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IFWJ Rajasthan journalists plan independent digital channel launch for grassroots journalism issues in Jaipur


पत्रकारिता के बदलते स्वरूप, बढ़ते दबाव, जमीनी पत्रकारों की उपेक्षा और पत्रकारिता की विश्वसनीयता को लेकर इंडियन फेडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स (IFWJ) राजस्थान के प्रांतीय सम्मेलन में गंभीर मंथन हुआ। सी-स्कीम स्थित एसबीआई भवन के ऑडिटोरियम में आयोजित सम

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सम्मेलन में राजस्थान के श्रमजीवी पत्रकारों के लिए स्वतंत्र डिजिटल चैनल शुरू करने का निर्णय लिया गया। प्रस्तावित चैनल का संचालन श्रमजीवी पत्रकारों द्वारा किया जाएगा और इसमें ग्रामीण, जिला एवं तहसील स्तर के जनसरोकार से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता दी जाएगी।

पत्रकारिता संक्रमण और संत्रास के दौर में : राठौड़

सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए IFWJ राजस्थान के प्रदेशाध्यक्ष उपेन्द्र सिंह राठौड़ ने कहा कि पत्रकारिता वर्तमान में संक्रमण और संत्रास के दौर से गुजर रही है। सत्ता और व्यवस्था के दबाव के बीच पत्रकारों के सामने कई चुनौतियां हैं। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता की वास्तविक ताकत उसकी स्वतंत्रता और विश्वसनीयता है।

राठौड़ ने कहा कि जमीनी पत्रकारों की आवाज को मजबूत करने और जनसरोकार के मुद्दों को बिना दबाव सामने लाने के उद्देश्य से स्वतंत्र डिजिटल चैनल शुरू किया जाएगा।

सी-स्कीम स्थित एसबीआई भवन के ऑडिटोरियम में आयोजित सम्मेलन में प्रदेशभर से आए पत्रकार प्रतिनिधियों ने अपने अनुभव साझा किए।

सी-स्कीम स्थित एसबीआई भवन के ऑडिटोरियम में आयोजित सम्मेलन में प्रदेशभर से आए पत्रकार प्रतिनिधियों ने अपने अनुभव साझा किए।

पत्रकारों को अपने मुद्दों पर आंदोलन करना होगा

मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार आचार्य संजय तिवारी ने कहा कि पत्रकारों को अपने अधिकारों और समस्याओं के लिए स्वयं आंदोलन की शुरुआत करनी होगी। जब तक जिला और तहसील स्तर का पत्रकार संगठित होकर अपनी आवाज नहीं उठाएगा, तब तक जमीनी समस्याओं को मजबूती से सामने लाना मुश्किल होगा।

उन्होंने संगठन को प्रभावी बनाए रखने के लिए “चर्चा, खर्चा और पर्चा” के साथ आगे बढ़ने की आवश्यकता बताई।

चार दशक के अनुभव साझा किए

कोटा के वरिष्ठ पत्रकार पुरुषोत्तम पचौली ने चार दशक की पत्रकारिता के अनुभव साझा करते हुए कहा कि पत्रकारिता की साख बचाना हर पत्रकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने समझौतावादी रवैया छोड़कर कलम की विश्वसनीयता बनाए रखने का आह्वान किया।

प्रदेश उपाध्यक्ष पशुपति शर्मा ने कहा कि पत्रकार छोटा या बड़ा नहीं होता, उसकी निष्पक्षता और जवाबदेही ही उसकी पहचान है। उन्होंने पत्रकारों से जमीनी मुद्दों और आम जनता की समस्याओं को प्राथमिकता देने की अपील की।

डिजिटल चैनल में जमीनी मुद्दों को मिलेगी प्राथमिकता

बीकानेर के वरिष्ठ पत्रकार बृजमोहन रामावत ने डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव साझा किए और प्रस्तावित डिजिटल चैनल को सहयोग एवं मार्गदर्शन देने का आश्वासन दिया।

सम्मेलन में कहा गया कि ग्रामीण समस्याओं, सामाजिक कुरीतियों, प्रशासनिक खामियों, जनता के मूलभूत संकट और हाशिए पर खड़े वर्गों की आवाज को डिजिटल मंच पर प्रमुखता दी जाएगी।

पत्रकारों की सुरक्षा और आर्थिक स्थायित्व पर भी चर्चा

सम्मेलन में जिला स्तर पर सक्रिय पत्रकारों के परिचय-पत्र, सुरक्षा और आर्थिक स्थायित्व को लेकर संगठनात्मक रूपरेखा तैयार करने पर सहमति बनी। प्रदेशभर से पहुंचे पत्रकार प्रतिनिधियों ने अपने-अपने क्षेत्रों की समस्याएं भी सामने रखीं।

प्रदेश कार्यालय प्रभारी गणेश प्रजापति ने जिला इकाइयों के बीच बेहतर समन्वय, सहयोग और सहकार के साथ काम करने का भरोसा दिलाया।

सम्मेलन में संगठन के स्थापना दिवस 28 अक्टूबर को व्यापक प्रतिनिधित्व के साथ बड़ा कार्यक्रम आयोजित करने का निर्णय भी लिया गया।

सम्मेलन का समापन धन्यवाद प्रस्ताव के साथ हुआ। वक्ताओं ने कहा कि पत्रकारिता की विश्वसनीयता किसी संस्थान या सत्ता से नहीं, बल्कि पत्रकार की निर्भीक कलम और जनता के प्रति उसकी जवाबदेही से कायम रहती है। IFWJ राजस्थान अपनी वेबसाइट पर भी पत्रकारों के हितों और संगठन की गतिविधियों से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराता है।



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