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सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संजय करोल ने शनिवार को अपने विदाई भाषण में कहा कि जज भगवान नहीं होते। उनसे हर फैसला पूरी तरह सही होने की उम्मीद नहीं की जा सकती। जस्टिस करोल ने कहा, “हम जज कोई भगवान नहीं हैं। हम हर फैसला सही नहीं कर सकते। न्याय करने के लिए विनम्रता जरूरी है। जजों को हर मुकदमे में केवल याचिकाकर्ता नहीं, बल्कि उसके पीछे खड़े इंसान को भी देखना चाहिए।” जस्टिस करोल ने कहा कि संविधान जजों से केवल कानून को सही तरीके से लागू करने की उम्मीद नहीं करता। वह कानून को न्यायपूर्ण तरीके से लागू करने की भी मांग करता है। धर्म का मतलब अनुष्ठान नहीं, कर्तव्य बताया जस्टिस करोल ने संवैधानिकता और न्याय के अर्थ पर बात करते हुए कहा कि कानून, उचित प्रक्रिया और संवैधानिक वैधता जैसे विचारों को समझने का सबसे आसान तरीका धर्म है। उन्होंने साफ किया कि यहां धर्म का अर्थ किसी अनुष्ठान से नहीं, बल्कि कर्तव्य से है। उन्होंने कहा कि जज का कर्तव्य न्याय का सम्मान करना और यह सुनिश्चित करना है कि अदालत के सामने खड़ा हर व्यक्ति, चाहे वह कितना भी छोटा या कमजोर क्यों न हो, देखा और सुना जाए। चार दशक की कानूनी यात्रा को याद किया जस्टिस करोल ने अपनी चार दशक लंबी कानूनी यात्रा को याद करते हुए कहा कि अदालत उनके लिए कभी सिर्फ काम करने की जगह नहीं रही। कोर्ट रूम ने उन्हें हमेशा सहारा दिया और उनके जीवन में उनसे कहीं बड़ी और महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने बताया कि उन्होंने अदालतों में करीब 40 साल बिताए। शुरुआत में वह वकील के तौर पर अदालत के सामने पेश होते थे और पिछले 19 वर्षों से जज के रूप में जिम्मेदारी निभा रहे थे। ———————————— ये खबर भी पढ़ें… CJI बोले-छात्र गलत हों, तब भी उन्हें विरोध का अधिकार:हैदराबाद यूनिवर्सिटी में विरोध करने वाले छात्रों का पंजीयन रोकने पर बार काउंसिल को फटकार सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को हैदराबाद की लॉ यूनिवर्सिटी, NALSAR से जुड़े विवाद पर काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) को फटकार लगाई। CJI सूर्यकांत ने कहा कि भले ही छात्रों का फैसला गलत हो या उन्हें किसी ने गलत सलाह दी हो, फिर भी उन्हें अपनी बात रखने और विरोध करने का अधिकार है। पूरी खबर पढ़ें…
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जस्टिस करोल बोले- जज भगवान नहीं, हर फैसला सही नहीं:कहा- न्याय के लिए विनम्रता जरूरी, याचिकाकर्ता के पीछे खड़े इंसान को भी देखें
