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पंचकूला। शहर में लगातार बढ़ रही आवारा कुत्तों की संख्या और डॉग बाइट की घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए नगर निगम अब एक एजेंसी के बजाय मल्टी-एजेंसी मॉडल अपनाने की तैयारी में है। नई व्यवस्था में अलग-अलग एजेंसियों को क्षेत्रवार जिम्मेदारी देकर कुत्ते पकड़ने, उनकी नसबंदी और टीकाकरण का अभियान चलाया जाएगा। निगम का मानना है कि पूरे शहर में एक साथ अभियान चलाने से आवारा कुत्तों की आबादी को नियंत्रित करने में ज्यादा प्रभावी परिणाम मिल सकते हैं। सेक्टर-6 स्थित सिविल अस्पताल में रोजाना करीब 20 से 22 डॉग बाइट के मरीज पहुंच रहे हैं। अस्पताल के आंकड़ों के मुताबिक इस साल के पहले छह महीनों में ही करीब 7,600 डॉग बाइट केस सामने आ चुके हैं। वहीं, पिछले साल पंचकूला में डॉग बाइट के 14,230 मामले दर्ज किए गए थे। बढ़ते आंकड़ों को देखते हुए निगम ने कुत्तों की नसबंदी और वैक्सीनेशन अभियान का दायरा बढ़ाने का फैसला किया है। कम रेट वाली पात्र एजेंसी को मिल सकता है काम प्रस्तावित टेंडर में पात्र एजेंसियों के बीच कम दर पर काम देने का विकल्प रखा जा सकता है। शर्त यह होगी कि संबंधित एजेंसी को टेंडर की सभी शर्तें स्वीकार करनी होगी। इसके बाद एजेंसियों को अलग-अलग क्षेत्र आवंटित किए जाएंगे और उन्हें अपने क्षेत्र में कुत्ते पकड़ने, नसबंदी तथा टीकाकरण की जिम्मेदारी दी जाएगी। नगर निगम कमिश्नर विनय कुमार के अनुसार टेंडर प्रक्रिया में वही एजेंसी हिस्सा ले सकेगी, जो एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया (AWBI) से मान्यता प्राप्त और अधिकृत होगी। अब जानिए फिलहाल की स्थिति…. फीडिंग जोन बनाने पर भी विचार निगम आवारा कुत्तों के लिए शहर में अलग-अलग स्थानों पर डेडिकेटेड फीडिंग जोन बनाने पर भी विचार कर रहा है। अधिकारियों के अनुसार आवारा कुत्तों की वास्तविक संख्या का आकलन करना बड़ी चुनौती है। किसी क्षेत्र में खाना मिलना बंद होने पर कुत्ते दूसरे इलाकों में चले जाते हैं, जिससे उनकी संख्या का सही अनुमान लगाना मुश्किल हो जाता है।
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अब मल्टी-एजेंसी मॉडल से कुत्तों पर लगेगी लगाम:पंचकूला में 6 महीने में 7,600 डॉग बाइट केस, निगम बदलेगा रणनीति
