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Supreme Court Courtroom Video Controversy; Petitioner Vs Judge


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नई दिल्ली4 मिनट पहले

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सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को एक याचिकाकर्ता वकील ने सुनवाई के दौरान अभद्र व्यवहार किया। इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई चल रही थी। याचिका वकील ने ही लगाई थी।

सुनवाई की शुरुआत से ही वकील ने बेहद आक्रामक रुख अपना रखा था। कुछ ही देर में उसने कोर्ट में गाली देना शुरू कर दिया। इतना ही नहीं, केस से जुड़े कागज हवा में उछालते हुए कहा… “दे देना उस @#$&% CJI को….।”

याचिकाकर्ता वकील का व्यवहार देख सिक्योरिटी ने उसे कोर्ट रूम से बाहर निकाल दिया। मामले की सुनवाई जस्टिस केवी विश्वनाथन और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच कर रही थी।

हालांकि कोर्ट ने वकील के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई न करने का फैसला किया है। साथ ही उसकी तरफ से दायर याचिका भी खारिज कर दी।

कोर्ट रूम में हुए हंगामे की 2 तस्वीरें…

वकील को सिक्योरिटी ने माइक से हटाया और कोर्ट रूम से बाहर ले गई।

वकील को सिक्योरिटी ने माइक से हटाया और कोर्ट रूम से बाहर ले गई।

वकील के कागज फेंकने के तुरंत बाद पीछे बैठी वकील बुरी तरह डर गई।

वकील के कागज फेंकने के तुरंत बाद पीछे बैठी वकील बुरी तरह डर गई।

जज से बोला- मैं आपको आदेश देता हूं

सुनवाई शुरू होते ही याचिकाकर्ता ने कहा, “न्यायिक अधिकारी महोदय, मैं आपको आदेश देता हूं कि आप लखनऊ के ACP के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश दें।

इस पर जस्टिस केवी विश्वनाथन ने हैरानी जताते हुए पूछा, आप मुझे आदेश दे रहे हैं? आप हमें आदेश दे रहे हैं?

इसके जवाब में याचिकाकर्ता ने कहा, “मेरी तरफ से बस इतना ही। सब कुछ रिकॉर्ड पर है।

गाली-गलौज करने लगा

इसके बाद उसने केस की फाइल हवा में फेंक दी और खुले कोर्ट में गाली-गलौज करने लगा। इसके तुरंत बाद सुरक्षा कर्मी सक्रिय हुए और उसे कोर्टरूम से बाहर ले गए।

फिलहाल यह जानकारी नहीं है कि इस घटना के बाद याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई अलग कार्रवाई की गई या नहीं। यह जानकारी अभी नहीं मिली है।

कोर्ट ने नहीं लिया एक्शन

हंगामे के बावजूद, बेंच ने याचिकाकर्ता के खिलाफ अदालत की अवमानना ​​या कोई अन्य कार्रवाई न करने का फैसला किया।

जस्टिस विश्वनाथन ने कहा, “हम उनके खिलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं करना चाहते। जहाँ तक मामले के गुण-दोष की बात है, हमने रिकॉर्ड देख लिए हैं और हमें विवादित आदेश में दखल देने का कोई ठोस आधार नहीं मिला। स्पेशल लीव पिटिशन खारिज की जाती है।”

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