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‘शराब बेचने वाला बोला- विधायक मेरा मामा हैं’:गांव वाले शराबबंदी कराने पहुंचे तो नेता को फोन घुमाया; डायरी सिस्टम से बेच रहे थे शराब




खंडवा के पिपलोद थाना क्षेत्र के ग्राम खिड़गांव में शराबबंदी की मुहिम के दौरान राजनीतिक धौंस दिखाने का मामला सामने आया है। ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि गांव में डायरी सिस्टम के जरिए शराब बेच रहे एक युवक ने खुद को विधायक कंचन तनवे का भांजा बताया और शराब बिक्री बंद करने की समझाइश देने पर कहा कि उसका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। दरअसल, ग्रामीण और सामाजिक कार्यकर्ता गांव में शराबबंदी को लेकर लोगों को जागरूक करने पहुंचे थे। इसी दौरान उन्होंने सदानंद नाम के युवक को डायरी पर शराब बेचते हुए बताया कि इस तरह शराब बेचना अवैध है। उन्होंने पुलिस में शिकायत करने और कार्रवाई की चेतावनी देते हुए शराब बिक्री बंद करने की समझाइश दी, ताकि गांव में नशे का कारोबार रोका जा सके। आरोप है कि समझाइश के बजाय युवक ने राजनीतिक पहुंच का हवाला देते हुए तेवर दिखाए। उसने कहा कि वह कोई मामूली आदमी नहीं है। विधायक कंचन तनवे और उनके पति मुकेश तनवे उसके मामा-मामी हैं। युवक की इस बात पर ग्रामीणों और खासकर स्कूली बच्चों ने विरोध जताना शुरू कर दिया। युवक ने विधायक के पति को फोन लगाया, पीए ने उठाया विरोध बढ़ने पर सदानंद ने विधायक कंचन तनवे के पति मुकेश तनवे को फोन लगाया और मोबाइल सामाजिक कार्यकर्ता ममता मोरे को दे दिया। फोन विधायक कार्यालय में मुकेश तनवे के पीए सुनील ने उठाया। ममता मोरे ने मुकेश तनवे या विधायक कंचन तनवे से बात कराने को कहा, लेकिन पीए ने दोनों के व्यस्त होने की बात कही। इसी दौरान सदानंद ने फोन पर खुद को विधायक का भांजा बताते हुए कहा कि वह सदानंद बोल रहा है और मुकेश तनवे व कंचन तनवे उसके मामा-मामी हैं। हालांकि उसकी विधायक या उनके पति से सीधे बात नहीं हो सकी। इसके बाद सामाजिक कार्यकर्ता ममता मोरे ने संबंधित शराब ठेकेदार को फोन कर खिड़गांव में डायरी पर शराब बिक्री बंद करने को कहा। उन्होंने चेतावनी दी कि शराब बिक्री जारी रहने पर ग्रामीणों के साथ मिलकर बड़ा आंदोलन किया जाएगा। इसके बाद शराब ठेकेदार ने गांव में शराब नहीं बेचने की बात कही। क्या है डायरी सिस्टम सरकारी नियमों के मुताबिक शराब की बिक्री केवल लाइसेंसी दुकानों से की जा सकती है। ग्रामीण क्षेत्रों में आरोप है कि कुछ शराब ठेकेदार लाइसेंसी दुकानों के अलावा आसपास के गांवों में एजेंटों के जरिए शराब बिकवाते हैं। कमीशन के आधार पर चलने वाली इस व्यवस्था को स्थानीय स्तर पर ‘डायरी सिस्टम’ कहा जाता है। ग्रामीणों का आरोप है कि इस अवैध बिक्री के नेटवर्क में आबकारी विभाग और स्थानीय पुलिस की मिलीभगत रहती है। उनका कहना है कि एजेंटों को मिलने वाले कमीशन से कई गुना राशि पुलिस तक पहुंचाई जाती है। इसी वजह से ग्रामीण इलाकों में शराब की अवैध बिक्री पर प्रभावी रोक नहीं लग पाती।



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