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Rewa GMH Hospital Sting Video


रीवा के गांधी मेमोरियल अस्पताल (GMH) में जच्चा-बच्चा की मौत के मामले में अस्पताल प्रशासन के दावों पर सवाल खड़े हो गए हैं। बैकुंठपुर के हटवा निवासी 25 वर्षीय कल्पना मिश्रा की 26 अगस्त की रात इलाज के दौरान मौत हो गई थी। उसके साथ गर्भस्थ शिशु ने भी दम त

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परिवार ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया था। इसके बाद की गई पड़ताल में दो अलग-अलग स्टिंग ऑपरेशन, मौत से पहले का वीडियो, मेडिकल रिकॉर्ड और अस्पताल प्रशासन की कार्रवाई सामने आई है।

स्टिंग में अस्पताल के कर्मचारियों ने कैमरे पर बताया कि प्रसूति रोग विभाग की ड्यूटी डॉक्टर रात 8 से सुबह 8 बजे तक की ड्यूटी के बावजूद पूरे समय अस्पताल में मौजूद नहीं रहती थीं और जरूरत पड़ने पर ऑन कॉल आती थीं।

मामले में अब तक दो डॉक्टर और दो नर्सिंग स्टाफ को निलंबित किया जा चुका है। सरकार ने सात सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच टीम भी गठित की है।

स्टिंग में डॉक्टरों ने कहा- ड्यूटी डॉक्टर रातभर अस्पताल में मौजूद नहीं थीं।

स्टिंग में डॉक्टरों ने कहा- ड्यूटी डॉक्टर रातभर अस्पताल में मौजूद नहीं थीं।

स्टिंग में अस्पताल के ही कर्मचारियों ने बताया- डॉक्टर ऑन कॉल आती थीं

अस्पताल प्रशासन लगातार इलाज में लापरवाही से इनकार करता रहा। इसके बाद की गई पड़ताल में अस्पताल में मौजूद CMO अधिकारी से ड्यूटी को लेकर सवाल किए गए।

उन्होंने कैमरे पर बताया कि डॉ. सोनल अग्रवाल की ड्यूटी रात 8 बजे से सुबह 8 बजे तक है। साथ ही यह भी कहा कि वे कंसल्टेंट हैं और जरूरत पड़ने पर ऑन कॉल आती हैं, पूरे समय अस्पताल में नहीं बैठतीं।

इसी विभाग में गंभीर गर्भावस्था जटिलता कक्ष (Eclampsia Room) के पास मौजूद एक जूनियर डॉक्टर ने भी कैमरे पर इसी तरह की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मैडम की ड्यूटी रात 8 से सुबह 8 बजे तक है, लेकिन किसी काम के लिए बुलाने पर आती हैं।

अब जांच का सबसे अहम सवाल यही है कि कल्पना जिस समय गंभीर हालत में थी, उस दौरान विशेषज्ञ डॉक्टर अस्पताल में मौजूद थीं या नहीं। इसका जवाब ड्यूटी रजिस्टर, CCTV फुटेज और अस्पताल के रिकॉर्ड से मिल सकता है।

मौत से पहले कल्पना बचाने की गुहार लगाती रही। बच्चे की भी मौत हो गई थी।

मौत से पहले कल्पना बचाने की गुहार लगाती रही। बच्चे की भी मौत हो गई थी।

मौत से पहले का वीडियो: ‘मां मुझे बचा लो, ये लोग मुझे मार डालेंगे’

मामले में सामने आया कल्पना का आखिरी वीडियो परिवार के आरोपों को और गंभीर बनाता है। वीडियो में कल्पना महिला वार्ड से बाहर आती दिखाई देती है। वह रोते हुए अपनी मां से कहती सुनाई देती है-

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“इस तरह का इलाज जारी रहा तो ये लोग मुझे मार डालेंगे मां… मुझे बचा लीजिए, मुझे जान का खतरा है।”

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परिवार का आरोप है कि इस दौरान नर्सिंग स्टाफ ने उसकी बात को गंभीरता से लेने के बजाय उसे डांटा। वीडियो में नर्सिंग स्टाफ की ओर से उसे शांत कराने के दौरान कथित तौर पर यह कहते हुए सुना जाता है- “तू पागल हो गई है क्या?”

