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डीडवाना में पंडित दीनदयाल उपाध्याय की प्रतिमा का अनावरण:राज्यपाल बोले- अंत्योदय का विचार आज भी प्रासंगिक




राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने डीडवाना में रविवार को अस्पताल चौराहे पर पंडित दीनदयाल उपाध्याय की प्रतिमा का अनावरण किया। समारोह में राज्यपाल सहित जनप्रतिनिधियों और भाजपा नेताओं ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के जीवन, विचारों और राष्ट्रसेवा को याद किया। वक्ताओं ने कहा कि उनके आदर्श और विचार वर्तमान समय में भी प्रासंगिक हैं। कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद सतीश पूनिया, मंत्री अविनाश गहलोत, किसान आयोग अध्यक्ष सी.आर. चौधरी और भाजपा उपाध्यक्ष मुकेश दाधीच सहित बड़ी संख्या में भाजपा पदाधिकारी, कार्यकर्ता और आमजन मौजूद रहे। एकात्म मानववाद और अंत्योदय पर जोर राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय का एकात्म मानववाद और अंत्योदय का विचार आज भी समाज और राष्ट्र के लिए प्रेरणादायी है। उन्होंने पंडित दीनदयाल के सादगीपूर्ण जीवन, गरीबों के प्रति संवेदनशीलता और राष्ट्र के प्रति समर्पण से जुड़े प्रसंगों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाना ही सच्चे अर्थों में अंत्योदय की भावना है। राज्यपाल ने पंडित दीनदयाल के आदर्शों को जीवन में अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि राजस्थान से पंडित दीनदयाल अंत्योदय योजना की शुरुआत होना गौरव की बात है। डीडवाना की राजनीतिक विरासत को किया याद राज्यपाल ने डीडवाना की राजनीतिक और सामाजिक विरासत का उल्लेख करते हुए स्वर्गीय पंडित बच्छराज व्यास और पूर्व उपमुख्यमंत्री स्वर्गीय हरिशंकर भाभड़ा के योगदान को नमन किया। उन्होंने कहा कि ऐसे महापुरुषों के विचार और राष्ट्र के प्रति समर्पण आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। पूनिया बोले- प्रेरणा केंद्र बनेगी प्रतिमा राज्यसभा सांसद सतीश पूनिया ने प्रतिमा स्थापित करवाने के लिए भाजपा नेता जितेंद्र सिंह जोधा के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह प्रतिमा केवल एक स्मारक नहीं, बल्कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों और राष्ट्रसेवा के संकल्प का प्रेरणा केंद्र बनेगी। पूनिया ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के राष्ट्र की एकता और अखंडता के लिए किए गए संघर्ष एवं बलिदान को भी याद किया। महापुरुषों के आदर्श जीवन में उतारने का आह्वान मंत्री अविनाश गहलोत ने कहा कि महापुरुषों के विचारों को केवल स्मरण करने तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि उनके आदर्शों को आचरण और सामाजिक जीवन में उतारना चाहिए। ओमदास जी महाराज सहित अन्य वक्ताओं ने भी एकात्म मानववाद, अंत्योदय, सामाजिक समरसता और राष्ट्र प्रथम के विचारों को वर्तमान दौर में प्रासंगिक बताया। समारोह के दौरान डीडवाना शहर राष्ट्रवाद और राष्ट्रसेवा के नारों से गूंज उठा। बड़ी संख्या में लोग कार्यक्रम के साक्षी बने।



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