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Putrada Ekadashi Sawan month| Lord Shiva Vishnu Puja Vidhi


5 घंटे पहले

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आज (23 अगस्त) रविवार और एकादशी का योग है। सावन शुक्ल पक्ष की एकादशी पर पुत्रदा एकादशी व्रत करते हैं। मान्यता है कि इस व्रत से भगवान विष्णु की कृपा मिलती है और संतान से जुड़ी समस्याएं दूर होती हैं।

पुत्रदा एकादशी का अर्थ है संतान प्रदान करने वाली एकादशी। इस व्रत को संतान सुख, संतान की उन्नति और परिवार की खुशहाली की कामना से जोड़ा गया है। सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए खास है, जबकि एकादशी तिथि के स्वामी भगवान विष्णु हैं। इसी वजह से सावन की पुत्रदा एकादशी पर शिव और विष्णु दोनों की उपासना एक साथ करने का शुभ योग है।

शिव-विष्णु की पूजा एक साथ करें, लेकिन ध्यान रखें, विष्णु को तुलसी दल चढ़ाया जाता है। वहीं शिव को तुलसी नहीं चढ़ाते हैं। शिवलिंग पर जल, बेलपत्र, धतूरा और आंकड़े के फूल चढ़ाने की परंपरा है।

पुत्रदा एकादशी और रविवार का योग होने से सूर्य पूजा भी करें

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, पुत्रदा एकादशी और रविवार का योग है, इसलिए सुबह सूर्यदेव को अर्घ्य देकर दिन की शुरुआत करें। सूर्योदय के समय तांबे के लोटे में जल भरें, जल में कुमकुम, चावल और फूल डालें। ऊँ सूर्याय नम: मंत्र जप करते हुए सूर्य को अर्घ्य चढ़ाएं। इसके बाद घर के मंदिर में भगवान विष्णु और शिव जी की पूजा करें। पूजा में एकादशी व्रत करने का संकल्प लें। दिनभर व्रत करें और शाम को सूर्यास्त के बाद विष्णु प्रिया तुलसी के पास दीपक जलाएं।

ऐसे कर सकते हैं एकादशी व्रत

आज सुबह स्नान के बाद घर के पूजा स्थान की सफाई करें। भगवान विष्णु के सामने एकादशी व्रत का संकल्प लें। पूजा में दीप, धूप, फूल, फल, नैवेद्य और तुलसी दल रखें। इसके बाद विष्णु सहस्रनाम, विष्णु मंत्र या एकादशी व्रत कथा का पाठ किया जा सकता है।

एकादशी व्रत में निराहार रहने की परंपरा है, लेकिन हर व्यक्ति के लिए ऐसा करना जरूरी नहीं है। अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार फलाहार या सीमित सात्विक आहार लिया जा सकता है। खासकर बुजुर्ग, बच्चे, गर्भवती महिलाएं या किसी बीमारी से जूझ रहे लोग उपवास रखने से पहले चिकित्सकीय सलाह लें।

व्रत के दौरान क्रोध, विवाद और नकारात्मक विचारों से दूर रहकर भगवान विष्णु का स्मरण करना चाहिए। शाम को दोबारा दीप जलाकर विष्णु पूजा और आरती करें।

पुत्रदा एकादशी पर दान-पुण्य भी करना चाहिए। जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र, फल या दैनिक उपयोग की चीजें दान करें। सामर्थ्य के अनुसार गौसेवा करें।

नदी, सरोवर या किसी पवित्र जलस्थल पर स्नान और दीपदान करें। यदि घर से बाहर जाना संभव न हो, तो घर पर स्नान के पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाकर स्नान करें और घर के मंदिर में पूजा के बाद दीप जलाएं।

24 अगस्त को द्वादशी तिथि पर सुबह स्नान करें और भगवान विष्णु की पूजा करें। जरूरतमंद लोगों को भोजन कराएं, दान-पुण्य करें। इसके बाद स्वयं भोजन करें। इस तरह एकादशी व्रत पूरा होता है।

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