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कहते हैं कि प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं होती, और इस बात को सच कर दिखाया है 17 वर्षीय युवा शतरंज खिलाड़ी मौर्या ने। मौर्या ने शतरंज की बिसात और इंसानी दिमाग के अंतर्संबंधों पर आधारित एक बेहद दिलचस्प पुस्तक लिखी है, जिसका शीर्षक है ‘The Psychology of 6
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मंडी शहर के रहने वाले मौर्या पिछले करीब 9 वर्षों से शतरंज की बारीकियों को सीख रहे हैं और खेल रहे हैं। अपने इसी लंबे अनुभव को उन्होंने इस पुस्तक में पिरोया है। इस पुस्तक में शतरंज खेलने से दिमाग पर पड़ने वाले सकारात्मक प्रभावों और एकाग्रता को विस्तार से समझाया गया है। मौर्या का मानना है कि शतरंज की बिसात के 64 खाने भले ही सीमित दिखते हों, लेकिन इस खेल के दौरान सीखे गए सबक (जैसे धैर्य, रणनीति और हार न मानना) इंसान को दैनिक जीवन की मुश्किलों से लड़ना सिखाते हैं।
माँ की प्रेरणा से नौवीं कक्षा में ही शुरू कर दिया था लेखन
मौर्या ने बताया कि उन्हें किताब लिखने का विचार उनकी माँ ने दिया था। उन्होंने ही मौर्या को अपने अनूठे अनुभवों को दुनिया के साथ साझा करने के लिए प्रेरित किया। मौर्या ने इस पुस्तक पर नौवीं कक्षा से ही काम करना शुरू कर दिया था। हालांकि, स्कूल की पढ़ाई, परीक्षाओं और अन्य व्यस्तताओं के कारण इस सफर में कई बार रुकावटें आईं, लेकिन उनकी माँ ने हर मोड़ पर उनका हौसला बढ़ाया और आखिरकार यह किताब पूरी हुई।
लक्ष्य मुनाफा कमाना नहीं, सोच बदलना है
दुबई में रहकर अपनी पढ़ाई कर रहे मौर्या जल्द ही अपनी 12वीं कक्षा की शुरुआत करने वाले हैं। अपनी इस सफलता पर बात करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि इस किताब को लिखने का मकसद केवल बिक्री के बड़े आंकड़े या मुनाफा कमाना नहीं है। मौर्या बच्चों और वयस्कों तक यह संदेश पहुँचाना चाहते हैं कि एक छोटा सा खेल भी हमारी सोच, त्वरित निर्णय लेने की क्षमता (Decision Making) और पूरे जीवन पर कितना गहरा व सकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।
भविष्य का प्लान: अमेरिका में उच्च शिक्षा और शतरंज में करियर
अपनी स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद मौर्या का अगला लक्ष्य उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका जाना है। वह भविष्य में भी शतरंज से खुद को अलग नहीं करना चाहते और इसी खेल व इसके मनोविज्ञान से जुड़े क्षेत्रों में अपना शानदार करियर बनाना चाहते हैं। शतरंज और साहित्य के शौकीन लोग अमेज़न पर इस पुस्तक को इसके नाम से सर्च करके आसानी से ऑर्डर कर सकते हैं।
