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उदयपुर के ताज अरावली प्रोजेक्ट में करोड़ों की धोखाधड़ी:FIR दर्ज, कॉटेज बिक्री के नाम पर ठगी का आरोप, दिल्ली EOW ने ईशान ग्रुप पर कसा शिकंजा




उदयपुर में कोडियात स्थित 5 स्टार होटल ‘ताज अरावली’ प्रोजेक्ट में करोड़ों रुपए की धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक षड्यंत्र मामले में FIR दर्ज की गई है। आरोप है कि 5-स्टार होटल प्रोजेक्ट में कॉटेज बेचने के नाम पर निवेशकों से रकम ली गई और उनके साथ ठगी की गई। मामले में दिल्ली आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने ईशान ग्रुप के डायरेक्टर्स पर शिकंजा कसते हुए जांच शुरू कर दी है। 7 निवशकों ने कंपनी और इनके 3 डायरेक्टर के खिलाफ कुल 7 करोड़ 22 लाख रूपए की ठगी के आरोप लगाए है। जांच एजेंसी अब निवेश, लेनदेन और प्रोजेक्ट से जुड़े दस्तावेजों के आधार पर आरोपों की पड़ताल कर रही है। दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा(EOW) ने सफदरजंग थाने में दर्ज शिकायत पर प्रोजेक्ट विकसित करने वाली कंपनी मैसर्स ईशान क्लब्स एंड होटल्स प्राइवेट लिमिटेड और उसके निदेशकों के खिलाफ FIR दर्ज की है। मामले में मुंबई स्थित कंपनी के साथ-साथ तीन निदेशकों राजीव आनंद, साहिल आनंद और चारू आनंद को नामजद किया गया है। यह कार्रवाई चेतन्य सिंह, रुक्मणी सिंह, विराज सागर दास, अलका दास, सोनाक्षी दास, राहुल कुमार और सरिता शर्मा की शिकायत के बाद हुई है। आरोपियों ने दिल्ली में निवेशकों से मिलकर झांसा दिया था कि प्रोजेक्ट में कॉटेज खरीदने पर हर साल 9 से 12 फीसदी पक्का रिटर्न और कुल मुनाफे में 25 फीसदी तक हिस्सा दिया जाएगा। निवेशकों ने बैंक खातों से करोड़ों रुपए का भुगतान किया। पूरी रकम और स्टांप ड्यूटी वसूलने के बाद भी आरोपियों ने कई साल तक खरीदारों के नाम सेल डीड यानी रजिस्ट्री नहीं कराई। जब निवेशकों ने दस्तावेज और मुनाफे की मांग की, तो उन्हें राजनीतिक पहुंच का डर दिखाकर धमकियां दी गईं। बिना सूचना के पूरे प्रोजेक्ट को विदेशी कंपनी को बेचने की कोशिश भी की गई। अब दिल्ली ईओडब्ल्यू इस पूरे मामले में मनी ट्रेल और बेनामी संपत्तियों की गहन जांच कर रही है। किस निवेशक से कितने रुपए ऐंठे आरोपियों के झांसे में आकर निवेशकों ने बैंक ट्रांसफर और RTGS के जरिए करोड़ों रुपए दिए थे। इनमें चेतन्य सिंह ने 2 करोड़ (5 कॉटेज) और रुक्मणी सिंह ने 2 करोड़ (5 कॉटेज) का भुगतान किया। विराज सागर दास ने 81.60 लाख रुपए (75 लाख कीमत + 6.60 लाख स्टांप ड्यूटी), अलका दास ने 80.63 लाख रुपए और सोनाक्षी दास ने 80.63 लाख रुपए दिए। वहीं राहुल कुमार और सरिता शर्मा ने एक-एक कॉटेज के लिए 40-40 लाख रुपए का भुगतान किया था। जांच के दौरान 9 और नए पीड़ित सामने आए दिल्ली पुलिस की शुरुआती जांच के दौरान मामले में 9 और नए शिकायतकर्ता भी जुड़ गए हैं। इनमें सीमा अरुण अग्रवाल, संतोष कुमार चौधरी, संजय चिरानिया एचयूएफ, संजय कुमार चिरानिया, मुकेश कुमार चौधरी एचयूएफ, एस.एस. अग्रवाल एंड संस एचयूएफ, पूजा मेहता, बसंती मेहता और सुमन बोथरा शामिल हैं। इन सभी निवेशकों ने भी कंपनी और डायरेक्टर्स पर धोखाधड़ी के आरोप लगाते हुए संयुक्त शिकायत दी है। नेताओं के नाम का रौब और ओएसडी की धमकी निवेशकों का आरोप है कि रजिस्ट्री मांगने पर आरोपियों ने पूर्व सीएम अशोक गहलोत और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल के रसूख का डर दिखाया। शिकायत के मुताबिक, पूर्व सीएम के ओएसडी शशिकांत शर्मा ने भी फोन पर शिकायतकर्ता को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी। साथ ही आरोप है कि होटल का इस्तेमाल राजनीतिक शरणस्थली (बाड़ाबंदी) के रूप में भी किया गया। वन विभाग की दीवार तोड़ी, जमीन पर किया कब्जा प्रोजेक्ट में पर्यावरण और वन नियमों की धज्जियां उड़ाने का भी खुलासा हुआ है। उप वन संरक्षक (DFO) ने 21 जून 2021 को कलेक्टर को रिपोर्ट भेजी थी कि होटल प्रबंधन ने बुझड़ा गांव के पास वन विभाग की बनाई सुरक्षा दीवार तोड़ दी। इसके बाद बड़े पैमाने पर पेड़ काटकर अरावली हिल कंजर्वेशन जोन की सरकारी जमीन पर नई दीवार बना ली। यूआईटी द्वारा कौड़ियों के भाव जमीन देने का खेल एफआईआर में साफ लिखा हैं कि यूआईटी उदयपुर ने आरक्षित दर के 150%+15% पर जमीन आवंटन की सिफारिश की थी, लेकिन तत्कालीन सरकार ने इसे नियमों के खिलाफ घटाकर मात्र 50% कर दिया। इसके अलावा सिंचाई विभाग की देवास प्रोजेक्ट वाली जमीन (खसरा नंबर 158) को भी बिना अधिकार होटल प्रबंधन को गलत तरीके से आवंटित कर दिया गया।



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