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कानपुर देहात के रूरा थाना क्षेत्र में एक महिला से मारपीट के मामले में पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। पहले इस मामले में केवल एनसीआर दर्ज की गई थी, लेकिन वीडियो वायरल होने और हिंदू संगठनों के विरोध के बाद अब एफआईआर दर्ज कर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। यह घटना 7 जुलाई की है। गजनेर थाना क्षेत्र के नंदपुर गांव निवासी पिंकी देवी अपने पति गया प्रसाद और बेटे कुलदीप के साथ अंबापुर जा रही थीं। रूरा नहर पुल के पास दिलशाद की आम की दुकान से आम खरीदने को लेकर विवाद शुरू हुआ, जो जल्द ही मारपीट में बदल गया। आरोप है कि महिला और उसके परिवार के साथ बेरहमी से मारपीट की गई। घटना के तुरंत बाद पुलिस ने दोनों पक्षों पर एनसीआर दर्ज कर निरोधात्मक कार्रवाई की थी। पुलिस ने मामले को शांत कराने का प्रयास किया, लेकिन कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई थी। हालांकि, मारपीट का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठने लगे। हिंदू संगठनों ने इस पर विरोध प्रदर्शन किया और पुलिस पर आरोपियों को बचाने का आरोप लगाया। इसके बाद 9 जुलाई को पीड़िता पिंकी देवी ने अपने बेटे कुलदीप के साथ रूरा थाने में तहरीर दी। तहरीर के आधार पर पुलिस ने संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया। विवेचना के दौरान नामजद आरोपी दिलशाद और लवकुश को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। मामले में अन्य आरोपियों की भूमिका की जांच अभी जारी है। इस संबंध में क्षेत्राधिकारी अकबरपुर संजय सिंह ने बताया कि पीड़िता की तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर आवश्यक कार्रवाई की गई है। उन्होंने पुष्टि की कि मामले की विवेचना जारी है। इस पूरे प्रकरण ने पुलिस की शुरुआती कार्रवाई और कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह सवाल उठ रहा है कि क्या पीड़ितों को न्याय तभी मिलता है जब मामला सोशल मीडिया पर वायरल हो और जनदबाव बने।
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बवाल के बाद कानपुर देहात पुलिस का यू-टर्न:पहले किया एनसीआर, अब दो आरोपियों को गिरफ्तार, कार्यशैली पर उठे सवाल
