बात करें’ कमलेश ठाकुर के इस हमले पर जसवां-परागपुर के विधायक और पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह ठाकुर ने बेहद आक्रामक अंदाज में पलटवार किया। उन्होंने कमलेश ठाकुर को अपनी राजनीतिक सीमाओं में रहने की सलाह दी। बिक्रम सिंह ठाकुर ने कहा कि कमलेश ठाकुर अभी-अभी राजनीति में नई आई हैं, जबकि मुझे राजनीति का 28 साल का लंबा अनुभव है। वह पहले अपने राजनीतिक कद के हिसाब से बात करना सीखें। ट्यूशन हमेशा पहली कक्षा में पढ़ने वाले को रखनी चाहिए, न कि अनुभवी व्यक्ति को। इसलिए बेहतर होगा कि वह ‘ट्यूशन मेरे पास ही रखें’।” ‘जनता के काम का हिसाब करने को तैयार’ बिक्रम ठाकुर ने कमलेश ठाकुर के दावों को खारिज करते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा जनता के हक में काम किया है। उन्होंने दावा किया कि यदि दोनों के विकास कार्यों का हिसाब-किताब किया जाए, तो उनका काम और अनुभव कांग्रेस विधायक के मुकाबले कहीं अधिक साबित होगा। फिलहाल, इस जुबानी तकरार ने देहरा और जसवां-परागपुर दोनों ही विधानसभा क्षेत्रों के सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है और सोशल मीडिया से लेकर चौक-चौराहों तक लोग इस ‘ट्यूशन’ डिप्लोमेसी पर चटखारे ले रहे हैं।



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