कैबिनेट मीटिंग लेते हुए सीएम नायब सैनी।
हरियाणा सीएम नायब सैनी की अध्यक्षता में गुरुवार को कैबिनेट मीटिंग हुई। इसमें 12 प्रमुख प्रस्तावों पर चर्चा के बाद मुहर लगाई गई। विधानसभा के मॉनसून सत्र पर भी फैसला लिया गया। 27 अगस्त से मॉनसून सत्र शुरु होगा, जो तीन दिन तक चलेगा।
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मीटिंग के बाद सीएम सैनी ने इसकी जानकारी दी। बताया कि वाटर सिक्योर हरियाणा प्रोग्राम लागू किया गया। इसमें विश्व बैंक के सहयोग से ₹5,714.80 करोड़ की लागत आएगी। 15 सिंचाई क्लस्टरों में 48.94 लाख एकड़ भूमि कवर होगी, जिससे 45 लाख लोगों को लाभ मिलेगा। महिला स्टार्टअप्स को प्रोत्साहन योजना को भी हरी झंडी दी गई।
इसमें 1 वर्ष तक लीज रेंट पर 50% सब्सिडी (अधिकतम ₹10 लाख), 7 वर्षों तक 100% SGST छूट और ₹50 हजार से ₹1 लाख तक अनुदान दिया जाएगा। कोचिंग संस्थानों लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया गया है। नए नियम 2026 के तहत सभी प्राइवेट कोचिंग सेंटरों को सरकारी पोर्टल पर पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा।
नर्सिंग होम नीति में बदलाव के साथ डॉक्टर अब अपने स्वामित्व के अलावा लीज़ पर लिए गए रिहायशी प्लॉट पर भी नर्सिंग होम चला सकेंगे।

कैबिनेट मीटिंग में पहुंचे मंत्री। स्वास्थ्य मंत्री आरती राव मीटिंग से वर्चुअली जुड़ीं।
कैबिनेट मीटिंग पास हुए एजेंडे को आसान भाषा में समझिए…
1. वाटर सिक्योर हरियाणा प्रोग्राम
- किन्हें और कितना फायदा: राज्य के 15 इलाकों (सिंचाई क्लस्टरों) में करीब 49 लाख एकड़ खेती वाली जमीन को इसके तहत लाया जाएगा। इससे लगभग 45 लाख लोगों/किसानों को सीधा फायदा मिलेगा।
- नहरों और नालों की मरम्मत: पानी की बर्बादी रोकने के लिए 104 नहरों और खेतों तक पानी पहुँचाने वाले 620 नालों (खाड़ों/जलमार्गों) की मरम्मत व सुधार किया जाएगा।
- नए प्रोजेक्ट्स का निर्माण: पानी सहेजने के लिए 131 नई जल संरचनाएं (Water Structures) बनाई जाएंगी। कम पानी में बेहतर खेती के लिए 120 नई सूक्ष्म सिंचाई (Micro-Irrigation/ड्रिप व स्प्रिंकलर) योजनाएं शुरू होंगी।
- खराब जमीन का सुधार: जिन खेतों में पानी भर जाने से फसल खराब हो जाती है, ऐसी 2 लाख एकड़ जलभराव वाली जमीन से पानी निकालने और उसे सुधारने का काम होगा।
2. हरियाणा राज्य स्टार्टअप नीति-2022
- महिला उद्यमियों को खास मदद: अगर कोई महिला अपना स्टार्टअप शुरू करती है, तो उसे दुकान या ऑफिस के किराए (लीज़) पर 1 साल तक 50% छूट (अधिकतम ₹10 लाख) मिलेगी। 7 साल तक 100% SGST (टैक्स) वापस मिलेगा। छोटे कामों के लिए ₹50,000 से ₹1 लाख तक की सीधी आर्थिक मदद (माइक्रो ग्रांट) दी जाएगी।
- अन्य (सामान्य) स्टार्टअप्स के लिए फायदे: 7 साल तक 50% SGST (टैक्स) वापस किया जाएगा। शुरुआत में पैसों की किल्लत न हो, इसके लिए ₹25 लाख तक की सरकारी मदद (सीड-फंड) मिलेगी। सरकारी सामान खरीदने की प्रक्रिया में 10% हिस्सा नए स्टार्टअप्स के लिए आरक्षित (रिजर्व) रहेगा, जिससे उन्हें बड़े सरकारी ऑर्डर मिल सकें।
