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माधोपुर स्थित डिप्टी कमिश्नर (DC) की रिहाइश के पास 200 फीट ऊंचे हाई-वोल्टेज बिजली के पोल पर चढ़े ‘डैम बैराज औसती संघर्ष कमेटी’ के दो बुजुर्गों का प्रदर्शन दूसरे दिन भी जारी है। पिछले 24 घंटे से जारी मान-मनौव्वल और प्रशासनिक अधिकारियों की कड़ी मशक्कत के बावजूद 81 वर्षीय कुलविंदर सिंह और 85 वर्षीय शरम सिंह टावर से नीचे उतरने को तैयार नहीं हैं। प्रशासनिक अमला, पुलिस बल और स्थानीय नेता लगातार दोनों बुजुर्गों को सुरक्षित नीचे उतारने की कोशिशों में जुटे हुए हैं। हालांकि, प्रदर्शनकारी बुजुर्गों ने साफ कर दिया है कि जब तक शाहपुरकंडी बैराज प्रोजेक्ट से जुड़ी उनकी जायज मांगें पूरी नहीं होतीं और दोषियों पर कार्रवाई का लिखित आश्वासन नहीं मिलता, तब तक वे नीचे नहीं उतरेंगे। सेहत को लेकर गहराने लगी चिंता 24 घंटे से अधिक समय से 200 फीट की ऊंचाई पर बिना ढले डटे बुजुर्गों की सेहत को लेकर भी चिंता गहराने लगी है। मौके पर भारी संख्या में स्थानीय लोग और संघर्ष कमेटी के सदस्य मौजूद हैं। कमेटी के प्रधान दयाल सिंह ने एक बार फिर दोहराया है कि यदि इस दौरान किसी भी बुजुर्ग की तबीयत बिगड़ती है या कोई जान-माल का नुकसान होता है, तो इसकी सीधी जिम्मेदारी जिला प्रशासन पठानकोट और शाहपुरकंडी डैम प्रशासन की होगी। अब विस्तार से पढ़ें 35 साल पुराना विवाद क्या है? 35 वर्षों से रोजगार की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे: बैराज बांध विस्थापित पिछले 35 वर्षों से रोजगार की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। अपनी मांगों को लेकर वे कई बार उग्र तरीके से विरोध जता चुके हैं। किसान आंदोलन की तर्ज पर बांध विस्थापित कभी पानी की टंकी तो कभी टावर पर चढ़कर प्रदर्शन करते हैं। एक विस्थापित ने तो आत्मदाह की कोशिश भी की थी, लेकिन पुलिस ने समय रहते उसे बचा लिया था। एक सदस्य को नौकरी देने का वादा किया था: बैराज औसती संघर्ष कमेटी के प्रधान दयाल सिंह ने बताया कि उनकी जमीन बैराज बांध में अधिगृहित हुई है। उस समय सरकार ने एक सदस्य को नौकरी देने का वादा किया था। सरकार ने नौकरियां दी, लेकिन अधिकारियों ने मिलीभगत करके 1-1 मरले वाले लोगों को नौकरियां दिलवा दीं। 600 से अधिक धरने लगाए जा चुके हैं: दयाल सिंह ने कहा कि जिन लोगों की अधिक जमीन अधिगृहित हुई और जिनको नौकरी की सबसे ज्यादा जरूरत थी, उन्हें नौकरी नहीं मिली। पिछले 35 वर्षों से उनके साथ कोई इंसाफ नहीं हो रहा है। इसके लिए अब तक 600 से अधिक धरने लगाए जा चुके हैं। 50 लोगों ने गलत ढंग से रोजगार हासिल किया: 31 मई 2019 को SDM धार ने अपनी रिपोर्ट में लिखा था कि 50 लोगों ने गलत ढंग से रोजगार हासिल किया है। DC को भेजी रिपोर्ट पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इस बारे में तत्कालीन पठानकोट DC संयम अग्रवाल से वह 1 सितंबर 2020 को मिले, लेकिन उन्होंने सही ढंग से बात नहीं सुनी। राजनेताओं को 22 बार मांग पत्र दे चुके: प्रधान दयाल सिंह ने कहा कि वे अब तक अधिकारियों और राजनेताओं को 22 बार मांग पत्र भी दे चुके हैं। हालांकि अभी तक कोई हल नहीं निकला। जिस कारण बुजुर्ग धरना देने को मजबूर है।
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24 घंटे से बिजली टावर पर बुजूर्ग अड़े:बोले-मांगे पूरी होने तक नहीं आएंगे नीचे, सेहत को लेकर गहराने लगी चिंता, काम नहीं आ रहे आश्वासन