वीडियो की परिस्थितियों, उसमें मौजूद लोगों और रिकॉर्डिंग के समय की जांच भी अब मामले के लिए अहम है।

परिवार का आरोप- ऑपरेशन के लिए रात से मांग करते रहे, लेकिन नहीं सुनी

कल्पना की सास द्रोपदी मिश्रा का कहना है कि नर्सिंग स्टाफ लगातार सब सामान्य होने की बात कहता रहा। परिवार जब बहू को देखने जाता तो उन्हें वार्ड से बाहर कर दिया जाता।

उनका आरोप है कि परिवार के साथ अभद्र व्यवहार किया गया और कल्पना के साथ भी मारपीट की गई। द्रोपदी का कहना है कि उन्हें अंदाजा नहीं था कि इलाज के लिए अस्पताल लाई गई उनकी बहू और आने वाले बच्चे की जान चली जाएगी।

कल्पना की चाची सास सुनीता मिश्रा ने आरोप लगाया कि परिवार रात करीब 12 बजे से ऑपरेशन कराने के लिए कह रहा था। उनके मुताबिक, इस पर उनसे कहा गया- “तुम स्पेशलिस्ट हो क्या?”

सुनीता ने अपने हाथ पर चोट का निशान होने का दावा करते हुए अस्पताल में उनके साथ मारपीट का आरोप भी लगाया है।

पति का दावा- पहले रिपोर्ट सामान्य, फिर अचानक खून की जरूरत बताई

कल्पना के पति अमित मिश्रा के मुताबिक, वह 26 अगस्त की रात करीब 11 बजे पत्नी को GMH लेकर पहुंचे थे। उनका दावा है कि गर्भावस्था के दौरान कराई गई जांचों में कोई बड़ी समस्या नहीं बताई गई थी।

अस्पताल में भर्ती होने के बाद परिवार को खून की कमी की जानकारी दी गई। बाद में ऑपरेशन के लिए खून की जरूरत बताई गई। अमित के अनुसार, उन्होंने तत्काल करीब 10 हजार रुपए का खून उपलब्ध कराया।

लेकिन इसके कुछ समय बाद ही परिवार को बताया गया कि पत्नी और बच्चे दोनों की मौत हो गई। अमित के मुताबिक, घर की दीवारों पर आज भी उनके और कल्पना के नाम लिखे हैं। परिवार का कहना है कि जिस घर में बच्चे के आने की तैयारी हो रही थी, वहां अब मातम है।

घर की दीवार पर आज भी अमित-कल्पना के नाम साथ-साथ लिखे हैं।

घर की दीवार पर आज भी अमित-कल्पना के नाम साथ-साथ लिखे हैं।

पिता का सवाल- 15 लाख की जमीन बेचकर बेटी की शादी की, अचानक ऐसा क्या हुआ?

कल्पना के पिता रामशरण मिश्रा का कहना है कि उनकी बेटी मौत से कुछ समय पहले तक चल-फिर और बात कर रही थी। उन्होंने बताया कि बेटी की शादी के लिए उन्होंने करीब 15 लाख रुपए की जमीन बेची थी। अब उनका सवाल है कि अचानक ऐसी क्या स्थिति बनी कि बेटी और उसका बच्चा दोनों की मौत हो गई।

परिवार का कहना है कि यदि सरकारी अस्पताल में बेहतर और समय पर इलाज मिले तो गरीब परिवारों को निजी अस्पतालों का सहारा लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी। कल्पना के चाचा धर्मेंद्र मिश्रा का कहना है कि उसे मंगलवार को अस्पताल में भर्ती कराया गया था और गुरुवार को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

कल्पना की नियमित जांच हुई थी, कोई समस्या नहीं थी।

कल्पना की नियमित जांच हुई थी, कोई समस्या नहीं थी।

चार बार रूटीन चेकअप का रिकॉर्ड, परिवार के इलाज न कराने के दावे पर सवाल

अस्पताल अधीक्षक डॉ. राहुल मिश्रा ने परिवार की ओर से गर्भावस्था के दौरान पर्याप्त जांच नहीं कराने की बात कही थी। परिवार ने इसके विपरीत मातृ एवं बाल सुरक्षा कार्ड का रिकॉर्ड सामने रखा है।

इस रिकॉर्ड के मुताबिक कल्पना के 4 फरवरी, 8 अप्रैल, 14 जुलाई और 10 अगस्त 2026 को रूटीन चेकअप दर्ज हैं। परिवार के अनुसार ये रिकॉर्ड आंगनबाड़ी/आशा कार्यकर्ताओं संगीता, उमा और रीना की देखरेख में दर्ज किए गए थे।

मातृ एवं बाल सुरक्षा कार्ड पर U-WIN ID 422153932759 भी दर्ज है।

अब जांच में यह स्पष्ट करना जरूरी है कि इन विजिट में कौन-कौन सी जांच हुईं, रिपोर्ट में क्या स्थिति थी और अस्पताल पहुंचने के समय कल्पना का स्वास्थ्य किस स्थिति में था।

