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सीवान में प्रदर्शन के दौरान AK-47 से फायरिंग करने वाले पुलिस जवान के मामले में बिहार पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में अपना जवाब दाखिल किया है। पुलिस ने कहा है कि जवान प्रदर्शनकारियों की भीड़ में फंस गया था। उसने बचने के लिए AK-47 से हवा में 4 राउंड फायर कि
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पुलिस के मुताबिक, तीन प्रदर्शनकारियों को मामूली गोली लगी थी, लेकिन वे दूसरी जगह घायल हुए थे।
दरअसल, बिहार पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में 11 अगस्त को जवाब दाखिल किया है। यह जवाब उन याचिकाओं के मामले में दिया गया है, जिनमें प्रदर्शन के दौरान पुलिस पर जरूरत से ज्यादा बल इस्तेमाल करने का आरोप लगाया गया है।
पुलिस ने कहा कि 25 जुलाई को सीवान में प्रदर्शन के दौरान हालात बिगड़ गए थे। प्रदर्शनकारी गांधी मैदान से जेपी चौक की तरफ बढ़ रहे थे। दोपहर करीब 12:30 बजे पुलिस पर पथराव शुरू हो गया।
भीड़ में फंस गया था DIU में तैनात कॉन्स्टेबल
पुलिस के मुताबिक, मैरवा रोड और गोपालगंज रोड की तरफ से भी लोग पथराव में शामिल हो गए। स्थिति बिगड़ने के बाद पुलिस बल कम पड़ गया। अलग-अलग जगह ड्यूटी कर रहे पुलिसकर्मियों को भी मौके पर बुलाया गया।
इसी दौरान जेपी चौक के पास जिला खुफिया इकाई यानी DIU में तैनात एक कॉन्स्टेबल भीड़ में फंस गया। पुलिस का कहना है कि जवान चारों तरफ से प्रदर्शनकारियों के बीच घिर गया था।
इसके बाद उसने अपनी AK-47 से 4 राउंड फायर किए। पुलिस ने कोर्ट को बताया कि चारों गोलियां हवा में चलाई गई थीं। इन गोलियों से कोई प्रदर्शनकारी घायल नहीं हुआ।
AK-47 का इस्तेमाल करने पर जवान को किया निलंबित
यही वह फायरिंग है, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया था। वीडियो में पुलिस का जवान AK-47 लेकर भीड़ की तरफ फायर करता दिखाई दे रहा था। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठे थे।
बिहार पुलिस ने यह भी माना है कि जवान का इस तरह AK-47 का इस्तेमाल करना सही नहीं था। जवान को निलंबित कर दिया गया है। उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी शुरू की गई है।
3 प्रदर्शनकारियों को AK-47 से नहीं लगी थी गोली
प्रदर्शन के दौरान तीन लोगों को गोली लगने की बात बिहार पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में मानी है। हालांकि पुलिस का कहना है कि इन तीनों को लगी गोली उस AK-47 से नहीं चली थी, जिससे जवान ने जेपी चौक के पास फायर किया था।
पुलिस के मुताबिक, तीनों प्रदर्शनकारियों को मामूली गोली लगी थी। उन्हें पहले सीवान सदर अस्पताल ले जाया गया। इसके बाद बेहतर इलाज के लिए पटना के मेदांता अस्पताल भेजा गया। इलाज के बाद तीनों को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
बिहार पुलिस ने कोर्ट में कहा कि जिन तीन लोगों को गोली लगी, वे उस जगह मौजूद ही नहीं थे, जहां AK-47 से फायरिंग हुई थी।
9 एमएम पिस्टल से ASI ने 2 राउंड किया था फायर
पुलिस के मुताबिक, जेपी चौक से करीब डेढ़ से दो किलोमीटर दूर हाथी चौक पर भीड़ को हटाने के लिए एक ASI ने अपनी 9 एमएम पिस्टल से 2 राउंड फायर किए थे। पुलिस का दावा है कि तीनों प्रदर्शनकारियों को लगी चोटों का संबंध इसी फायरिंग से हो सकता है। हालांकि अभी इसकी अंतिम पुष्टि नहीं हुई है।
इसीलिए पुलिस ने बैलिस्टिक जांच शुरू कराई है। इस जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि घायल प्रदर्शनकारियों को किस हथियार से गोली लगी, गोली कितनी दूरी से चली और किस एंगल से फायर हुई।
घटना की जांच पूरी होने के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि तीनों प्रदर्शनकारियों को लगी गोलियां किस हथियार से चली थीं।
बिहार पुलिस का कोर्ट में सीधा पक्ष है कि AK-47 से फायरिंग हुई, लेकिन उससे कोई घायल नहीं हुआ। तीन प्रदर्शनकारियों को गोली लगी, लेकिन वे उस जगह नहीं थे जहां AK-47 से फायरिंग की गई थी।
पुलिस ने 6 FIR किया दर्ज, 82 लोगों को बनाया आरोपी
बिहार पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि सीवान में प्रदर्शन के दौरान पुलिस पर भी पथराव हुआ था। इसमें सीवान के SP समेत 20 पुलिसकर्मी घायल हुए। घायलों में SP, 2 SDPO, 2 इंस्पेक्टर, 2 सब-इंस्पेक्टर और 13 कॉन्स्टेबल शामिल हैं।
पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान दो पुलिस वाहन और बड़ी संख्या में ट्रैफिक ट्रॉलियां भी क्षतिग्रस्त हुई भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन और आंसू गैस के गोले चलाए। इस मामले में पुलिस ने 6 FIR दर्ज की हैं। इनमें 82 लोगों को आरोपी बनाया गया है। पुलिस के अनुसार 17 लोगों की गिरफ्तारी हुई है।
