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TET के विरोध में 33 जिलों में शिक्षकों की रैली:रायपुर में भी प्रदर्शन,सेवा सुरक्षा और प्रमोशन के लिए टेट की शर्त हटाने की मांग




छत्तीसगढ़ में शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी टेट की अनिवार्यता के विरोध में सोमवार को प्रदेशभर में शिक्षक एकजुट हुए। छत्तीसगढ़ शिक्षक संघर्ष मोर्चा के बैनर तले सभी 33 जिला मुख्यालयों में ‘टेट मुक्ति रैली’ निकाली गई। रैली के बाद शिक्षकों ने मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री के नाम कलेक्टरों को पांच सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा। मोर्चा का कहना है कि शिक्षकों को सेवा सुरक्षा और पदोन्नति के मामले में राहत मिलनी चाहिए। संगठन ने स्पष्ट किया कि 20-25 साल से सेवा दे रहे शिक्षकों पर अब टेट की अनिवार्यता थोपना उचित नहीं है। शिक्षकों की मांग है कि वरिष्ठता के आधार पर पदोन्नति दी जाए और उनकी सेवा को सुरक्षित रखा जाए। 31 अगस्त 2028 तक का समय, फिर भी टेट को लेकर विवाद प्रदेश संयोजक संजय शर्मा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के संदर्भ में शिक्षकों को टेट पास करने के लिए 31 अगस्त 2028 तक का समय मिला है। उनका कहना है कि छत्तीसगढ़ में लंबे समय तक शिक्षकों के लिए टेट अनिवार्य नहीं था। शासन की ओर से भी नियमित रूप से टेट परीक्षा नहीं कराई गई। ऐसे में वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों को अब टेट के नाम पर सेवा और पदोन्नति को लेकर दबाव में रखना उचित नहीं है। मोर्चा का कहना है कि शिक्षकों के भर्ती और पदोन्नति नियमों में भी टेट की ऐसी बाध्यता नहीं थी। इसके बावजूद पदोन्नति के लिए टेट को अनिवार्य किए जाने की बात से प्रदेश के शिक्षक नाराज हैं। 5 प्रमुख मांगों को लेकर सौंपा ज्ञापन शिक्षक संघर्ष मोर्चा ने सरकार के सामने पांच प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें सेवा सुरक्षा और पदोन्नति के लिए टेट की अनिवार्यता से राहत, पूर्व सेवा की गणना कर पेंशन और दूसरे सेवा लाभ देने, केंद्र के समान वेतनमान और वेतन विसंगति दूर करने की मांग शामिल है। इसके अलावा 13 फरवरी 2026 के भर्ती एवं पदोन्नति नियमों में शिक्षकों के हित में जरूरी संशोधन और सेवा सुरक्षा व पदोन्नति के लिए शासन स्तर पर बीएड ब्रिज कोर्स कराने की मांग भी की गई है। पहले भी दो बड़ी मांगों में मिली सफलता मोर्चा ने कहा कि शिक्षकों की एकजुटता से पहले भी दो बड़ी मांगें पूरी हो चुकी हैं। इनमें शिक्षकों का शासकीय सेवा में संविलियन यानी मर्जर और पुरानी पेंशन योजना यानी ओपीएस का लाभ शामिल है। इसी एकजुटता के आधार पर अब टेट से राहत और सेवा सुरक्षा की लड़ाई आगे बढ़ाई जा रही है। मध्यप्रदेश की तर्ज पर विशेष टेट कराने की मांग मोर्चा के अनुसार मध्यप्रदेश में शिक्षकों के लिए विशेष विभागीय शिक्षक पात्रता परीक्षा कराने की व्यवस्था की गई है। छत्तीसगढ़ में भी इस तरह की व्यवस्था को लेकर शिक्षा विभाग से चर्चा की गई थी। लेकिन अब तक इस पर कोई ठोस निर्णय नहीं हुआ है। राहत नहीं मिली तो आंदोलन होगा और बड़ा संजय शर्मा, वीरेंद्र दुबे और केदार जैन ने कहा कि 33 जिला मुख्यालयों की रैली के जरिए शिक्षकों ने अपनी मांग सरकार तक पहुंचा दी है। अब मोर्चा के तीनों प्रदेश संयोजक आगे की रणनीति पर चर्चा करेंगे। संगठन प्रदेश के जनप्रतिनिधियों को भी शिक्षकों की समस्याओं की जानकारी देगा। साथ ही मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से इन समस्याओं पर जल्द फैसला लेने की मांग करेगा। मोर्चा ने कहा है कि अगर शिक्षकों को सेवा सुरक्षा और पदोन्नति के मामले में राहत नहीं मिली, तो आंदोलन को और बड़ा किया जाएगा।



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