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Rakshabandhan 2026 | Rakhi Puja Vidhi, Mantra & Shubh Muhurat Update


2 मिनट पहले

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शुक्रवार, 28 अगस्त को रक्षाबंधन है। इस बार भाई-बहन के इस पर्व पर भद्रा का साया नहीं रहेगा। ऐसे में बहनें पूरे दिन अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांध सकेंगी। रक्षाबंधन पर राखी बांधने के साथ रक्षासूत्र के मंत्र का जप करने की भी परंपरा है। मान्यता है कि मंत्र के साथ रक्षासूत्र बांधने से भाई की नकारात्मकता और परेशानियों से रक्षा होती है। इस साल रक्षाबंधन पर चंद्र ग्रहण भी है, लेकिन यह ग्रहण भारत में नहीं दिखेगा, इस कारण इसका सूतक भी नहीं रहेगा। पूरे दिन धर्म-कर्म किए जा सकेंगे।

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार, रक्षासूत्र सिर्फ भाई-बहन के रिश्ते तक सीमित नहीं है। इसे सुरक्षा और शुभकामना के प्रतीक के तौर पर भी देखा जाता है। मान्यता है कि रक्षासूत्र धारण करने से मन में सकारात्मक विचार आते हैं और मानसिक शांति मिलती है।

आमतौर पर इस दिन बहनें अपने भाई को राखी बांधती हैं, लेकिन इस दिन गुरु अपने शिष्य को भी रक्षासूत्र बांध सकते हैं। पत्नी अपने पति की कलाई पर भी रक्षासूत्र बांध सकती है। पौराणिक कथा है कि देवराज इंद्र की कलाई पर युद्ध के समय उनकी पत्नी शचि ने रक्षासूत्र बांधा था। इसके बाद से रक्षासूत्र को संकट से बचाने और शुभता का प्रतीक माना जाने लगा।

राखी या रक्षासूत्र नहीं है तो क्या बांधें?

अगर आपके पास बाजार वाली राखी या रक्षासूत्र नहीं है, तो परेशान होने की जरूरत नहीं है। रेशमी धागे को भी राखी की तरह भाई की कलाई पर बांधा जा सकता है। रेशमी धागा भी न हो, तो पूजा में इस्तेमाल होने वाला लाल धागा रक्षासूत्र के रूप में बांधा जा सकता है। अगर इनमें से कुछ भी उपलब्ध नहीं है, तो भाई के माथे पर तिलक लगाकर उसके अच्छे स्वास्थ्य, सुख और उज्ज्वल भविष्य की कामना करके रक्षाबंधन मनाया जा सकता है।

भाई नहीं है तो इष्टदेव को बांधें रक्षासूत्र

जिन महिलाओं का कोई भाई नहीं है, वे रक्षाबंधन पर अपने इष्टदेव को रक्षासूत्र बांध सकती हैं। भगवान गणेश, देवी दुर्गा, हनुमान जी, श्रीकृष्ण, श्रीराम, भगवान शिव या जिस देवी-देवता को हम अपना आराध्य मानते हैं, उन्हें राखी बांधकर अपनी श्रद्धा व्यक्त की जा सकती है। पुरुष भी अपने इष्टदेव को रक्षासूत्र बांध सकते हैं। इसे भगवान के प्रति आस्था और अपनी रक्षा की प्रार्थना के रूप में देखा जाता है।

रक्षासूत्र बांधते समय बोलें यह मंत्र

रक्षासूत्र बांधते समय राजा बली से जुड़े मंत्र का जप करने की परंपरा है। मंत्र-

येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः। तेन त्वामनुबध्नामि रक्षे मा चल मा चल।।

इस मंत्र का अर्थ यह है कि जिस तरह शक्तिशाली दैत्यराज बलि को रक्षासूत्र से बांधा गया था, उसी तरह यह रक्षा सूत्र भी सुरक्षा और शुभता का प्रतीक बने। बहन भाई की कलाई पर यह धागा बांधते हुए उसके सुखी, स्वस्थ और सुरक्षित जीवन की कामना करती है।

रक्षाबंधन की पौराणिक कथा?

रक्षाबंधन से जुड़ी कई धार्मिक कथाएं प्रचलित हैं। इनमें राजा बलि और भगवान विष्णु से जुड़ी कथा को खास तौर पर बताया जाता है।

कथा के अनुसार, भगवान विष्णु ने वामन अवतार लेकर दैत्यराज बलि से तीन पग जमीन मांगी। राजा बलि ने उनकी मांग स्वीकार कर ली। इसके बाद वामन रूप में भगवान विष्णु ने अपने दो कदमों में पूरी पृथ्वी और आकाश को नाप लिया। अब तीसरा कदम रखने के लिए कोई जगह नहीं बची तो राजा बलि ने अपना सिर भगवान के सामने कर दिया।

राजा बलि की दानशीलता और समर्पण से भगवान विष्णु प्रसन्न हुए। उन्होंने बलि को पाताल लोक का राजा बना दिया और उससे वरदान मांगने को कहा। बलि ने ऐसा वरदान मांगा कि भगवान विष्णु स्वयं पाताल लोक में रहकर उसकी रक्षा करें। भगवान ने उसका वरदान स्वीकार कर लिया और पाताल लोक में रहने लगे।

भगवान विष्णु को वापस लाने के लिए देवी लक्ष्मी ने बांधी राखी

दूसरी ओर काफी समय बीत जाने के बाद भी भगवान विष्णु वैकुंठ नहीं लौटे। देवी लक्ष्मी को जब इसकी जानकारी हुई तो वे उन्हें वापस लाने के लिए पाताल लोक पहुंचीं।

कहा जाता है कि देवी लक्ष्मी ने राजा बलि से कहा कि मेरा कोई भाई नहीं है और वे उन्हें रक्षासूत्र बांधकर अपना भाई बनाना चाहती हैं। राजा बलि इसके लिए तैयार हो गए। देवी लक्ष्मी ने उनकी कलाई पर रक्षासूत्र बांधा। इसके बाद राजा बलि ने बहन महालक्ष्मी से उपहार मांगने को कहा। तब देवी लक्ष्मी ने भगवान विष्णु को उनके दिए हुए वरदान से मुक्त कर वैकुंठ लौटने देने की इच्छा जताई। राजा बलि ने अपना वचन निभाया और भगवान विष्णु को पाताल लोक से मुक्त कर दिया।

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