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डेली मार्केट की जमीन के लिए निगम ने लिखा पत्र:नगर निगम ने सहमति लिए बिना ही आरआरडीए की संपत्ति पर किया दावा




राजधानी में आरआरडीए की संपत्ति को लेकर रांची नगर निगम ने कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स बनाने की योजना तैयार की है। निगम बोर्ड ने आरआरडीए की 1.71 एकड़ न्यू मार्केट चौक स्थित जमीन और 2.16 एकड़ एसके सहाय डेली मार्केट को विकसित करने का प्रस्ताव मंजूर किया है। बड़ी बात यह है कि इसके लिए आरआरडीए से सहमति भी नहीं ली गई है। दोनों बाजारों में 251 और 280 से अधिक दुकानें हैं, जिनसे आरआरडीए को सालाना करीब 40 लाख रुपए किराया मिलता है। निगम ने प्रस्ताव के बाद दोनों बाजारों की जमीन और दुकानों को अपने अधीन करने के लिए आरआरडीए को पत्र भेजा है। निगम का पत्र मिलने के बाद आरआरडीए के पदाधिकारी से लेकर कर्मचारी तक सकते में हैं। उन्हें डर सता रहा है कि जब आरआरडीए के पास संपत्ति नहीं रहेगी तो उन्हें वेतन-भत्ता कहां से मिलेगा। खास बात यह है कि नगर आयुक्त सुशांत गौरव ही आरआरडीए उपाध्यक्ष के प्रभार में हैं। आरआरडीए में अभी चेयरमैन भी नहीं है। निगम ने आरआरडीए के मार्केट के स्थान पर ऐसा प्लान बनाया न्यू मार्केट रातू रोड :1.71 एकड़ जमीन पर निगम 17,913 वर्गफीट में छह मंजिला कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स बनाएगा। बेसमेंट, लोअर व अपर ग्राउंड पर पार्किंग और तीन मंजिलों पर मार्केट होगा। यहां की 251 दुकानों-कियोस्क के मौजूदा लोगों को नई दुकानों के आवंटन में प्राथमिकता देने का प्रस्ताव है। एसके सहाय डेली मार्केट, मेन रोड : 2.16 एकड़ आरआरडीए की जमीन पर निगम 10 मंजिला कॉम्प्लेक्स बनाएगा। इसमें पार्किंग व दुकानों वाली पांच मंजिला इमारत और दो कॉमर्शियल-कम-होटल होंगे। यहां की करीब 280 दुकानों के मौजूदा आवंटियों को नई दुकानों में प्राथमिकता मिलेगी। आरआरडीए को खुद कांप्लेक्स बनाए
आरआरडीए के पास नगर निगम से अधिक शक्तियां हैं। इसके बावजूद प्राधिकार को डीफंक्ट बनाकर रख दिया गया है। प्राधिकार की संपत्ति ले ली गई तो आर्थिक रूप से यह संस्था काफी कमजोर हो जाएगी। कर्मचारियों को वेतन देना भी मुश्किल हो जाएगा। ऐसे में प्राधिकार को ही उसकी जमीन पर कॉमर्शियल कांप्लेक्स बनाना चाहिए, ताकि संस्था जिंदा रहे। परमा सिंह, पूर्व चेयरमैन, आरआरडीए शहर की सरकारी जमीन निगम की होगी नगर विकास विभाग की वर्ष 2013 की नियमावली के तहत शहरी क्षेत्र में स्थित सरकारी जमीन और संपत्तियों का हस्तांतरण नगर निगम को किया जाना है। ऐसे में शहर में स्थित आरआरडीए के मार्केट व जमीन स्वत: निगम के पास आ जाएंगे। आरआरडीए को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए भी योजना बनाई जा रही है। – सुशांत गौरव, नगर आयुक्त सह आरआरडीए उपाध्यक्ष बड़ा सवाल आरआरडीए को दुकानों से मिलने वाले किराये के अलावा भवन का नक्शा पास करने से राजस्व मिलता है। लेकिन आरआरडीए के क्षेत्र में भी कटौती करके जिला परिषद को नक्शा पास करने का अधिकार दे दिया गया है। ऐसे में आरआरडीए से बाजार भी छीन लिया गया तो उसके अस्तित्व पर ही सवाल खड़ा हो जाएगा।



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