Headlines

देश के 54 अव्वल स्टेशनों में रांची, टाटानगर व तेतुलमारी:मधुपुर में पानी में मिला ई-कोलाई बैक्टीरिया, धनबाद-कोडरमा और जसीडीह में वाटर कूलर की कमी




देशभर के चयनित 512 रेलवे स्टेशनों में सिर्फ 54 स्टेशन ही निर्धारित न्यूनतम आवश्यक सुविधाओं के मानकों पर खरे उतरे हैं। इनमें झारखंड के तीन स्टेशन रांची, टाटानगर और तेतुलमारी स्टेशन शामिल हैं। रिपोर्ट में टाटानगर को एनएसजी-2, रांची को एनएसजी-3 और तेतुलमारी को एनएसजी-5 श्रेणी में रखा है। देश के बाकी 548 स्टेशनों पर बुनियादी सुविधाएं मानकों से कम पाई गई। कैग की रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है। रिपोर्ट में कहा गया है कि साउथ ईस्टर्न रेलवे का न्यूनतम आवश्यक सुविधाओं का स्कोर 29.1 रहा, जो सभी रेलवे जोन में सबसे कम है। यह झारखंड की चिंता बढ़ाने वाली है। सबसे गंभीर मामला मधुपुर स्टेशन पर सामने आया। यहां वाटर कूलर ​से लिए गए पानी के नमूने में ई-कोलाई बैक्टीरिया मिला। यह बैक्टीरिया देश के आठ स्टेशनों के वाटर कूलर के पानी के सैंपल में मिले। रिपोर्ट में सिर्फ पानी की गुणवत्ता ही नहीं, बल्कि सुविधाओं की उपलब्धता में भी कमी मिली। धनबाद स्टेशन पर पीने के पानी के नलों और वाटर कूलरों की कमी मिली। कोडरमा में ड्रिंकिंग वाटर टैप्स, वाटर कूलर और साइनेज की कमी दर्ज की गई। वहीं, जसीडीह में पानी के नलों के अलावा सीटिंग, वाटर कूलर और साइनेज की व्यवस्था भी अपर्याप्त पाई गई। रिपोर्ट में ये खामियां गिनाईं सफाई व्यवस्था पर्याप्त नहीं, कीट नियंत्रण के भी कई जगह उपाय नहीं कैग की जांच में साउथ-ईस्टर्न रेलवे के कई स्टेशनों पर सफाई और स्वच्छता व्यवस्था में कमियां भी सामने आईं। पांच स्टेशनों पर कीट और कृंतक नियंत्रण के उपाय नहीं किए गए थे, जबकि चार स्टेशनों पर पेयजल बूथ और वाटर कूलर अस्वच्छ मिले। छह स्टेशनों पर आवारा कुत्तों की मौजूदगी दर्ज की गई। एक स्टेशन पर खानपान स्टॉल के आसपास सफाई नहीं थी। तीन स्टेशनों पर पान-गुटखे के दाग मिले, जबकि दो प्रतीक्षालय और एक फुट ओवरब्रिज अस्वच्छ पाया गया। कांड्रा में तीन साल से ज्यादा समय से लटके यात्री सुविधा के काम यात्री सुविधाओं से जुड़े निर्माण कार्यों की धीमी गति ने भी रेलवे की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। कांड्रा स्टेशन पर प्लेटफॉर्म का स्तर बढ़ाने, वेटिंग हॉल, टॉयलेट और प्लेटफॉर्म शेल्टर से जुड़े काम तीन साल से अधिक समय से लंबित मिला। मार्च 2024 तक इसकी भौतिक प्रगति 85 प्रतिशत थी। रेलवे के आधिकारिक दस्तावेज में भी इस परियोजना को तीन साल से अधिक विलंबित और 85% पूर्ण बताया गया है। महालीमरूप स्टेशन पर फुट ओवरब्रिज का काम भी तीन साल से लंबित मिला।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *