चतरा जेल में बंद टीएसपीसी (TSPC) उग्रवादी मंटू गंझू की संदिग्ध मौत का मामला गरमा गया है। जेल प्रशासन इसे आत्महत्या बता रहा है, जबकि परिजनों ने जेल अधीक्षक और पुलिस अधिकारियों पर पीट-पीटकर हत्या करने का गंभीर आरोप लगाया है। इस घटना के विरोध में परिजनो
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मृतक मंटू गंझू के परिजनों का कहना है कि कुछ दिन पहले ही उनकी मंटू से जेल में मुलाकात हुई थी और वह पूरी तरह स्वस्थ था। परिजनों के अनुसार, रविवार को अचानक जेल से फोन आया कि मंटू की तबीयत खराब है।
जब परिजन जेल पहुंचे, तो उन्हें मंटू का शव मिला। इस अचानक हुई मौत से आक्रोशित परिजनों ने जेल प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। उन्होंने पूरे मामले की सीबीआई (CBI) और एनआईए (NIA) से जांच कराने की मांग की है।

सड़क जाम कर रहे लोगों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया।
आक्रोशित परिजनों और ग्रामीणों ने आज NH-22 स्थित पोस्ट ऑफिस चौक को जाम कर जमकर हंगामा किया। उन्होंने न्याय की मांग करते हुए उच्च स्तरीय जांच की अपील की।
सड़क जाम के दौरान प्रदर्शनकारियों ने मृतक के परिवार को 50 लाख रुपए का मुआवजा और एक सरकारी नौकरी देने की भी मांग रखी। परिजनों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, वे पीछे नहीं हटेंगे।
हालांकि, इस जाम के कारण NH-22 पर कई स्कूली बच्चे और एंबुलेंस फंस गई। स्थिति को बिगड़ते देख पुलिस ने कड़ा रुख अपनाया। सदर एसडीपीओ सनी वर्धन ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि सड़क जाम कर रहे लोगों को पुलिस ने हिरासत में लेकर जाम खुलवा दिया है।
एसडीपीओ ने यह भी स्पष्ट किया कि यह मामला कोर्ट के संज्ञान में है और जज साहब द्वारा एक कमेटी गठित कर जांच कराई जा रही है। वहीं, पुलिस ने परिजनों के आवेदन के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर ली है। अब पोस्टमॉर्टम और उच्च स्तरीय जांच के बाद ही मौत की असल वजह से पर्दा उठ सकेगा।
