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Sand mining… 9 days left for NGT ban to be lifted


रांची44 मिनट पहलेलेखक: संतोष चौधरी

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फाइल फोटो - Dainik Bhaskar

फाइल फोटो

झारखंड में बालू खनन पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की रोक हटने में नौ दिन शेष हैं। लेकिन इसके बाद भी आमलोगों को सस्ता बालू मिलने की उम्मीद कम है। क्योंकि जिन घाटों से करीब चार माह पहले बालू मिल रहा था, अब भी उन्हीं घाटों से दोबारा उठाव शुरू होगा। राज्य में कुल 444 घाटों में से 290 घाटों की नीलामी एक साल पहले ही हो चुकी है, लेकिन नीलामी के बाद भी अधिकतर घाटों पर खनन शुरू कराने की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। पर्यावरण स्वीकृति (ईसी) और कंसेंट टू ऑपरेट (सीटीओ) नहीं लिए जाने की वजह से नीलाम हो चुके घाट भी बंद हैं।

एनजीटी की रोक लगने से पहले 24 घाटों से खनन की जरूरी प्रक्रिया पूरी की गई थी, लेकिन इसमें से भी मात्र 14 घाट ही ऐसे हैं, जहां से बालू का उठाव होगा। इसका सीधा असर बाजार में बालू की उपलब्धता और कीमत पर पड़ेगा। स्थानीय बालू कारोबारियों के अनुसार अभी 80 सीएफटी का एक टर्बो बालू करीब 4500 रुपए में मिल रहा है। रोक हटने के बाद भी इतनी ही कीमत रहने की संभावना है।

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पर्यावरण स्वीकृति (ईसी) 290 घाटों की नीलामी हुई, लेकिन इसमें की ही कागजी प्रक्रिया पूरी हुई। ऐसे में 266 घाटों की पर्यावरण स्वीकृति, सीटीई-सीटीओ नहीं मिले। इस वजह से संबंधित घाटों से बालू खनन नहीं होगा। कई घाटों के सीओ की रिपोर्ट, वन विभाग की अनुमति, ग्राम सभा की अनुमति नहीं मिली हैं।

विभागीय समन्वय की कमी नीलामी पूरी होने के बाद खनन विभाग पर पर्यावरण से जुड़े कार्यालय और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के स्तर पर प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा कराने की जिम्मेदारी थी। लेकिन चार माह में भी संबंधित घाटों की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। इससे साफ है कि विभागीय स्तर पर समन्वय नहीं बन पाया।

ठेकेदार भी जिम्मेदार ठेकेदार भी इसके लिए जिम्मेदार हैं। क्योंकि, ठेकेदार की ही जिम्मेदारी थी कि वे ईसी, सीटीई, सीटीओ सहित सभी जरूरी कागजात समय पर प्राप्त करके विभाग से बालू खनन की प्रक्रिया पूरी कराकर बालू निकालें। लेकिन, ठेकेदार भी इस मामले में शांत रहे, जिससे यह स्थिति बनी।



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