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गुरुग्राम में मुख्यमंत्री को काले झंडे दिखाने पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं की गिरफ़्तारी के मामले ने तूल पकड़ लिया है। 24 घंटे से ज्यादा समय तक हिरासत में रखे जाने पर शनिवार को कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा खुद मोर्चा संभालने गुरुग्राम पहुंचे। उन्होंने स्थानीय पुलिस और प्रशासन पर सत्ता के दबाव में काम करने का बेहद गंभीर आरोप लगाया। हुड्डा ने साफ़ कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना हर नागरिक का अधिकार है, लेकिन गुरुग्राम पुलिस ने नियमों को ताक पर रखकर कार्रवाई की है। दीपेंद्र हुड्डा ने पत्रकारों से बातचीत में पुलिस और प्रशासन को चेताया कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर दर्ज किए गए सभी केस सरकार तुरंत वापस ले और उन्हें रिहा करे। साथ ही गुरुग्राम प्रशासन अपनी ग़लती स्वीकार करे और सार्वजनिक रूप से माफ़ी भी मांगे। अगर ऐसा नहीं हुआ तो हर जिले में कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर धरना प्रदर्शन पर विचार किया जाएगा। थाने के भीतर बर्बरता और मारपीट का आरोप दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने पत्रकारों से बातचीत में पुलिसिया कार्रवाई को पूरी तरह अलोकतांत्रिक बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं को केवल गलत तरीके से हिरासत में ही नहीं रखा, बल्कि थाने के अंदर ले जाकर उनके साथ बेरहमी से मारपीट और बर्बरता भी की। सांसद ने इस पूरी घटना को हरियाणा के राजनीतिक और प्रशासनिक इतिहास का एक ‘काला दिन’ करार दिया। उन्होंने एलान किया कि जब तक सभी गिरफ्तार कार्यकर्ताओं को बिना शर्त रिहा नहीं किया जाता, वह गुरुग्राम छोड़कर कहीं नहीं जाएंगे और यहीं डटे रहेंगे। IPS अफसर को सीधी चेतावनी सांसद ने गुरुग्राम के एक वरिष्ठ आईपीएस अफसर का नाम लिए बिना उन्हें बेहद कड़े शब्दों में हिदायत दी। उन्होंने कहा, “सरकारें आती-जाती रहती हैं। वक़्त आने पर इन अफ़सरों को देख लिया जाएगा।” उन्होंने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए पूछा कि आख़िर पुलिस कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर क्या इंट्रोगेशन करना चाहती है? प्रशासन का रवैया देखकर ऐसा लग रहा है, जैसे गुरुग्राम में कोई बहुत बड़ा और संगीन अपराध हो गया हो। बदहाली पर आवाज़ उठाना गुनाह नहीं उन्होंने सरकार से सवाल किया कि क्या शहर की बदहाल सड़कों, जलभराव और प्रशासनिक अव्यवस्थाओं के खिलाफ आवाज उठाना कोई गुनाह है? जनता की समस्याओं को उठाना विपक्ष का काम है और उसे दबाया नहीं जा सकता। सांसद ने चेताया कि अगर सरकार और प्रशासन ने उनकी मांगें नहीं मानीं, तो कांग्रेस कार्यकर्ता गुरुग्राम में डीसीपी कार्यालय का घेराव करेंगे। इसके साथ ही उन्होंने सरकार को मजबूर न करने की चेतावनी देते हुए कहा कि यदि दमनकारी नीति बंद नहीं हुई, तो भविष्य में मुख्यमंत्री और मंत्रियों के हर जिले में दौरे पर इसी तरह के काले झंडे दिखाने के प्रदर्शन की रणनीति तैयार की जाएगी। 2 डीसीपी को कारण बताओ नोटिस इस मामले में पुलिस कमिश्नर की तरफ से जहां एसएचओ सिविल लाइन को सस्पेंड किया गया है। वहीं डीसीपी वेस्ट करण गोयल और डीसीपी क्राइम हितेश यादव को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। कमिश्नर द्वारा सीएम को काले झंडे दिखाने और उनकी सुरक्षा में चूक के मामले में 17 पुलिसकर्मियों को सस्पेंड किया जा चुका है।
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गुरुग्राम में कांग्रेस कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी पर भड़के दीपेंद्र हुड्डा:बोले-अफसर याद रखें, सरकारें आती-जाती हैं, समय आने पर देखेंगे; कस्टडी में मारपीट का आरोप