बिहार के 9 जिले में हुई हिंसा की घटनाएं
बिहार पुलिस ने कोर्ट में यह भी कहा कि राज्य के कई हिस्सों में प्रदर्शन हिंसक हो गए थे। सीवान के अलावा पटना, जहानाबाद, छपरा, भागलपुर, सीतामढ़ी, औरंगाबाद, कटिहार और किशनगंज में भी हिंसा की घटनाएं हुईं।
सरकार का कहना है कि इन प्रदर्शनों के दौरान पुलिस और सरकारी कर्मचारियों पर हमले किए गए और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया। बिहार पुलिस ने अपने जवाब में यह भी कहा है कि कानून-व्यवस्था संभालने के दौरान पुलिस ने संयम बरता और प्रदर्शनकारियों को नुकसान पहुंचाने के लिए किसी तरह का अनुपातहीन बल इस्तेमाल नहीं किया।
‘AK-47 कानून-व्यवस्था संभालने का हथियार नहीं’
इस मामले में सबसे अहम बात यह है कि बिहार पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में खुद माना है कि AK-47 का इस्तेमाल सामान्य कानून-व्यवस्था की स्थिति में नहीं किया जाना चाहिए।
पुलिस ने कोर्ट को बताया कि AK-47 प्लाटून स्तर का हथियार है। इसका इस्तेमाल विशेष ऑपरेशन में किया जाता है। सामान्य भीड़ नियंत्रण या कानून-व्यवस्था की ड्यूटी में इसका इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।
इसी वजह से जिस कॉन्स्टेबल ने AK-47 से फायर किया था, उसे निलंबित कर दिया गया है। उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी शुरू की गई है।
पुलिस ने बताया कि 1 अगस्त को DGP की ओर से AK-47 के इस्तेमाल को लेकर विस्तृत निर्देश भी जारी किए गए हैं। पुलिस का कहना है कि इस तरह के निर्देश पहले भी जारी किए जा चुके हैं।
यानी सुप्रीम कोर्ट में सरकार का पक्ष दो हिस्सों में है। पहला- जवान ने AK-47 से फायर इसलिए किया क्योंकि वह भीड़ में फंस गया था और उसने हवा में गोली चलाई। दूसरा- पुलिस यह भी मान रही है कि AK-47 का इस्तेमाल सामान्य कानून-व्यवस्था की स्थिति में नहीं किया जाना चाहिए।
जानिए पूरा मामला क्या था
25 जुलाई को बिहार में छात्र और युवा संगठनों के प्रदर्शन के दौरान सीवान में हालात बिगड़ गए थे। प्रदर्शनकारी गांधी मैदान से जेपी चौक की तरफ मार्च कर रहे थे। पुलिस के मुताबिक, करीब 12:30 बजे प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया।
इसके बाद मैरवा रोड और गोपालगंज रोड की तरफ से भी लोग वहां पहुंच गए। पुलिस का दावा है कि भीड़ बढ़ने के साथ पथराव तेज हो गया। पुलिसकर्मियों को चोटें आईं और वाहनों को भी नुकसान पहुंचा।
स्थिति को संभालने के लिए वाटर कैनन और आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया। इसी दौरान पुलिस बल को अलग-अलग जगहों से बुलाकर मौके पर तैनात किया गया।
वीडियो वायरल होने के बाद AK-47 से फायरिंग पर विवाद
जेपी चौक के पास DIU में तैनात एक कॉन्स्टेबल भीड़ के बीच फंस गया। इसका वीडियो सामने आया। वीडियो में जवान AK-47 से फायर करता दिखाई दिया। वीडियो वायरल होने के बाद यह मामला बड़ा विवाद बन गया।
सवाल उठा कि प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने AK-47 क्यों निकाली और उससे फायरिंग क्यों की गई।
इसके बाद बिहार पुलिस ने जवान को सस्पेंड कर दिया। उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की गई।
मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा तो बिहार सरकार ने अपने जवाब में घटना का पूरा घटनाक्रम बताया। सरकार ने कहा कि जवान भीड़ में फंस गया था और उसने AK-47 से चार राउंड हवा में फायर किए थे। पुलिस का दावा है कि इससे कोई घायल नहीं हुआ।
इसी प्रदर्शन के दौरान हाथी चौक पर एक ASI ने 9 एमएम पिस्टल से दो राउंड फायर किए थे। पुलिस के मुताबिक, इसी दौरान तीन प्रदर्शनकारियों को मामूली गोली लगी।
तीनों को अस्पताल ले जाया गया। बाद में उन्हें पटना के मेदांता अस्पताल भेजा गया। इलाज के बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई।
पुलिस का कहना है कि तीनों की चोट AK-47 से नहीं लगी थी। इसका कारण यह बताया गया कि वे उस जगह मौजूद नहीं थे जहां AK-47 से फायरिंग हुई थी।
अब इस दावे की जांच बैलिस्टिक जांच से होगी। पुलिस यह पता कर रही है कि गोली किस हथियार से चली, फायरिंग कितनी दूरी से हुई और गोली किस दिशा से आई।
इस बीच बिहार पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में यह भी बताया कि सीवान में हिंसा के दौरान 20 पुलिसकर्मी घायल हुए थे। इनमें जिले के SP से लेकर कॉन्स्टेबल तक शामिल थे। दो पुलिस वाहन और कई ट्रैफिक ट्रॉलियां क्षतिग्रस्त हुई थीं।
पुलिस ने मामले में 6 FIR दर्ज कीं और 82 लोगों को आरोपी बनाया। इनमें से 17 लोगों की गिरफ्तारी की गई।
