हिमाचल में बनी 82 दवाएं फेल, देश की 240:हार्ट-BP समेत कई बीमारियों की मेडिसिन शामिल; CDSCO की जांच में मानक पूरे नहीं




हिमाचल प्रदेश में बनी 82 दवाओं के सैंपल फेल पाए गए। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) की जांच में ये दवाएं मानकों पर खरी नहीं उतरीं। हिमाचल के अलावा पूरे देश में बनी 240 दवाएं सबस्टैंडर्ड पाई गई हैं। देशभर में फेल हुए कुल सैंपलों में एक तिहाई हिस्सेदारी हिमाचल में बनी दवाओं की है। इनमें 52 दवाएं बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ (BBN) के उद्योगों में बनी हैं। इससे देश के बड़े फार्मा हब BBN में दवाओं की गुणवत्ता पर फिर सवाल उठे हैं। फेल हुई दवाओं में बुखार और दर्द, बैक्टीरियल संक्रमण, हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, गैस-एसिडिटी, एनीमिया, एलर्जी, त्वचा रोग, उल्टी के इलाज के साथ विटामिन और कैल्शियम की दवाएं शामिल हैं। इनमें टैबलेट के अलावा इंजेक्शन, सिरप, क्रीम, जेल और ऑइंटमेंट भी हैं। इन जगहों पर बनीं फेल दवाएं जुलाई के ड्रग अलर्ट में शामिल हिमाचल में निर्मित दवाएं बद्दी, बरोटीवाला, नालागढ़, पांवटा साहिब, कालाअंब, मोगीनंद, मैहतपुर, बाथू-हरोली, नूरपुर, संसारपुर टैरेस, कुमारहट्टी और सुबाथू स्थित उद्योगों की हैं। एंटीबायोटिक भी गुणवत्ता जांच में फेल बैक्टीरियल संक्रमण के इलाज में इस्तेमाल होने वाली कई एंटीबायोटिक दवाएं भी जांच में फेल हुई हैं। इनमें एमोक्सिसिलिन, एमोक्सिसिलिन-पोटेशियम क्लैवुलनेट, सेफिक्सिम, सेफपोडोक्सिम, ऑफ्लॉक्सासिन और एजिथ्रोमाइसिन से जुड़े उत्पाद शामिल हैं। इन दवाओं का इस्तेमाल गले, कान, श्वसन तंत्र, त्वचा और मूत्र मार्ग समेत कई तरह के बैक्टीरियल संक्रमण के इलाज में किया जाता है। हार्ट, BP और डायबिटीज की दवाएं भी सूची में हृदय रोगों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली क्लोपिडोग्रेल-एस्पिरिन, एटोरवास्टेटिन-क्लोपिडोग्रेल और कार्वेडिलोल के सैंपल भी गुणवत्ता जांच में फेल हुए हैं। इन दवाओं का इस्तेमाल ब्लड क्लॉट का खतरा कम करने, कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित करने, हाई BP और हृदय रोगों के इलाज में किया जाता है। इसके अलावा डायबिटीज में इस्तेमाल होने वाली ग्लिक्लाजाइड समेत कुछ अन्य शुगर की दवाएं भी मानकों पर खरी नहीं उतरीं। गैस-एसिडिटी की दवाएं और कफ-कोल्ड सिरप भी फेल पेट में एसिडिटी और गैस की समस्या के इलाज में इस्तेमाल होने वाली ओमेप्राजोल, पैंटोप्राजोल और राबेप्राजोल से जुड़ी दवाओं के सैंपल भी फेल पाए गए हैं। एक राबेप्राजोल इंजेक्शन डिस्क्रिप्शन, पीएच, क्लैरिटी, पार्टिकुलेट मैटर और अस्से समेत कई जांचों में फेल हुआ। इसके अलावा लेवोसेटिरिजिन, फिनाइलफ्रिन, क्लोरफेनिरामिन और अन्य कफ-कोल्ड कॉम्बिनेशन वाले उत्पाद भी ड्रग अलर्ट में शामिल हैं। क्रीम-जेल में भी खामियां त्वचा रोगों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली क्रीम व जेल के सैंपल भी फेल हुए हैं। एक बेटामेथासोन वैलेरेट ऑइंटमेंट में सक्रिय दवा की मात्रा 73.7% मिली। वहीं एक अन्य क्रीम में क्लोरहेक्सिडिन की मात्रा 51.5% पाई गई। कुछ इंजेक्शन भी गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे। कंपाउंड सोडियम लैक्टेट इंजेक्शन के दो अलग-अलग बैच स्टेरिलिटी टेस्ट में फेल हुए। कुछ अन्य इंजेक्शन पीएच, पार्टिकुलेट मैटर, अस्से और क्लैरिटी की जांच में भी असफल रहे। एनीमिया, कैल्शियम और विटामिन की दवाएं भी फेल खून की कमी के इलाज में इस्तेमाल होने वाली फेरस एस्कॉर्बेट और फोलिक एसिड की गोलियों के कई बैच एनएसक्यू यानी नाट ऑफ स्टेंडर्ड क्वालियी पाए गए हैं। इसके अलावा फोलिक एसिड, कैल्शियम-विटामिन D3, मिथाइलकोबालामिन, जिंक और अन्य विटामिन कॉम्बिनेशन वाली दवाओं के सैंपल भी गुणवत्ता जांच में फेल हुए हैं। फेल बैच बाजार से वापस लिए जाएंगे स्टेट ड्रग कंट्रोलर डॉ. मनीष कपूर के मुताबिक, गुणवत्ता जांच में फेल पाए गए दवा नमूनों के मामलों में नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। संबंधित बैचों को बाजार से वापस मंगाने और संबंधित उद्योगों से जवाब लेने की प्रक्रिया अमल में लाई जाएगी।



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