- स्कूली बच्चों के लिए: बच्चों में नए आइडिया और बिजनेस की समझ विकसित करने के लिए 10,000 विशेष DIY (डू-इट-योरसेल्फ) किट बांटी जाएंगी।
3. प्राइवेट कोचिंग संस्थानों के लिए नए नियम
- सरकारी पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन: चाहे पुराना Coaching Centre हो या नया, सभी को सरकार के ऑनलाइन पोर्टल पर अपना रजिस्ट्रेशन (पंजीकरण) कराना ज़रूरी होगा।
- छात्रों के लिए जरूरी सुविधाएं: हर कोचिंग सेंटर में बच्चों के लिए पीने का साफ पानी, सही बिजली व्यवस्था, आग से बचाव (फायर सेफ्टी) के उपकरण और मेडिकल फर्स्ट-एड (प्राथमिक चिकित्सा) का इंतज़ाम होना अनिवार्य है।
- वेबसाइट पर जानकारी देना ज़रूरी: कोचिंग संस्थानों को अपनी ऑफ़िशियल वेबसाइट पर सेंटर की सुरक्षा व्यवस्था और छात्रों से जुड़ी सभी ज़रूरी जानकारियां साफ़-साफ़ लिखनी होंगी ताकि पेरेंट्स और बच्चे उसे देख सकें।

कैबिनेट मीटिंग लेते सीएम नायब सैनी
4. नर्सिंग होम स्थापित करने की नीति में संशोधन
- लीज वाली जगह पर भी नर्सिंग होम: पहले डॉक्टर सिर्फ अपने खुद के रिहायशी (Residential) प्लॉट पर ही नर्सिंग होम खोल सकते थे। अब वे किराए या लीज (Lease) पर लिए गए रिहायशी प्लॉट पर भी नर्सिंग होम शुरू कर सकेंगे (यह अनुमति लीज की समय-सीमा तक लागू रहेगी)।
- किन डॉक्टरों को मिलेगा फायदा: यह सुविधा एलोपैथिक (Allopathic) और आयुष (AYUSH) दोनों तरह के डॉक्टरों के लिए है। शर्त बस यह है कि डॉक्टर अपनी मेडिकल काउंसिल, प्रैक्टिस में और लोकल IMA (इंडियन मेडिकल एसोसिएशन) में रजिस्टर्ड होने चाहिए।
- कन्वर्जन फीस: रिहायशी जमीन पर नर्सिंग होम चलाने के लिए तय कन्वर्जन शुल्क (Conversion Fee) देना होगा। इससे कॉलोनियों और आसपास के इलाकों में ही लोगों को तुरंत और बेहतर इलाज/चिकित्सा सुविधाएं मिल सकेंगी।
5. विश्वस्तरीय एच-हब इन्क्यूबेटर की स्थापना होगी
- ‘H-Hub’ (एच-हब) इन्क्यूबेटर: स्टार्टअप्स को मदद, सलाह और सही माहौल देने के लिए राज्य में एक वर्ल्ड-क्लास केंद्र (H-Hub) बनाया जाएगा, जिसमें बड़ी कंपनियां और यूनिवर्सिटीज़ एक साथ मिलकर काम करेंगे।
- सरकारी खरीद में 10% आरक्षण: सरकारी विभाग हर साल जितनी भी खरीदारी करते हैं, उसका 10% हिस्सा हरियाणा के नए स्टार्टअप्स से खरीदना अनिवार्य होगा। इससे स्टार्टअप्स को पक्के सरकारी ऑर्डर मिलेंगे।
- निवेश पर सरकारी ग्रांट (मैचिंग फंड): जब कोई प्राइवेट निवेशक (एंजल इन्वेस्टर) या बड़ी कंपनी किसी स्टार्टअप में पैसा लगाएगी या पायलट प्रोजेक्ट करेगी, तो सरकार भी उसमें मदद के तौर पर ₹10 लाख से ₹25 लाख तक का फंड (मैचिंग ग्रांट) अपनी तरफ से देगी।
- ट्रेनी/अपरेंटिस रखने पर मदद: अगर कोई स्टार्टअप युवाओं को ट्रेनिंग (Apprenticeship) पर रखता है और उन्हें स्टाइपेंड देता है, तो सरकार उस स्टाइपेंड का 50% खर्च (अधिकतम ₹7,500 प्रति महीना) खुद उठाएगी। एक स्टार्टअप को एक साल में अधिकतम 50 ट्रेनी के लिए यह छूट मिलेगी।
- चंडीगढ़ वाले स्टार्टअप्स को भी लाभ: जिन स्टार्टअप्स का मुख्य कार्यालय चंडीगढ़ में रजिस्टर्ड है, उन्हें भी ‘कैटेगरी-2 स्टार्टअप’ मानकर हरियाणा सरकार की इन सभी योजनाओं का पूरा फायदा दिया जाएगा।
