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धार और इंदौर जिले की सीमा से गुजरने वाली चंबल नदी इन दिनों प्रदूषण की समस्या से जूझ रही है। शुरुआती बारिश के साथ ही नदी का पानी काला और गहरे हरे रंग का दिखाई देने लगा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र के सेक्टर-3 की कुछ फैक्ट्रियों से निकलने वाला प्रदूषित पानी नालों के जरिए नदी में पहुंच रहा है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, बारिश शुरू होते ही नालों के जरिए नदी में पहुंचने वाले पानी से चंबल का रंग बदल जाता है। उनका दावा है कि बढ़ते प्रदूषण का असर मछलियों और दूसरे जलीय जीवों पर पड़ रहा है। नदी किनारे बसे गांवों के जलस्रोतों के भी प्रदूषित होने की आशंका जताई जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह समस्या पहली बार नहीं आई है। लगातार तीसरे साल शुरुआती बारिश के दौरान चंबल नदी का पानी प्रदूषित होने की स्थिति सामने आई है। इसके बावजूद प्रदूषण रोकने के लिए प्रभावी कार्रवाई की मांग की जा रही है। 960 किमी का सफर तय करती है चंबल चंबल नदी इंदौर जिले के जानापाव क्षेत्र से निकलती है। यह मध्यप्रदेश से होते हुए राजस्थान और उत्तरप्रदेश तक करीब 960 किलोमीटर का सफर तय करती है। नदी पर कई बड़े बांध भी बने हैं। ऐसे में नदी में प्रदूषण का असर बड़े क्षेत्र के पर्यावरण और जलस्रोतों पर पड़ सकता है। कलेक्टर बोले- जांच कराएंगे मामले को लेकर धार कलेक्टर राजीव रंजन मीना से चर्चा की गई। उन्होंने इसे गंभीर मामला बताया है। कलेक्टर ने जल्द जांच दल गठित कर पूरे मामले की जांच कराने का आश्वासन दिया है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि नदी में प्रदूषित पानी कहां से पहुंच रहा है और इसके लिए कौन जिम्मेदार है। इसके बाद प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कार्रवाई पर नजर रहेगी।
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चंबल नदी का पानी काला-हरा हुआ:पीथमपुर की फैक्ट्रियों के गंदे पानी पर उठे सवाल, कलेक्टर बोले- जांच कराएंगे
