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- Treesa Jolly Gayatri Secure BWF World Championship Medal | Semifinal Entry
7 मिनट पहले
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भारत की त्रिसा जॉली और गायत्री गोपीचंद ने शुक्रवार को इतिहास रच दिया। भारतीय जोड़ी ने क्वार्टर फाइनल में वर्ल्ड नंबर-4 चीनी जोड़ी जिया यी फान और झांग शु शियान को हराया।
त्रिसा और गायत्री ने यह मुकाबला 16-21, 21-15, 21-13 से जीता। इसके साथ ही भारत का विमेंस डबल्स में कम से कम ब्रॉन्ज मेडल पक्का हो गया।
इस कैटेगरी में भारत का 15 साल बाद पहला मेडल पक्का हुआ है। इससे पहले 2011 में ज्वाला गुट्टा और अश्विनी पोनप्पा ने ब्रॉन्ज जीता था। त्रिसा-गायत्री वर्ल्ड चैंपियनशिप में मेडल जीतने वाली सिर्फ दूसरी भारतीय विमेंस डबल्स जोड़ी बन गई हैं।
राउंड ऑफ-16 में जापानी जोड़ा को हराया
त्रिसा-गायत्री की जोड़ी ने राउंड ऑफ 16 में जापान की 7वीं सीड रिन इवानागा और की नाकानिशी को सीधे गेम में 21-16, 21-12 से हराया था।
सात्विक-चिराग का मुकाबला आज
सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी की भारतीय जोड़ी मेंस डबल्स के क्वार्टर फाइनल में आज उतरेगी। भारतीय जोड़ी ने राउंड ऑफ 16 में मलेशिया के जुनैदी अरिफ और रॉय किंग याप को 21-23, 21-19, 21-17 से हराया था।

भारत लगातार 11 संस्करणों में कम से कम एक मेडल जीता
बैडमिंटन इन दिनों लगातार अच्छे नतीजे दे रहा है। 2010 से भारत बैडमिंटन में तीन ओलिंपिक और 14 वर्ल्ड चैंपियनशिप मेडल जीत चुका है। साइना, श्रीकांत और सात्विक-चिराग की जोड़ी के रूप में भारत तीन कैटेगरी में वर्ल्ड नंबर-1 बन चुका है और सिंधु वर्ल्ड चैंपियन रह चुकी हैं।
संयोग से ये सभी सफलताएं 2009 में वर्ल्ड चैंपियनशिप की मेजबानी मिलने के बाद शुरू हुईं। इससे पहले वर्ल्ड चैंपियनशिप में एकमात्र मेडल 1983 में प्रकाश पादुकोण (ब्रॉन्ज) ने जीता था। भारत ने 2011 से वर्ल्ड चैंपियनशिप के लगातार 11 संस्करणों में कम से कम एक मेडल जीता है।
भारत ने अब तक 15 मेडल जीते
भारत ने अब तक 15 मेडल जीते हैं। त्रिसा-गायत्री की जोड़ी के सेमीफाइनल में पहुंचने के साथ 16 हो गए हैं। इनमें एक गोल्ड, 4 सिल्वर और 10 ब्रॉन्ज शामिल हैं। इस टूर्नामेंट में भारत को पहला मेडल प्रकाश पादुकोण ने 1983 ने दिलाया था। जबकि, एकलौता गोल्ड पीवी सिंधु ने दिलाया है।

