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रांची के मोरहाबादी मैदान में हजारों आदिवासियों का जुटान:प्रदेश कांग्रेस प्रभारी के. राजू ने कहा कि परिसीमन में एसटी सीटें नहीं घटने देंगे




रांची के मोरहाबादी मैदान में रविवार को आदिवासी एकता महाजुटान में हजारों की संख्या में लोग जुटे। हाथों में झंडे और नारों के बीच मंच से परिसीमन, आदिवासी और जल-जंगल-जमीन का मुद्दा उठा। प्रदेश कांग्रेस प्रभारी के. राजू ने कहा कि कांग्रेस झारखंड में एसटी सीटें नहीं घटने देगी। हम आपके संग खड़े रहेंगे। हम सब साथ-साथ लड़ाई लड़ेंगे। राजू ने कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से इस मुद्दे पर खुलकर बात हुई है। परिसीमन के विषय पर राहुल गांधी झारखंड के आदिवासियों के साथ खड़े हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा झारखंड के आदिवासियों के साथ षड्यंत्र कर रही है। आदिवासियों का हक और अधिकार छीना तो चुप नहीं बैठेंगे : बंधु तिर्की पूर्व मंत्री बंधु तिर्की ने कहा कि आदिवासियों का हक छीना गया तो वे चुप नहीं बैठेंगे। इसके खिलाफ लड़ाई लड़ेंगे। उन्होंने कहा कि परिसीमन केवल लोकसभा और विधानसभा की सीटों का सवाल नहीं, बल्कि आदिवासियों के राजनीतिक और संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर विषय है। झारखंड की अस्मिता और आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा के लिए इस संघर्ष को गांव-गांव तक ले जाना होगा। यदि जनसंख्या को आधार बनाकर परिसीमन में आदिवासी क्षेत्रों और राजनीतिक प्रतिनिधित्व को कम करने का प्रयास किया गया तो इसे स्वीकार नहीं किया जाएगा। राज्य में बहुत बड़ा षड्यंत्र रचा जा रहा है। आरएसएस और भाजपा झारखंड की पहचान बदलकर इसे ‘नागपुर’ बनाना चाहते हैं। महाजुटान में 5 प्रस्ताव पारित, परिसीमन से लेकर सरना कोड तक उठे मुद्दे 1:एसटी सीटें समान अनुपात में बढ़ें: लोकसभा-विधानसभा की सीटें बढ़ें तो एसटी के लिए आरक्षित सीटें भी उसी अनुपात में बढ़ें। आदिवासी क्षेत्रों और प्रतिनिधित्व में कमी मंजूर नहीं। 2: एमएमडीआर बिल वापस हो: खान एवं खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन कानून वापस लेने की मांग। कहा- इससे राज्यों की राजकोषीय स्वतंत्रता और विधायी अधिकार प्रभावित होंगे। 3: आदिवासी जमीन का अवैध हस्तांतरण रुके: सीएनटी-एसपीटी कानूनों का उल्लंघन कर हुए जमीन के हस्तांतरण, कब्जे और बिक्री पर रोक लगे। अवैध रूप से हस्तांतरित जमीन मूल रैयतों को लौटाई जाए। 4: ग्रामसभा की मंजूरी के बिना खनन नहीं: पांचवीं अनुसूची के क्षेत्रों में ग्रामसभा की सहमति के बिना खनन, जमीन अधिग्रहण और विस्थापन पर रोक लगे। पेसा और वन अधिकार कानून प्रभावी हों। 5: जनगणना में अलग सरना कोड: जनगणना फॉर्म में सरना के लिए अलग कॉलम देने की मांग दोहराई गई। राहुल गांधी का संदेश: आदिवासी अधिकार सर्वोपरि कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने राहुल गांधी का संदेश पढ़कर सुनाया। संदेश में कहा गया कि कांग्रेस के लिए आदिवासी अधिकार सर्वोपरि रहा है। अधिकारों, पहचान और सम्मान की रक्षा के लिए एकजुट हुए लोगों के साथ राहुल गांधी मजबूती से खड़े हैं। झारखंड का इतिहास आदिवासी समाज के संघर्ष से जुड़ा है। जयपाल सिंह मुंडा को याद करते हुए कहा गया कि उन्होंने संविधान सभा में आदिवासियों की आवाज बुलंद की और उनके अधिकारों को संवैधानिक सुरक्षा दिलाने के लिए संघर्ष किया। पांचवीं अनुसूची, पेसा और वन अधिकार कानून इसी सोच पर आधारित हैं कि जल-जंगल-जमीन की रक्षा करने वाले समुदायों की अपने संसाधनों पर सबसे मजबूत आवाज हो। विकास का मतलब विस्थापन नहीं, बल्कि आदिवासियों की भागीदारी, सहमति और सम्मान के साथ प्रगति होना चाहिए। झारखंड के प्राकृतिक संसाधनों पर यहां के लोगों की सार्थक भागीदारी होनी चाहिए। जल-जंगल-जमीन की लड़ाई केवल संसाधनों की नहीं, बल्कि सम्मान, अस्मिता और अधिकार की लड़ाई है।



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