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ओपनएआई कर्मियों ने बेचे शेयर, पैसा रियल एस्टेट में:सैन फ्रांसिस्को में घरों के औसत दाम 17 करोड़ तक; गैर-टेक परिवार शहर छोड़ रहे




सैन फ्रांसिस्को के डुबोसे ट्राएंगल इलाके में एक आलीशान फ्लैट की कीमत करीब 30 करोड़ डॉलर (2,864 करोड़) रखी गई थी। दिलचस्प बात यह थी कि विक्रेता कैश की जगह ओपनएआई या एंथ्रोपिक के शेयर लेने के लिए भी तैयार था। यह अकेला किस्सा नहीं, बल्कि एआई से आ रहे पैसे का असर है, जो पूरे शहर की तस्वीर बदल रहा है। रियल एस्टेट फर्म रेडफिन के मुताबिक मई में शहर में घरों की औसत कीमत रिकॉर्ड 17.6 लाख डॉलर (16.8 करोड़) तक पहुंच गई, जबकि पूरे अमेरिका में यह औसत महज करीब 4 लाख डॉलर (3.8 करोड़) है। मार्च में शहर के घरों की कीमत 19% बढ़ी, अप्रैल-मई में भी 14% से ज्यादा की तेजी बनी रही। रेडफिन की चीफ इकोनॉमिस्ट डैरिल फेयरवेदर के मुताबिक, यह उछाल सीधे-सीधे एआई कंपनियों के कर्मचारियों की दौलत से जुड़ा है। पिछले साल अक्टूबर में ओपनएआई के 600 से ज्यादा मौजूदा और पूर्व कर्मचारियों ने कुल 63,000 करोड़ के शेयर बेचे थे यानी औसतन 105 करोड़ प्रति व्यक्ति। एंथ्रोपिक में भी कर्मचारियों को करीब 57,000 करोड़ के शेयर बेचने की इजाजत मिली थी। एजेंट्स का कहना है कि बोली की जंग अब आम बात हो गई है, जिसमें अक्सर मकान पूछी गई कीमत से लाखों डॉलर ज्यादा में बिकते हैं। नकद भुगतान वाली डील्स भी तेजी से बढ़ रही हैं, खासकर महंगे इलाकों में। हालांकि हर कोई इस तेजी में साथ नहीं है। बर्कले यूनिवर्सिटी के अर्थशास्त्री एनरिको मोरेटी के मुताबिक, अभी एआई बूम का शुरुआती दौर है। मेटा जैसी कंपनियों में हो रही छंटनी इस तेजी पर लगाम भी लगा सकती है। उनका यह भी कहना है कि ओपनएआई और एंथ्रोपिक के आने वाले शेयर मार्केट लिस्टिंग से होने वाली ज्यादातर कमाई कर्मचारियों को नहीं, बल्कि दुनियाभर में फैले निवेशकों को मिलेगी। इस बीच शहर के दो परिवारों की कहानी इस बदलाव का दूसरा पहलू दिखाती है। एक परिवार, जिसमें एक सदस्य ओपनएआई में काम करता है, शेयर बेचकर अपने ही इलाके में घर खरीद पाया। वहीं दूसरा गैर-टेक परिवार शहर छोड़कर बाहरी इलाके में जाने को मजबूर हो गया।
बहरहाल, डुबोसे ट्राएंगल वाला फ्लैट आखिरकार 32 लाख डॉलर ( 30.5 करोड़) में बिका, जो पूछी गई कीमत से 1.9 करोड़ ज्यादा था। क्या इस डील में एआई शेयर भी शामिल थे, यह जानकारी गोपनीय रखी गई है। एआई का पैसा सबको शहर से बाहर धकेल रहा जिस परिवार को शहर छोड़ना पड़ा, उसके मुखिया सैन फ्रांसिस्को में ही एक बड़े सरकारी पद पर हैं, फिर भी वे शहर में मकान नहीं खरीद सके। अब वे उपनगर में किराए पर लिए घर में रहते हैं, जहां से उन्हें रोज लंबा सफर तय करना पड़ता है। परिवार की मां कहती हैं, ‘अगर शहर में रहने की गुंजाइश होती तो हम कभी न जाते। यह देखकर बुरा लगता है कि एआई का पैसा बाकी सबको बाहर धकेल रहा है।’



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