- Hindi News
- Lifestyle
- Live In Relationship Vs Marriage; Benefits & Challenges | Relationship Advice
17 मिनट पहलेलेखक: अदिति ओझा
- कॉपी लिंक

सवाल- मैं 28 साल का हूं और पिछले दो साल से एक लड़की के साथ रिश्ते में हूं। हमें शादी करनी है, लेकिन करियर की वजह से अभी कम-से-कम तीन साल तक शादी संभव नहीं है। मेरी पार्टनर चाहती है कि हम पहले कुछ वक्त साथ रहकर देखें, ताकि शादी से पहले एक-दूसरे को बेहतर समझ सकें।
मुझे यह बात कुछ हद तक सही भी लगती है। कुछ दोस्त भी कहते हैं कि साथ रहने से शादी के बाद होने वाली कई समस्याएं पहले ही समझ में आ जाती हैं, लेकिन हमारे परिवार इसके पक्ष में नहीं हैं।
मैं उलझन में हूं कि क्या सचमुच लिव-इन में रहने से रिश्ता मजबूत होता है या इससे नई समस्याएं भी पैदा हो सकती हैं? हमें क्या करना चाहिए?
एक्सपर्ट- डॉ. जया सुकुल, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट, नोएडा
सवाल पूछने के लिए शुक्रिया। आज के समय में यह सवाल बहुत से युवाओं के मन में आता है। करियर, आर्थिक जिम्मेदारियां और बदलती जीवनशैली की वजह से कई कपल शादी टालते हैं। ऐसे में कुछ लोग लिव-इन रिलेशनशिप को एक ‘ट्रायल’ की तरह देखते हैं। उनका मानना है कि साथ रहने से शादी से पहले एक-दूसरे की आदतें, स्वभाव और उम्मीदें बेहतर तरीके से समझी जा सकती हैं।
लेकिन यह तस्वीर इतनी सीधी नहीं है। कुछ रिश्तों में लिव-इन से समझ और भरोसा बढ़ता है, जबकि कुछ में नए विवाद और असमंजस भी पैदा हो जाते हैं। इसलिए यह तय करने का कोई एक फॉर्मूला नहीं है कि लिव-इन हर रिश्ते के लिए सही है।
रिश्ते की मजबूती इस बात पर ज्यादा निर्भर करती है कि दोनों लोग कितने परिपक्व हैं, कितना खुलकर संवाद करते हैं और आपसी मतभेदों को कैसे संभालते हैं।
लिव-इन से क्या फायदे हो सकते हैं?
अगर दोनों साथी समान सोच, सम्मान और स्पष्ट उम्मीदों के साथ रहते हैं तो कुछ सकारात्मक बातें सामने आ सकती हैं, जैसेकि–
- एक-दूसरे की रोजमर्रा की आदतों को करीब से समझने का मौका मिलता है।
- पैसों को लेकर दोनों की सोच और खर्च करने की आदत पता चलती है।
- घर के काम और जिम्मेदारियों को बांटने का व्यवहार समझ में आता है।
- गुस्सा, तनाव और मतभेदों को संभालने का तरीका समझ में आता है।
- भविष्य को लेकर दोनों की प्राथमिकताएं स्पष्ट हो सकती हैं।
- कई बार डेटिंग के दौरान जो बातें नजर नहीं आतीं, वे साथ रहने पर साफ दिखाई देने लगती हैं।

लेकिन क्या इससे रिश्ता अपने-आप मजबूत होता है?
नहीं। शोध बताते हैं कि सिर्फ साथ रहने से रिश्ता मजबूत और सफल नहीं होता। अगर पहले से ही रिश्ते में भरोसे की कमी, सम्मान की कमी या संवाद की समस्या है तो लिव-इन इन्हें खत्म नहीं करता। कई बार ये समस्याएं और ज्यादा मुखर होकर सामने आने लगती हैं।
वहीं जिन रिश्तों में ये मूल्य पहले से मौजूद होते हैं, वे लिव–इन के बगैर भी आपसी भरोसा, सम्मान और एक–दूसरे के प्रति मानवीयता बनाए रखते हैं।
संक्षेप में कहें तो लिव-इन कोई ‘रिलेशनशिप टेस्ट’ नहीं है, बल्कि यह पहले से मौजूद रिश्ते का ही विस्तार है।
लिव-इन में कौन-सी नई चुनौतियां आ सकती हैं?
एक-दूसरे के साथ रहने का मतलब सिर्फ रोमांस नहीं होता। इसमें रोजमर्रा की जिंदगी भी शामिल होती है। इसलिए साथ रहने पर इन कारणों से तनाव बढ़ सकता है, जैसेकि-
- घर के कामों और जिम्मेदारियों में गैरबराबरी।
- आर्थिक योगदान पर विवाद।
- निजी स्पेस की कमी।
- परिवार का विरोध।
- भविष्य को लेकर अलग-अलग उम्मीदें।
- अगर रिश्ता टूटे तो भावनात्मक और सामाजिक दबाव।
इसीलिए साथ रहने से पहले इन मुद्दों पर गंभीर और स्पष्ट बातचीत बहुत जरूरी है।

क्या परिवार की चिंता को नजरअंदाज करना चाहिए?
मेरी समझ से ऐसा नहीं करना चाहिए। भारतीय समाज में परिवार रिश्ते का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। अगर परिवार का विरोध है तो उसे सिर्फ पुरानी सोच कहकर खारिज करना ठीक नहीं है। आपको परिवार से बात करनी चाहिए और समझने की कोशिश करनी चाहिए कि उनकी चिंताएं क्या हैं, जैसेकि–
- सामाजिक दबाव?
- सुरक्षा?
- रिश्ते की स्थिरता?
- भविष्य को लेकर अनिश्चितता?
अगर परिवार बातचीत के लिए तैयार है तो सम्मानजनक संवाद बेहतर रास्ता हो सकता है।
अगर शादी तीन साल बाद करनी है तो क्या करें?
आपके मामले में सबसे पहले तो यह तय करें कि लिव–इन का उद्देश्य क्या है। अगर उद्देश्य सिर्फ यह है कि “देखते हैं रिश्ता चलता है या नहीं,” तो यह सोच रिश्ते में असुरक्षा पैदा कर सकती है।
लेकिन अगर दोनों शादी को लेकर प्रतिबद्ध हैं और सिर्फ परिस्थितियों की वजह से इंतजार कर रहे हैं, तब भी कुछ जरूरी बातों पर पहले सहमति बनानी चाहिए।

क्या लिव-इन के बिना भी रिश्ता मजबूत हो सकता है?
बिल्कुल। किसी रिश्ते की मजबूती इस बात पर निर्भर नहीं करती कि कपल साथ रह रहा है या नहीं। लिव-इन से रोजमर्रा की जिंदगी को करीब से समझने का मौका मिल सकता है, लेकिन रिश्ते की समझ और परिपक्वता दूसरे तरीकों से भी विकसित की जा सकती है। खासकर अगर कपल शादी को लेकर गंभीर है, तो लिव-इन को रिश्ते की मजबूती के लिए जरूरी मानना सही नहीं होगा।
शादी से पहले दोनों पार्टनर एक-दूसरे को अलग-अलग परिस्थितियों में देखकर भी काफी कुछ समझ सकते हैं। उदाहरण के लिए-
- तनाव या असहमति के समय पार्टनर का व्यवहार कैसा रहता है?
- वह आपकी सीमाओं और निजी स्पेस का कितना सम्मान करता है?
- पैसों और करियर को लेकर उसकी सोच क्या है?
- परिवार से जुड़े मुद्दों पर उसका नजरिया क्या है?
इन बातों को समझने के लिए ये स्टेप्स मददगार हो सकते हैं-
खुलकर बातचीत करें: शादी, बच्चे, करियर, पैसे, परिवार, रहने की जगह और भविष्य की प्राथमिकताओं पर पहले ही बात करें।
साथ में मुश्किल परिस्थितियां देखें: सिर्फ अच्छे समय में नहीं, बल्कि तनाव या किसी समस्या के दौरान भी पार्टनर का व्यवहार देखें–समझें।
कुछ यात्राएं साथ करें: इससे निर्णय लेने, खर्च करने, समय प्रबंधन और छोटी-छोटी असहमतियों को संभालने का तरीका समझ आता है।
आर्थिक सोच समझें: कमाई, खर्च, बचत, कर्ज और भविष्य की आर्थिक जिम्मेदारियों को लेकर दोनों की सोच कितनी मिलती है, इस पर बात करें।
घर और परिवार से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करें: शादी के बाद घरेलू जिम्मेदारियां कैसे बांटेंगे और दोनों परिवारों की भूमिका क्या होगी, यह स्पष्ट करें।
एक-दूसरे को सामाजिक परिस्थितियों में देखें: पार्टनर अपने दोस्तों, परिवार, सहकर्मियों और दूसरे लोगों के साथ कैसा व्यवहार करता है, इससे भी उसके व्यक्तित्व को समझने में मदद मिलती है।
प्री-मैरिटल काउंसलिंग: इसमें कपल अपनी अपेक्षाओं, मतभेदों और भविष्य की योजनाओं पर व्यवस्थित तरीके से बातचीत कर सकता है।

किन स्थितियों में लिव-इन से बचना चाहिए?
अगर इनमें से कोई स्थिति हो तो पहले रिश्ते पर काम करना ज्यादा जरूरी है-
- बार-बार झूठ बोलना।
- पार्टनर के व्यवहार को कंट्रोल करने की कोशिश करना।
- किसी भी तरह की भावनात्मक या शारीरिक हिंसा करना।
- लगातार शक करना।
- शादी को लेकर बिल्कुल अलग विचार होना।
ऐसी परिस्थितियों में साथ रहने से समस्या का समाधान नहीं होता है।
आपके लिए क्या बेहतर होगा?
आप दोनों शादी करना चाहते हैं और रिश्ता गंभीर है। इसलिए फैसला जल्दबाजी में या दोस्तों के अनुभवों को देखकर न लें। पहले बैठकर इन बातों पर खुलकर चर्चा करें—
- क्या दोनों शादी को लेकर एक बराबर कमिटेड हैं?
- क्या दोनों आर्थिक रूप से तैयार हैं?
- इसमें परिवार की भूमिका क्या होगी?
- क्या मतभेद होने पर हम बातचीत से समाधान निकाल पाते हैं?
अगर इन सवालों के जवाब स्पष्ट हैं, तभी अगले कदम के बारे में सोचें। जरूरत महसूस हो तो किसी रिलेशनशिप काउंसलर या प्री-मैरिज काउंसलर से भी बात करें। कई बार एक निष्पक्ष एक्सपर्ट व्यक्ति रिश्ते से जुड़े ऐसे पहलुओं को सामने ला देता है, जिन पर कपल ने पहले कभी विचार नहीं किया होता।

अंतिम बात
लिव-इन रिलेशनशिप न तो रिश्ते की सफलता की गारंटी है और न ही असफलता की वजह। यह सिर्फ साथ रहने का एक तरीका है। रिश्ते की असली नींव भरोसा, सम्मान, संवाद, भावनात्मक सुरक्षा और साझा जिम्मेदारी होती है। यदि ये चीजें मजबूत हैं तो रिश्ता बिना लिव-इन के भी सफल हो सकता है, और यदि ये कमजोर हैं तो सिर्फ साथ रहने से समस्या हल नहीं होती है।
……….
ये खबर भी पढ़ें
रिलेशनशिप एडवाइज- डेटिंग एप पर हसबैंड ढूंढ रही हूं:लेकिन यहां फ्रॉड हैं, अपने बारे में झूठ बताते हैं, सही आदमी को कैसे पहचानूं

ऑनलाइन डेटिंग अब शादी के लिए पार्टनर खोजने का एक सामान्य तरीका बन चुकी है। कई बार यहां लोगों को अच्छे रिश्ते मिलते भी हैं। लेकिन फर्जी प्रोफाइल, गलत जानकारी, कैटफिशिंग और आर्थिक ठगी के मामले भी लगातार सामने आते हैं। पूरी खबर पढ़ें…

