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सुखबीर पर हमले के बाद राजोआना की 'पंथ' से अपील:सुखबीर बादल पर हजूर साहिब में हमले की बलवंत सिंह ने कड़ी निंदा, बोले— 'एजेंसियों के मोहरों से सतर्क रहे सिख कौम'




पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह हत्याकांड में पटियाला की केंद्रीय जेल में सजा काट रहे बलवंत सिंह राजोआना ने महाराष्ट्र के नांदेड़ स्थित तख्त श्री हजूर साहिब की पवित्र धरती पर शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल पर हुए हमले की कड़े शब्दों में निंदा की है। जेल से ‘खालसा पंथ’ के नाम लिखे 3 पन्नों के एक खुले खत में राजोआना ने सिख कौम को उन “विभाजनकारी ताकतों और एजेंसियों” से सतर्क रहने की चेतावनी दी है जो पंथ के भीतर दरार पैदा करने की कोशिश कर रही हैं। राजोआना ने अपने खत में स्पष्ट तौर पर कहा कि सिख विरोधी ताकतें आज ‘पंथ-परस्त’ (पंथ समर्थकों) को ‘पंथ-विरोधी’ बनाकर पेश कर रही हैं, जबकि कौम के विरोधियों को मसीहा बनाकर दिखाया जा रहा है। बता दें, पंजाब पुलिस के पूर्व कांस्टेबल बलवंत सिंह राजोआना 31 अगस्त 1995 को तत्कालीन सीएम बेअंत सिंह की हत्या के मामले में दोषी ठहराए गए थे और 2007 से फांसी की सजा के तहत पटियाला सेंट्रल जेल में बंद हैं। ‘गुरु घर में आए विरोधी पर भी हमला करना सिख सिद्धांतों के खिलाफ’ सुखबीर सिंह बादल और उनके परिवार पर हजूर साहिब में माथा टेकने के दौरान हुए हमले पर कड़ा रोष जताते हुए राजोआना ने इसे पंथिक परंपराओं के पूरी तरह विपरीत बताया। सिख मर्यादा का हवाला: राजोआना ने कहा कि गुरु घर में किसी श्रद्धालु पर हमला करना सिख सिद्धांतों के सख्त खिलाफ है। गुरु का कोई भी सच्चा सिख, श्रद्धा और भक्ति के साथ गुरुद्वारे आए व्यक्ति पर कभी हमला नहीं करेगा, चाहे वह उसका कितना ही बड़ा विरोधी क्यों न हो। निष्पक्ष जांच की मांग: उन्होंने कहा कि सुखबीर बादल अपने परिवार और बच्चों के साथ पवित्र स्थान पर आशीर्वाद लेने गए थे, इसलिए इस हमले की गहराई और निष्पक्षता से जांच होनी चाहिए। अमृतपाल सिंह और दीप सिद्धू पर बिना नाम लिए तीखे प्रहार अपने पत्र में राजोआना ने जेल में बंद ‘वारिस पंजाब दे’ के प्रमुख व खडूर साहिब से सांसद अमृतपाल सिंह और दिवंगत दीप सिद्धू का नाम लिए बिना उन पर गंभीर सवाल उठाए। भिंडरांवाले से तुलना पर सवाल: उन्होंने आरोप लगाया कि संदिग्ध आचरण और पृष्ठभूमि वाले लोगों को जबरन संत जरनैल सिंह भिंडरांवाले की छवि में ढालकर पेश किया जा रहा है। शहादत के दर्जे पर टिप्पणी: उन्होंने कहा कि एक महिला के साथ यात्रा करते समय सड़क हादसे में अपनी जान गंवाने वाले व्यक्ति (दीप सिद्धू) को शहीद के रूप में महिमामंडित किया जा रहा है। युवाओं को चेतावनी: राजोआना ने आगाह किया कि इस तरह का झूठा प्रचार सिख युवाओं को गुमराह कर रहा है और उन्हें सही रास्ते से भटका रहा है। (हालांकि इस संबंध में ‘वारिस पंजाब दे’ से प्रतिक्रिया लेने का प्रयास किया गया, लेकिन उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं आया)। अकाली दल को लीडरलेस करने के लिए इतिहास में भी हुए हमले सिख राजनीतिक इतिहास का जिक्र करते हुए राजोआना ने कहा कि शिरोमणि अकाली दल हमेशा से सिख विरोधी ताकतों की आंखों की किरकिरी बना रहा है। इतिहास की घटनाओं को याद दिलाते हुए राजोआना ने दावा किया कि संत हरचंद सिंह लोंगोवाल की हत्या, जत्थेदार जगदेव सिंह तलवंडी और गुरचरण सिंह टोहड़ा पर जानलेवा हमले, 1991 के चुनाव में 28 अकाली प्रत्याशियों की नृशंस हत्या ये तमाम घटनाएं अकाली दल को कमजोर करने और सिख कौम को ‘लीडरलेस’ (नेतृत्वहीन) करने का प्रयास थीं। राजोआना ने दावा किया कि सुखबीर बादल पर बार-बार हो रहे हमले इसी साजिश का हिस्सा हैं। विपक्षी दलों पर भी साधा निशाना विरोधी पार्टियों को आड़े हाथों लेते हुए राजोआना ने कहा कि नांदेड़ हमले को अकाली-भाजपा सरकार के समय हुई बेअदबी की घटनाओं से जोड़कर पंथ को गुमराह किया जा रहा है। राजोआना ने सवाल उठाया कि अगर अकाली सरकार के दौरान हुई बेअदबी के लिए सुखबीर बादल जिम्मेदार ठहराए जाते हैं, तो पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह, चरणजीत सिंह चन्नी और मौजूदा मुख्यमंत्री भगवंत मान को उनके कार्यकालों में हुई बेअदबी की घटनाओं के लिए जवाबदेह क्यों नहीं ठहराया जाता? राजोआना ने अकाल तख्त साहिब से लगाई गुहार बलवंत सिंह ने पहले दरबार साहिब में श्री अकाल तख्त साहिब पर सेवा के दौरान सुखबीर बादल पर हुए हमले पर ठोस पंथक कार्रवाई न होने पर भी दुख जताया। राजोआना ने श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार से अपील की कि वे सुखबीर बादल और उनके परिवार पर हमला करने वालों के खिलाफ पंथक मर्यादा के अनुसार सख्त से सख्त कार्रवाई करें, ताकि सिख धर्मस्थलों की पवित्रता बनी रहे।



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