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महाबोधि मंदिर परिसर स्थित पवित्र बोधि वृक्ष को सुरक्षित और स्वस्थ रखने के लिए एक बड़ी पहल की गई है। बारिश का मौसम शुरू होने से पहले ही वृक्ष की सुरक्षा के लिए खास इंतजाम किए गए हैं। बोधगया टेंपल मैनेजमेंट कमेटी और देहरादून के वन अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों ने मिलकर एक विशेष अभियान चलाया। इस अभियान के तहत पवित्र बोधि वृक्ष और उसके पास स्थित एक अन्य पेड़ पर इको-फ्रेंडली कीटनाशक का छिड़काव किया गया। वैज्ञानिकों की नियमित जांच के दौरान पवित्र बोधि वृक्ष पर ‘मीलीबग’ (एक प्रकार का कीट) का हल्का असर देखा गया था। इस वजह से पेड़ की कुछ पत्तियां पीली होने लगी थी। एफआरआई के वैज्ञानिक शशैलेश पांडेय और संतन भर्थवाल ने इस स्थिति को देखा। बोधि वृक्ष पर किया गया स्प्रे वैज्ञानिकों ने बताया कि मानसून के दौरान उमस बढ़ने से ऐसे कीटों का फैलना स्वाभाविक है। इसलिए, समय रहते इस संक्रमण को रोकने के लिए प्राकृतिक और पर्यावरण के अनुकूल स्प्रे करने की सलाह दी गई। जिसके बाद मुख्य बोधि वृक्ष के साथ-साथ पास के पेड़ पर भी यह स्प्रे किया गया। ताकि कीटों का असर दूसरे पेड़ों पर न फैले। यह पूरी प्रक्रिया वैज्ञानिकों की सीधी देखरेख में पूरी हुई। बारिश के दिनों में हवा में नमी और उमस बढ़ जाती है। इस वजह से कीड़े तेजी से पनपते हैं। इस इको-फ्रेंडली इलाज से न केवल मीलीबग का फैलाव रुकेगा बल्कि पवित्र बोधि वृक्ष की सेहत और उम्र भी लंबी होगी। इस तकनीक से पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं पहुंचता है। अधिकारी और कर्मी मौजूद रहे इस मौके पर बीटीएमसी की सचिव डॉ. महाश्वेता महारथी, समिति के सदस्य डॉ. अरविंद कुमार सिंह व किरण लामा मौजूद थे। उनके साथ महाबोधि महाविहार मंदिर के मुख्य भिक्षु, भिक्षु चलिंदा, वरिष्ठ भिक्षु भिक्षु डॉ. मनोज और निवासी भिक्षु आदरणीय निमा लामा भी वहां उपस्थित रहे। मंदिर के सुपरवाइजर शिव शंकर सिंह सहित बीटीएमसी के कई अधिकारी और कर्मचारी भी इस दौरान मौजूद रहे।
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बोधि वृक्ष की सुरक्षा के लिए खास इंतजाम:वैज्ञानिकों की सलाह पर इको-फ्रेंडली कीटनाशक का छिड़काव; 'मीलीबग' के असर से पत्ते पीले हो गए थे
