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अररिया के पलासी प्रखंड की पिपरा बिजवार पंचायत के बच्चा खाड़ी वार्ड संख्या-03 के ग्रामीण आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। गांव को मुख्य सड़क से जोड़ने के लिए न तो कोई पक्का पुल है और न ही संपर्क सड़क। ऐसे में ग्रामीण वर्षों से नदी पार करने के लिए बांस से बनी अस्थायी चचरी का उपयोग कर रहे हैं। बरसात के मौसम में यही चचरी ग्रामीणों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन जाती है। तेज बहाव के बीच लोग जान जोखिम में डालकर रोजाना नदी पार करने को मजबूर होते हैं। ग्रामीणों के अनुसार, बारिश के दिनों में नदी का जलस्तर बढ़ने पर चचरी पर चलना बेहद खतरनाक हो जाता है। स्कूली बच्चे, मरीज और महिलाएं परेशान इसके बावजूद, गांव के स्कूली बच्चे, मरीज, महिलाएं, किसान और बुजुर्ग इसी खतरनाक रास्ते से आने-जाने को मजबूर हैं। कई बार भारी बारिश के कारण गांव का संपर्क प्रखंड और जिला मुख्यालय से कई दिनों तक पूरी तरह कट जाता है। इससे मरीजों को अस्पताल पहुंचाने, बच्चों को स्कूल भेजने और किसानों को अपनी उपज बाजार तक ले जाने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। बारिश में अस्पताल पहुंचना चुनौती ग्रामीणों का कहना है कि थोड़ी सी बारिश भी पूरे गांव की मुश्किलें बढ़ा देती है। यदि किसी की तबीयत अचानक बिगड़ जाए, तो समय पर अस्पताल पहुंचाना एक बड़ी चुनौती बन जाती है। वहीं, स्कूली बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित होती है, क्योंकि तेज बहाव के दौरान अभिभावक बच्चों को चचरी पार कर स्कूल भेजने से डरते हैं। ग्रामीण अशफाक आलम, मंगलू राम, बोकाई राम, सुरेश राम, बहुजन राम, सहदेव राम, महादेव राम, गुलई राम, शंभू राम, कस्तूर अली, वार्ड सदस्य खलीफुर रहमान, मैनुल हक और कलीमुद्दीन ने बताया कि देश को आजादी मिले 75 वर्ष से अधिक हो चुके हैं, लेकिन उनके गांव की यह मूलभूत समस्या आज भी जस की तस बनी हुई है। ग्रामीण बोले-प्रशासन मांग पर नहीं करता विचार उनका कहना है कि यदि समय रहते यह कार्य नहीं कराया गया तो बरसात के दौरान किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता। ग्रामीणों ने उम्मीद जताई कि प्रशासन उनकी वर्षों पुरानी मांग पर गंभीरता से विचार करेगा, ताकि उन्हें हर बरसात में जान जोखिम में डालकर नदी पार करने की मजबूरी से राहत मिल सके। उनका कहना है कि वर्षों से नदी पर पक्का पुल और संपर्क सड़क निर्माण की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक किसी स्तर पर ठोस पहल नहीं हुई। ग्रामीणों का आरोप है कि चुनाव के दौरान जनप्रतिनिधि पुल और सड़क निर्माण का आश्वासन देते हैं। पक्का पुल और संपर्क सड़क का निर्माण हो लेकिन चुनाव खत्म होने के बाद वादे भूल जाते हैं। इसका खामियाजा गांव के लोगों को हर साल बरसात में भुगतना पड़ता है। उनका कहना है कि सड़क और पुल नहीं होने का सबसे अधिक असर शिक्षा, स्वास्थ्य और खेती-किसानी पर पड़ रहा है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और संबंधित विभाग से मांग की है कि बच्चा खाड़ी वार्ड संख्या-03 में नदी पर जल्द से जल्द पक्का पुल और संपर्क सड़क का निर्माण कराया जाए।
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अररिया में 75 साल बाद भी नहीं बना पुल-सड़क:ग्रामीण बांस की चचरी से नदी पार करते हैं, बरसात में कट जाता है संपर्क
