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इंटरनेशनल गया सेठ अखाड़े में लड़कियों का दंगल:गुड़िया को दी नेशनल रेसलर अंजली ने पटखनी, नागपंचमी पर 150 पहलवानों ने दिखाया दम




वाराणसी के अखाड़ों में सोमवार को नागपंचमी पर कुश्ती-दंगल का आयोजन किया गया। इसी क्रम में वाराणसी के कज्जाकपुरा स्थित इंटरनेशनल अखाड़े गुरु गया सेठ में कुश्ती का आयोजन मैट पर किया गया। जिसमें लड़कियों की भी कुश्ती कराई गई। इसमें नेशनल रेसलर गुड़िया और अंजली के बीच काटे का मुकाबला हुआ। जिसमें गुड़िया ने अंत में बाजी मार ली। इस दौरान 150 पहलवान गुरु गया सेठ के अखाड़े में मैट पर उतरे। जिसमें जयादातर कुश्तियां बराबरी पर छूटी। इस दौरान पहलवानों ने मिट्टी के अखाड़ों से मैट पर कुश्ती आने को सराहा और कहा की मौजूदा सरकार भी हमारी मदद कर रही है। जिससे खेल निखर रहा है। वहीं आज से ही कुश्ती का कैलेंडर भी शुरू हो गया। देखें तीन तस्वीरें… गुरु गया सेठ के खड़े में लड़कियों ने की जोर-आजमाइश
नागपंचमी पर गुरु गया सेठ अखाड़े में कुश्ती का आयोजन किया गया। जिसमें कई नेशनल और इंटरनेशनल पहलवानों ने एक दूसरे को पठखनी दी। दिन की अंतिम कुश्ती नेशनल रेसलर गुड़िया और अंजली के बीच हुई। 9 मिनट चली इस कुश्ती में शुरू से ही अंजली ने गुड़िया को अपने दांव पेंच से बांध के रखा और अंत में जीत अंजली की हुई। इस कुश्ती की शुरुआत अखाड़े से जुड़े पुराने पहलवानों ने की । मैट पर अच्छा लगता है, PM ने बढ़ाया खेल
अंजली दो बार नेशनल प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुकी हैं और स्टेट में उनका मेडल है। वाराणसी की धूपचंडी की रहने वाली अंजली ने बताया- तीन साल पहले हमने मैट पर अभ्यास शुरू किया था। जिसके बाद दो नेशनल खेल चुके हैं। हमने मैट पर ही शुरुआत की थी। अंजली ने कहा – जिस तरह से खेलों को सरकारें और हमारे पीएम बढ़ावा दे रहे हैं। उससे खिलाड़ी खेल में आगे जा रहे हैं। आज से शुरू हुआ कुश्ती का कैलेंडर
गया सेठ अखाड़े के प्रशिक्षक और पूर्व इंडिया टीम मैनेजर रह चुके संतोष यादव ने बताया – नागपंचमी के अवसर पर बहुत सालों से यहां इष्टदेवता की पूजा होती है। और नागपंचमी से ही कुश्ती का और अखाड़ों की कैलेंडर शुरू होता है। आज अखाड़े में 150 पहलवानों ने कुश्ती लड़ी है। हम लोगों के जमाने में मैट नहीं था लेकिन अब मैट की कुश्ती है सबसे ज्यादा डिमांड में है। और पहलवान अखाड़ों और मैट की कुश्ती को मिक्स करके ही लड़ रहे हैं। प्रतियोगिताओं की वजह से हुई शिफ्टिंग
संतोष कुमार यादव ने बताया- मिट्टी का दंगल अब बहुत कम होता है। खिलाड़ी लड़ना भी नहीं चाहते हैं और न उसमें प्रेक्टिस करते हैं। बस उसमे रियाज करते हैं। ताकि उनका जो शरीर है वो मिट्टी के साथ मिलकर मजबूत हो मिट्टी में कुश्ती नहीं लड़ते क्योंकि ओलिंपिक से लेकर जिला स्तर के इवेंट अब मैट पर हो रहे हैं। इसलिए पहलवानी मैट पर शिफ्ट हुई है। भारत का भविष्य उज्जवल
संतोष यादव ने बताया – जिस तरह से प्रतियोगिताएं हो रहीं हैं। और फेडरेशन के साथ ही साथ सरकार मदद कर रही है। काशी और भारत की कुश्ती विश्व पटल पर चमकेगी और खिलाड़ी अच्छा कर भी रहे हैं।



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