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चंडीगढ़ IED केस, आरोपी फिर से 3 दिन रिमांड पर:पुलिस बोली- तरनतारन ले जाकर पूछताछ की, मुख्य आरोपी डिंपल-आशु को पकड़ना




चंडीगढ़ सेक्टर-43 बस स्टैंड के पीछे IED और विस्फोटक सामग्री मिलने के मामले में 5 दिन का पुलिस रिमांड खत्म होने के बाद गिरफ्तार तीनों आरोपियों को शनिवार फिर चंडीगढ़ जिला अदालत में पेश किया गया। पुलिस ने आरोपियों का दोबारा 5 दिन का रिमांड मांगा था। लेकिन कोर्ट से तीन दिन की रिंमांड मिली है।पुलिस ने कोर्ट में बताया कि रिमांड के दौरान आरोपियों को तरनतारन ले जाकर पूछताछ की गई है। अभी इस मामले में कई अहम जानकारियां जुटानी बाकी हैं। पुलिस ने कोर्ट को बताया कि इस मामले में मुख्य आरोपी बताए जा रहे डिंपल और आशु अभी गिरफ्तार नहीं हुए हैं। पुलिस तीनों आरोपियों की निशानदेही पर दोनों तक पहुंचना चाहती है। इसके अलावा विस्फोटक सामग्री कहां से आई, किसने उपलब्ध कराई और चंडीगढ़ में किस जगह IED लगाने की योजना थी, इसे लेकर भी पूछताछ की जानी है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने तीनों आरोपियों को 3 दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया। अब पुलिस इनसे दोबारा पूछताछ करेगी और मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए इनकी निशानदेही का इस्तेमाल करेगी। पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से करीब 6 किलो जिलेटिन की छड़ें, डेटोनेटर, पावर सोर्स, दूर से संचालित होने वाला उपकरण, एक पिस्टल, एक मैगजीन और 5 जिंदा कारतूस बरामद किए गए हैं। पुलिस का कहना है कि बरामद IED सक्रिय नहीं था। हालांकि, इतनी बड़ी मात्रा में विस्फोटक सामग्री मिलने के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया है।लो रिमांड में तरनतारन ले गई पुलिस पुलिस के अनुसार, पिछले रिमांड के दौरान तीनों आरोपियों को तरनतारन ले जाकर पूछताछ और जांच की गई थी। पुलिस का दावा है कि आरोपियों से मिली जानकारी के आधार पर नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और उनके संपर्कों के बारे में जानकारी जुटाई गई है। हालांकि, पुलिस अभी इस मामले में मुख्य आरोपी बताए जा रहे डिंपल और आशु तक नहीं पहुंच पाई है। इसी कारण पुलिस ने दोबारा 5 दिन का रिमांड मांगा था। कोर्ट ने पुलिस की मांग पूरी तरह स्वीकार करने के बजाय तीन दिन का रिमांड मंजूर किया। BKI के नेटवर्क से जुड़े होने का दावा मुख्य आरोपी डिंपल-आशु की तलाश पुलिस के लिए अब इस मामले में डिंपल और आशु की गिरफ्तारी अहम हो गई है। पुलिस ने अदालत में कहा कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के बाद दोनों मुख्य आरोपियों तक पहुंचने के लिए सुराग मिले हैं। पुलिस अब गिरफ्तार तीनों आरोपियों को दोबारा रिमांड पर लेकर उनकी निशानदेही पर डिंपल और आशु की तलाश करेगी। इसके साथ ही यह भी पता लगाया जाएगा कि दोनों ने आरोपियों को विस्फोटक सामग्री और अन्य सामान उपलब्ध कराने में क्या भूमिका निभाई थी। 