अधीक्षक से जवाब मांगने पर विवादित बयान

कल्पना के भाई जब अस्पताल अधीक्षक डॉ. राहुल मिश्रा से जवाब मांगने पहुंचे तो बातचीत का वीडियो भी सामने आया।

परिवार का आरोप है कि अधीक्षक ने बातचीत के दौरान कहा- “22 साल की बहन को गर्भवती करवा दिया…”

उन्होंने इलाज की जिम्मेदारी दूसरे डॉक्टरों की ड्यूटी से जोड़ते हुए परिवार से संबंधित डॉक्टर से सवाल करने को कहा। बातचीत में अस्पताल में आने वाले मरीजों को लेकर भी उनकी कथित टिप्पणी सामने आई है। इन बयानों को लेकर परिवार ने आपत्ति जताई है।

अस्पताल अधीक्षक बोले- इलाज में पूरी तत्परता बरती, BP काफी हाई था

अधीक्षक डॉ. राहुल मिश्रा ने परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि अस्पताल में हर मरीज को बचाने की कोशिश की जाती है और इस मामले में भी डॉक्टरों ने पूरी तत्परता से इलाज किया। उन्होंने आरोप लगाया कि मरीज के परिजनों की तरफ से शुरुआत से ही इलाज में लापरवाही की गई।

अधीक्षक के मुताबिक, कल्पना का ब्लड प्रेशर काफी हाई था। अब जांच में मेडिकल रिकॉर्ड और उपचार के दौरान की पूरी प्रक्रिया के आधार पर यह स्पष्ट होगा कि मरीज की स्थिति कितनी गंभीर थी और उपचार प्रोटोकॉल का पालन हुआ या नहीं।

चार निलंबित: ड्यूटी डॉक्टर, एनेस्थीसिया डॉक्टर और दो नर्सें कार्रवाई की जद में

मामले में भारी विवाद के बाद श्याम शाह चिकित्सा महाविद्यालय के डीन डॉ. सुनील अग्रवाल ने चार लोगों को निलंबित किया है। एनेस्थीसिया से जुड़ी किसी गड़बड़ी के आरोप की भी जांच की जा रही है। इसे लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगा। निलंबित किए गए लोग-

  • डॉ. सोनल/सोनल अग्रवाल, प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग
  • डॉ. निधि पांडेय, एनेस्थीसिया विभाग
  • साधना वर्मा, नर्सिंग स्टाफ
  • सीमा मुजालदे, नर्सिंग स्टाफ

24 घंटे में बदली जांच टीम, बीनू सिंह को हटाने पर सवाल

मामले की जांच के लिए शुरुआत में पांच सदस्यीय टीम बनाई गई थी। करीब 24 घंटे के भीतर टीम में बदलाव कर इसे सात सदस्यीय कर दिया गया। परिवार की ओर से डिप्टी सीएम से शिकायत किए जाने के बाद डॉ. बीनू सिंह को टीम से हटाकर नए सदस्य को शामिल किए जाने की जानकारी सामने आई है।

भोपाल से दो नए सदस्य भी जांच के लिए पहुंचे हैं। इसके बाद टीम ने पड़ताल तेज कर दी है। हालांकि, डॉ. बीनू सिंह को हटाने का आधिकारिक कारण क्या था, यह जांच प्रक्रिया की पारदर्शिता के लिहाज से महत्वपूर्ण सवाल है। इसका स्पष्ट जवाब संबंधित आदेश या जांच टीम की आधिकारिक जानकारी से सामने आना बाकी है।

रक्षाबंधन के दिन कल्पना की मौत के बाद गमगीन परिजन।

रक्षाबंधन के दिन कल्पना की मौत के बाद गमगीन परिजन।

राखी के दिन उठी बहन की अर्थी

रक्षाबंधन के दिन जब देशभर में भाई अपनी बहनों से राखी बंधवा रहे थे, तब मिश्रा परिवार अपनी बेटी और बहन का अंतिम संस्कार कर रहा था। मृतका के भाई सूरज और शिब्बू मिश्रा ने कहा- “दुनिया अपनी बहनों से राखी बंधवा रही थी और हम प्रयागराज में अपनी बहन का अंतिम संस्कार कर रहे थे।”

परिवार अब सिर्फ निलंबन नहीं, बल्कि दोषियों के खिलाफ FIR और कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग कर रहा है। मामले में अब असली सवाल यह है कि क्या चार निलंबन और सात सदस्यीय जांच टीम से आगे बढ़कर उस रात के इलाज की पूरी टाइमलाइन, डॉक्टरों की मौजूदगी, ऑपरेशन के निर्णय, एनेस्थीसिया और मौत के कारण की जवाबदेही भी तय होगी?

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