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रायपुर के डॉ. दिनेश मिश्र 8 अक्टूबर से यूरोप दौरे:जादू-टोने के नाम पर महिला हिंसा पर करेंगे चर्चा, 30 साल से चला रहे अभियान




रायपुर के नेत्र विशेषज्ञ और अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के अध्यक्ष डॉ. दिनेश मिश्र 8 अक्टूबर से यूरोप के दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वे बेल्जियम, फ्रांस, जर्मनी, नीदरलैंड, स्विट्जरलैंड और रोम जाएंगे। यहां वे अलग-अलग कार्यक्रमों में व्याख्यान देंगे और सामाजिक कार्यकर्ताओं से बातचीत करेंगे। डॉ. मिश्र लंबे समय से अंधविश्वास, जादू-टोने के आरोप में महिलाओं की प्रताड़ना और टोनही के नाम पर होने वाली हिंसा के खिलाफ जागरूकता अभियान चला रहे हैं। उनका कहना है कि अंधविश्वास और डायन के शक में महिलाओं को प्रताड़ित करना मानवाधिकारों के उल्लंघन का एक बड़ा कारण है। ऐसी घटनाएं एशिया और अफ्रीका समेत कई देशों में आज भी सामने आती हैं। 2017 में जिनेवा में दिया था व्याख्यान डॉ. दिनेश मिश्र इससे पहले 2017 में जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र की ओर से आयोजित अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला में शामिल हुए थे। इस कार्यशाला में उन्होंने डायन के शक में महिलाओं की प्रताड़ना और मानवाधिकारों के मुद्दे पर व्याख्यान दिया था। इसके अलावा उन्होंने 2014 में बेल्जियम में आयोजित एक संगोष्ठी में भी व्याख्यान दिया था। 30 साल से चला रहे जागरूकता अभियान डॉ. मिश्र पिछले करीब 30 साल से अंधविश्वास और सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ काम कर रहे हैं। वे जादू-टोने और टोनही के शक में महिलाओं के साथ होने वाली प्रताड़ना के खिलाफ लोगों को जागरूक करते रहे हैं। इस दौरान उन्होंने देशभर में 3 हजार से ज्यादा सभाएं की हैं। स्कूल, कॉलेज और सामाजिक संगठनों के साथ कार्यशालाएं कर 2 लाख से ज्यादा विद्यार्थियों को जागरूक किया है। छत्तीसगढ़ के अलावा उन्होंने मध्यप्रदेश, असम, आंध्रप्रदेश, ओडिशा, झारखंड, महाराष्ट्र, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, बिहार, उत्तरप्रदेश और कर्नाटक में भी जागरूकता अभियान चलाया है। कई सम्मान मिल चुके हैं छत्तीसगढ़ में जादू-टोने और टोनही के आरोप में महिलाओं की प्रताड़ना के खिलाफ जागरूकता फैलाने और कानून बनाने की दिशा में किए गए काम के लिए डॉ. मिश्र को 2006 में राज्य अलंकरण पंडित रविशंकर शुक्ल सम्मान दिया गया था। इसके अलावा वैज्ञानिक सोच बढ़ाने और अंधविश्वास के खिलाफ किए गए काम के लिए 2007 में भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने उन्हें नेशनल अवॉर्ड से सम्मानित किया था। प्रदेश महिला आयोग ने भी उन्हें 2006 में महिला उत्पीड़न के खिलाफ किए गए कार्यों के लिए सम्मानित किया था।



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