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दिव्यांग कर्मचारी के साथ सीढ़ियों पर बैठीं कमिश्नर:भोपाल में निगम ने 6 पत्रकारों को दिए स्व. रमेशचंद्र अग्रवाल स्मृति पत्रकारिता सम्मान




‘जोश, जुनून और जिद है, तो कामयाबी को हासिल किया जा सकता है।’ दैनिक भास्कर समूह के विस्तार और आधुनिक पत्रकारिता के प्रणेता स्वर्गीय रमेशचंद्र जी अग्रवाल के इसी ध्येय वाक्य को सम्मान देने के लिए भोपाल नगर निगम ने एक बड़ी पहल की है। पिछले बजट में घोषणा की गई थी कि नगर निगम अब हर साल रमेशचंद्र अग्रवाल जी की स्मृति में पत्रकारिता पुरस्कार प्रदान करेगा। इसके चलते मंगलवार को छह पत्रकारों को स्व. श्री रमेशचंद्र अग्रवाल स्मृति पत्रकारिता सम्मान दिए गए। इनमें वरिष्ठ पत्रकार सतीश सिंह, वीरेंद्र तिवारी, पंकज श्रीवास्तव, ब्रजेश राजपूत, शरद द्विवेदी और रवीश पाल शामिल हैं। इनके अतिरिक्त भोपाल विलीनीकरण आंदोलन के 12 सेनानियों के परिजन, 7 उत्कृष्ट समाजसेवी संस्थाओं, 2 साहित्यकारों, 5 कलाकारों, विभिन्न खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 7 खिलाड़ियों, निगमकर्मियों के कक्षा 10वीं के 38 एवं 12वीं के 29 मेघावी पुत्र/पुत्रियों और निगम के उत्कृष्ट कार्य करने वाले 74 कर्मचारियों को सम्मानित किया गया। सम्मान पाकर खुश हुए कर्मचारी, कहा-ऐसे ही सम्मान करते रहिए
जोन 20 के वार्ड एक में पदस्थ कम्प्यूटर ऑपरेटर रामेश लोधी भी उन कर्मचारियों में शामिल थे, जिन्हें मंगलवार को मानस भवन में एक कार्यक्रम के दौरान सम्मानित किया गया। दिव्यांग होने के बावजूद वह पिछले 7 साल से निगम में कम्प्यूटर ऑपरेटर हैं। सम्मानित होने के बाद जब वह सीढ़ी से उतरने का प्रयास कर रहे थे, तभी उनसे निगम कमिश्नर संस्कृति जैन ने मुलाकात की। कमिश्नर ने जमीन पर ही बैठकर उनसे चर्चा की। इस बारे में रमेश बताते हैं कि कमिश्नर मेडम ने कहा कि आप सम्मान के काबिल हैं। इस पर उन्होंने भी मुस्कुराते हुए कहा कि मेडम ऐसे ही कर्मचारियों को सम्मानित करते हैं, इससे हमें हौसला मिलता है। इससे पहले मंत्री विश्वास सारंग की मौजूदगी में सम्मान समारोह आयोजित किया गया। रामेश ने बताया कि सम्मान लेने के बाद मैं सीढ़ियों से नीचे उतर रहा था। तभी कमिश्नर मेडम ने मुझे सहारा दिया और खुद जमीन पर बैठकर मुझसे बात करने लगीं। पिछले सात साल से मैं निगम में काम कर रहा हूं, लेकिन यह पहला मौका है, जब किसी कमिश्नर ने इस तरह मुझसे बात की है। मेडम ने मुझसे बहुत सहज भाव में बात की और मुझे सम्मानित होने के लिए बधाई दी। मैंने भी उन्हें बेबाक अंदाज में कहा कि आप ऐसे ही कर्मचारियों को सम्मानित करें।



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