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हरियाणा सरकार ने सरकारी निगमों, कंपनियों, बोर्डों, सहकारी संस्थाओं और स्वायत्त निकायों में जमा सरकारी फंड की निगरानी और वित्तीय पारदर्शिता बढ़ाने के लिए नई व्यवस्था लागू की है। वित्त विभाग ने इन संस्थाओं के बैंक खातों में जमा धनराशि का हर तिमाही सत्यापन और बैंक रिकंसिलिएशन कराने के निर्देश दिए हैं। वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव की ओर से सभी संबंधित संस्थाओं के प्रबंध निदेशक, मुख्य प्रशासक और मुख्य कार्यकारी अधिकारियों को तिमाही प्रमाण-पत्र भरकर जमा कराने के निर्देश दिए गए हैं। प्रमाण-पत्र पर संबंधित MD/CEO को हस्ताक्षर कर यह प्रमाणित करना होगा कि बैंक खातों में जमा फंड का सत्यापन संस्था की अकाउंट बुक्स से कर लिया गया है। नई व्यवस्था के तहत संस्थाओं के सभी प्रकार के बैंक खातों की समीक्षा करनी होगी। इसमें सेविंग, करंट, टर्म डिपॉजिट और फ्लेक्सी अकाउंट शामिल हैं। संस्था को यह प्रमाणित करना होगा कि सभी खातों का रिकॉर्ड पुस्तकों से मिलान कर लिया गया है और प्रमाण-पत्र जारी करने की तारीख तक कोई अंतर नहीं है। बैंक से मिलने वाला ब्याज भी जांच के दायरे में प्रमाण-पत्र में यह भी बताना होगा कि निवेश या एफडीआर के समय बैंक की ओर से तय ब्याज संबंधित खाते में सही तरीके से जमा किया गया है या नहीं। इसके अलावा बैंक रिकंसिलिएशन स्टेटमेंट (BRS) तैयार होने और उसमें दर्शाई गई शेष राशि के संस्था की अकाउंट बुक्स, बैलेंस शीट और बैंक रिकॉर्ड से मेल खाने की भी पुष्टि करनी होगी। ऑडिट रिपोर्ट भी होगी प्रमाण-पत्र का हिस्सा संस्था के MD/CEO को यह भी प्रमाणित करना होगा कि स्टेट्यूटरी ऑडिट और इंटरनल ऑडिट में सामने आई स्थिति संतोषजनक है। यदि ऑडिट में कोई वित्तीय अनियमितता या अंतर नहीं पाया गया है, तो इसकी भी घोषणा प्रमाण-पत्र में करनी होगी। हर तिमाही वित्त विभाग के नामित अधिकारी को भेजना होगा वित्त विभाग ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित प्रोफार्मा को हर तिमाही भरकर संबंधित संस्था के उस अधिकारी को भेजना होगा, जिसे वित्त विभाग ने नामित किया है। विभाग ने सभी संस्थाओं को इसकी समय पर और नियमित प्रस्तुति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
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हरियाणा में अब हर तिमाही होगी बैंक खातों की जांच:बैंकिंग घोटाले के बाद बढ़ाई गई सख्ती, बैंक खातों-बुक्स ऑफ अकाउंट का होगा मिलान