3 आरोपी अमृतसर-तरनतारन के रहने वाले पुलिस ने लवप्रीत सिंह (18) निवासी सरहाली, तरनतारन, जश्नदीप सिंह (21) निवासी देवबा, तरनतारन और प्रभप्रीत सिंह उर्फ प्रभ (19) निवासी तरसिक्का, अमृतसर को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, इनमें लवप्रीत और जश्नदीप आपस में रिश्तेदार हैं। दोनों पेंटर का काम करते हैं। वहीं प्रभप्रीत पिछले कुछ समय से अपनी नानी के पास रह रहा था और दिहाड़ी-मजदूरी करता था। लवप्रीत के परिवार के अनुसार, वह घर से यह कहकर निकला था कि वह अपनी बुआ के बेटे जश्नदीप के साथ माता के मंदिर जा रहा है। परिवार को इस बात का बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि वह किसी गंभीर आपराधिक गतिविधि में शामिल हो सकता है। लवप्रीत आठवीं कक्षा तक पढ़ा है और इसके बाद पेंट का काम करने लगा था। उसके खिलाफ सरहाली थाने में पहले से एक मामला दर्ज होने की बात भी सामने आई है। मां ने लोगों से पैसे इकट्ठे कर दिए लवप्रीत की मां ने बताया कि उन्होंने बेटे को पैसे भी दिए थे। इसके लिए उन्होंने उन लोगों से पैसे इकट्ठे किए थे, जिनके घरों में वह काम करती हैं। मां के मुताबिक, उन्हें बेटे की गतिविधियों के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। उन्होंने बताया कि लवप्रीत पिछले कुछ दिनों से फोन नहीं उठा रहा था। करीब तीन दिन तक बेटे का फोन नहीं उठने से वह परेशान थीं। लवप्रीत के पिता ने बताया कि वह पहले नशा करते थे, लेकिन अब उन्हें सरकारी स्तर पर सुबह-शाम दवा मिलती है। उन्होंने कहा कि उनका बेटा खुद नशा नहीं करता था। लवप्रीत की मां ने बताया कि वह खुद शुगर की मरीज हैं। उनका कहना है कि उनके बेटे के साथ गलत हुआ है और उन्हें अपने बेटे पर पूरा भरोसा है। परिवार ने पुलिस की कार्रवाई और बेटे पर लगे आरोपों को लेकर अपनी अलग बात रखी है। दूसरे आरोपी जश्नदीप ने भी पढ़ाई बीच में छोड़ दी थी। वह पेंट का काम करता था। परिवार के अनुसार, उसकी पांच बहनें हैं। दोनों रिश्तेदारों के एक साथ घर से निकलने की बात परिवार की ओर से बताई गई है। तीसरा आरोपी प्रभप्रीत सिंह उर्फ प्रभ अमृतसर के तरसिक्का का रहने वाला है। पुलिस के अनुसार, वह पिछले कुछ समय से अपनी नानी के पास रह रहा था। यहां वह दिहाड़ी-मजदूरी करता था। प्रभप्रीत की नानी ने बताया कि उन्हें बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि उनका नाती इतनी गंभीर गतिविधि में शामिल हो सकता है। परिवार के मुताबिक, वह सामान्य तौर पर काम करने के लिए बाहर जाता था। एक दिन पहले ही थाना-36 में FIR इस मामले को लेकर एक और सवाल सामने आया है। जानकारी के अनुसार, पुलिस ने IED मिलने और आरोपियों की गिरफ्तारी से एक दिन पहले ही थाना-36 में FIR दर्ज कर दी थी। हालांकि, इस एफआईआर को लेकर अभी तक पुलिस की ओर से कोई स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक तौर पर नहीं दी गई है। यह सवाल भी उठ रहा है कि जब मामले की जानकारी और कार्रवाई पहले से चल रही थी तो एफआईआर एक दिन पहले ही क्यों दर्ज की गई और इसकी जानकारी सार्वजनिक करने को लेकर पुलिस ने स्पष्ट बयान क्यों नहीं दिया। इस संबंध में पुलिस के किसी अधिकारी की ओर से फिलहाल कोई स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया है। NIA के नहीं बुलाया मौके पर IED और आतंकी नेटवर्क से जुड़े मामलों में आमतौर पर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को भी जांच में शामिल किया जाता रहा है। खासकर जब मामला विदेश में बैठे हैंडलरों, आतंकी संगठनों और विस्फोटक सामग्री से जुड़ा हो, तो जांच कई स्तरों पर की जाती है। हालांकि, इस मामले में अभी तक NIA को जांच में बुलाए जाने की जानकारी सामने नहीं आई है। इसे लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। पुलिस की ओर से अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि इस मामले में NIA को जांच से दूर रखने का कारण क्या है या आगे एजेंसी को जांच में शामिल किया जाएगा या नहीं।



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