सोशल मीडिया पर लोन विज्ञापन से ठगी, मास्टरमाइंड गिरफ्तार:निवेश तीन गुना करने का झांसा देते थे, पटना में ट्रेनिंग सेंटर; कई राज्यों के लोगों को ठगा




पटना साइबर पुलिस ने सोशल मीडिया के जरिए देशभर में ठगी करने वाले एक गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने गिरोह के मास्टरमाइंड समेत पांच आरोपितों को गिरफ्तार किया है। इनमें एक नाबालिग और एक युवती भी शामिल है। आरोपित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बजाज और धानी फाइनेंस से लोन दिलाने का विज्ञापन देते थे। जरूरतमंद लोग जब विज्ञापन में दिए गए मोबाइल नंबर पर संपर्क करते थे, तो गिरोह के सदस्य उनसे आधार कार्ड, बैंक खाते से जुड़ी जानकारी और अन्य जरूरी दस्तावेज हासिल कर लेते थे। इसके बाद बातचीत का तरीका बदल जाता था। लोगों को कंपनी में पैसा निवेश करने पर भारी मुनाफा होने की बात कही जाती थी। आरोपित पीड़ितों को भरोसा दिलाते थे कि उनके द्वारा निवेश की गई रकम कुछ समय में तीन गुना हो जाएगी। ज्यादा मुनाफे के लालच में आकर कई लोग उनके झांसे में फंस जाते थे और लाखों रुपये अपने खातों में ट्रांसफर करा लेते थे। यह गिरोह महाराष्ट्र से संचालित होता था और पटना में इनका एक ट्रेनिंग सेंटर भी था। किराए के मकान में रात में की छापेमारी साइबर थाना के प्रभारी डीएसपी देव आशीष हंस ने बताया कि पुलिस को पटना में सक्रिय इस साइबर गिरोह के बारे में सूचना मिली थी, जो देश के अलग-अलग राज्यों के लोगों को अपना शिकार बना रहा था। सूचना के आधार पर तकनीकी जांच शुरू की गई। मोबाइल नंबर, इंटरनेट गतिविधियों और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की जांच में पुलिस को गिरोह के पटना के राजा बाजार इलाके में सक्रिय होने की जानकारी मिली। इसके बाद पुलिस टीम ने सोमवार रात जगदेव पथ स्थित एक किराए के मकान में छापेमारी की। छापेमारी के दौरान शेखपुरा के बरबीघा निवासी सचिन कुमार, अभिषेक कुमार और सन्नी कुमार के साथ नालंदा के बिंद थाना क्षेत्र की रहने वाली युवती मोनिका पटेल को गिरफ्तार किया गया। लिंक भेजकर खातों में ट्रांसफर कराते थे रुपए पीड़ितों को विश्वास में लेने के बाद साइबर ठग उन्हें मोबाइल पर लिंक भेजते थे। इसी लिंक के माध्यम से निवेश के नाम पर रकम जमा कराने के लिए कहा जाता था। लोग ठगों के बताए तरीके से लाखों रुपए ट्रांसफर कर देते थे। रकम भेजने के बाद जब पीड़ित मुनाफे के बारे में जानकारी मांगते थे तो ठग अलग-अलग बहाने बनाने लगते थे। बाद में संपर्क टूट जाता था और पीड़ितो को अहसास होता था की उनके साथ साइबर ठगी हो चुकी है।

मराठी और तेलुगू बोलकर बनाते थे भरोसा गिरोह ने साइबर ठगी के लिए अलग तरीका अपनाया था। पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपितों ने मराठी और तेलुगू भाषा सीखी थी। देश के अलग-अलग हिस्सों के लोगों को फोन करने के दौरान वे स्थानीय भाषा में बातचीत करते थे। इससे पीड़ितों को भरोसा होता था कि फोन करने वाला किसी स्थानीय कंपनी या एजेंसी से जुड़ा व्यक्ति है। साइबर डीएसपी देव आशीष हंस के मुताबिक गिरोह के सदस्य इसी तरीके से बिहार के अलावा दूसरे राज्यों के लोगों को भी निशाना बनाते थे। आरोपितों के खिलाफ कई राज्यों में साइबर ठगी के मामले दर्ज होने की जानकारी साइबर पुलिस को मिली है। अब इन मामलों का रिकॉर्ड खंगाला जा रहा है।

महाराष्ट्र से होता था संचालित, पटना में ऑपरेट पुलिस अधिकारी के अनुसार आरोपित करीब छह महीने से पटना में रहकर साइबर ठगी जाल बुन रहे थे। उन्होंने जगदेव पथ इलाके में किराए का मकान लिया था और वहीं से ठगी के नेटवर्क संचालित किया जा रहा था। पुलिस ने छापेमारी के दौरान आरोपितों के पास से 55 हजार रुपए नकद, 12 मोबाइल फोन, 11 एटीएम कार्ड, छह पासबुक और दो राउटर बरामद किए हैं। इसके अलावा ठगी में इस्तेमाल किए जा रहे सिम कार्ड, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी पुलिस के हाथ लगे हैं। पटना में खुला था ट्रेनिंग सेंटर, कमीशन पर होती थी नियुक्ति पुलिस के अनुसार सचिन कुमार गिरोह का मुख्य सरगना है। वह युवकों को अपने साथ जोड़ने के लिए प्रतिमाह वेतन देने के साथ ठगी की रकम में मोटा कमीशन देने का लालच देता था। इसके बाद गिरोह के सदस्य सोशल मीडिया पर विज्ञापन डालने, लोगों से बातचीत करने, बैंक खातों और डिजिटल माध्यमों से रकम मंगाने समेत अलग-अलग काम करते थे। अब पुलिस गिरोह के बैंक खातों और डिजिटल लेन-देन की जांच कर रही है। इससे यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि गिरोह ने अब तक कितने लोगों को अपना शिकार बनाया और कुल कितने रुपए की ठगी की है। देश के कई राज्यों में भी फैला है नेटवर्क साइबर पुलिस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की भी तलाश कर रही है। पुलिस आरोपितों के मोबाइल फोन, सिम कार्ड, बैंक खातों और डिजिटल डिवाइस की जांच कर रही है। इसके जरिए गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों और उनके नेटवर्क तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है। डीएसपी देव आशीष हंस के मुताबिक मामले की जांच जारी है। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि आरोपितों ने देश के किन-किन राज्यों में लोगों को ठगी का शिकार बनाया है और उनके खिलाफ दर्ज मामलों की संख्या कितनी है। बरामद मोबाइल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की तकनीकी जांच के बाद साइबर ठगी से जुड़े कई और मामलों का खुलासा होने की उम्मीद है।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *